ऐसा क्या गुनाह किया ? (हिंदी लव स्टोरी )


                                      ऐसा क्या गुनाह किया ? 
ऐक गलती जो कईयों की जिन्दगी को बर्बाद कर देती है .........................

ये भी एक लड़की के जज्बात की कहानी है ,जिसने सब कुछ पाया ,मगर फिर भी खाली हाथ ही रही.आइये उसी की जुबानी सुनाता हूँ.ये कहानी भी आज ३० ओक्टुबर को ही लिखी है .आज टाइम मिला था इसलिए हिंदी में ये दो कहानिया लिख कर आप सभी तक पहुंचा रहा हूँ.उम्मीद है कि ये पसंद की जाएँगी.
मेरा नाम सफीना है.हम ३ बहने २ भाई हैं.घर में मै सबसे ज्यादा लाडली थी..सबकी चहेती थी.सारे घर वाले मुझसे बहुत प्यार करते थे..हमारे घर में खुदा का दिया सब कुछ था.किसी चीज की कमी नही थी.घर में एक नोकरानी भी थी. जो दिन भर घर का काम करती थी.उसे सेलेरी दी जाती थी.हम बस दिन भर मस्ती करती थी.इसके आलावा कोई काम नही थी.मेरे पाँव में कांटा भी चुभ जाये ये भी हमारे माँ बाप को गवारा नही था.जिन दिनों मै स्कुल में पढ़ती थी , एक लड़का भी हमारी क्लास में था जिसका नाम था अयान.बेहद खुबसूरत ,अच्छा ,नेक दिल लगता था..उससे जो मिलता वो उससे आकर्षित हुए बगैर नही रहता.

                             .कई लड़कियां उस पर मरती थीं.
लेकिन वो दिल ही दिल में मुझसे मोहब्बत करता था.एक दिन उसने बोला कि मै आपसे दोस्ती करना चाहता हूँ.क्यों कि मै उसकी चाहत को महसूस कर चुकी थी ,इसलिए मैंने भी उससे दोस्ती कर ली.धीरे धीरे ये दोस्ती प्यार में बदल गई.एक दिन उसने अपने प्यार का इजहार भी कर दिया.मोहब्बत तो मै भी उससे बहुत करती थी,लेकिन कभी इजहार नही कर पाई.खैर उसने इजहार किया,तो मैंने भी उससे अपने प्यार का इजहार कर दिया.मै भी उसकी खातिर नित रोज नई नई फेशन करके स्कुल जाती थी.वो भी मेरे लिए खूब सजता संवरता था.हम दोनों रोजाना मिलते ,बातें करते.उसने मुझे अपनी मोहब्बत का पूरा यकीन दिला दिया था .मै भी उसकी मोहब्बत में गुम हो चुकी थी.उसने कहा कि मै तुमसे शादी करना चाहता हु.मै भी इसके लिए तैयार थी.लेकिन प्रोब्लम थी,घर वालों को केसे राजी किया जाये.मैंने उससे कहा कि तुम अपने घर वालों को मेरे घर रिश्ता लेकर भेजो.तो उसने अपने घर वालों को राजी करके रिश्ता लेकर भेजा.उसके घर वाले हमारे घर रिश्ता लेकर तो आ गये,लेकिन मेरे अब्बू ने इस रिश्ते से इनकार कर दिया.उसकी वजाह ये थी कि लड़के का करियर क्या है.अभी तो अयान पढता था.लेकिन मेरे अब्बू नही माने.दूसरी वजाह ये भी थी कि वो अपने दोस्त के बेटे से मेरी शादी करना चाहते थे ,ताकि मै उनकी नजर के सामने रहूँ.लेकिन अब्बू के इस फेसले से मै भी खुश नही थी.अयान के घर वाले चले तो गये ,लेकिन मेरे अब्बू के इनकार से उन्होंने शर्मिंदगी महसूस की.और इस पर वो दिल में बहुत ज्यादा नाराज हुए.मैंने घर में बहुत जोर लगाया ,खाना पीना भी छोड़कर देख लिया लेकिन अब्बू की जिद्द के आगे मेरी एक भी नही चली.अयान के घर वाले राजी थे,लेकिन मेरे घर वाले राजी नही थे.जब सारी कोशिशें बेकार होती नजर आई.तो अयान ने कहा की घर से भाग चलते हैं.इस पर मै डर गई.मैंने उससे कहा की खानदान का नाम खराब होगा.लोग जीने नही देंगे.लेकिन उसने कहा कि तुम फ़िक्र मत करो,४ दिन सब बातें करेंगे,फिर सब कुछ नोर्मल हो जाएगा.दोनों के घर वाले माफ़ कर देंगे.चलो सफीना ,हम अपनी मोहब्बत कि एक अलग दुनिया बसाते हैं.जहाँ सिर्फ प्यार हो.कोई हमे कुछ कहने वाला न हो.तुम हो मै हु और कोई भी न हो.उसकी इन प्यार भरी बातों ने मुझे कुछ होंसला दिया.और हम घर छोड़कर भाग गये.भाग कर हम एक दुसरे शहर में चले गये.लेकिन अख़बारों में हमारे बारे में ख़बरें छपी.घर वालों कि बहुत ज्यादा बदनामी हुई,लेकिन मुझे उस वक्त कुछ नही सुझा.बस अपनी दुनिया आबाद करने कि धुन सवार थी.चाहे किसीकी दुनिया बर्बाद हो.शुरू शुरू में हमारी जिन्दगी बहुत अच्छी गुजर रही थी.हम घर से भी रूपया वगैरा लेकर आये थे.कुछ दिन आराम से गुजारने के बाद अयान ने कहा कि अब घर चलते हैं.और वो मुझे अपने घर यानि मेरे ससुराल ले गया.वहां पर पहले दिन से ही उनका रवय्या मेरे लिए सही नही था.वो लोग मुझे हकीर नजरों से देखते थे.काफी परेशां करते थे.मै अयान से कहती तो वो यही कहता कि डार्लिंग ये सब तो चलता रहता है.सब्र करो.मै सब्र करती.मुझसे सारे घर का काम करवाया जाता.फिर मुझे गालियाँ भी दी जातीं.और कहा जाता कि तेरा बाप अपने आप को बड़ा शरीफ समझता था.बहुत इज्जतदार समझता था.तुम लोग भगोड़े खानदान के हो.भगोड़ों कि इज्जत नही होती.उनकी ये बातें तीर कि तरह मेरे दिल पर लगतीं.लेकिन मै भी मजबूर थी ,करती तो क्या करती.अयान से कहती ,तो वो भी अपने घर वालों का ही फेवर लेता.एक दिन सुना कि मेरे अब्बू इस दुनियां में नही रहे.तो मै अपने अब्बू के घर गई,तो मेरे भाई बहनों ने मुझे बहुत जलील किया ,और कहा कि तेरी वजह से अब्बू का इंतकाल हुआ है,उनका कहना तो सही भी था ,क्यों कि अब्बू मेरे घर से जाने के बाद बहुत ज्यादा टेंशन में रहते थे.और वो ये सदमा बर्दाश्त नही कर पाए.और दुनिया से चले गये.आखिर कार उन्होंने मुझे घर से निकाल दिया.अब मुझे अहसास हुआ कि मैंने क्या कर लिया.अपने जान से अजीज माँ बाप कि इज्जत को मिट्टी में मिला दिया. दुनियां ने उनको खूब तंजो ताने दिए.मेरी इस गलती कि सजा मेरे सारे घर वालों को मिली.बहन भाइयों के कहीं पर भी रिश्ते नही हुए.लोग यही कहते कि ये तो वो लोग हैं जिनकी बेटी घर छोड़कर भागी थी.अब मुझे अहसास हुआ कि मैंने उनको जीते जी मार डाला.उनके गम के आगे मेरे गम तो कुछ भी नही थे.अपनी जिन्दगी को आबाद करने कि हिरस में मैंने अपने सारे घर वालों कि जिन्दगी को बर्बाद कर दिया,और न ही खुद आबाद हो पाई.वो अयान जो मुझ पर मरता था ,आज वो बात तक तमीज से नही कर पाता.मै ना घर की ही रही ना घाट की.हम तो समझते थे कि घर से भागकर अपनी दुनिया बसायेंगे ,खूब हंसी ख़ुशी में जिन्दगी गुजारेंगे.लेकिन शायद हमारी खता इससे कई गुना ज्यादा बड़ी थी.आज मुझे मेरे ससुराल में भगोड़ी का नाम देदिया गया है.हत्ता कि मेरे बच्चे भी मुझसे नफरत करने लगे हैं.वो लड़की जिसे उसके माँ बाप ने कभी उदास तक ना होने दिया ,आज वो अपनी किस्मत पर आंसू बहा रही है.जो कभी अपने कपड़ों को धुल तक ना लगने देती थी ,आज वो मेली कुचेली सी नजर आती है.काम को हाथ तक न लगाने वाली ,आज नोकरानी कि तरह घर का काम करती है.नोकरानी कि भी कुछ इज्जत होती है ,लेकिन ये भी इस बाद नसीब के नसीब में कहाँ.आज सब ने इससे मुह फेर लिया.इस तरह के अंजाम भी होते हैं ,भाग कर अपनी दुनियां बसाने के सपने सजाने वालों के.ये कहानी नसीहत है ,उन तमाम लोगों के लिए ,जो इस तरह के कदम उठा कर अपने माँ बाप घर वालों की इज्जत को खाक में मिलते हैं.सोचो उन माँ बाप के दिल पर क्या गुजरती होगी ,जब उनका नाम इसलिए अखबार में आये कि उनकी बेटी घर छोड़कर भाग गई.लोग उनको जीने भी नही देते.किसी कि हंसती खेलती दुनिया को उजाड़ कर कभी कोई चेन से नही रह सकता.जिन बदनसीबों कि वजह से उनके माँ बाप जलील होते हैं ,एक दिन उनकी ओलाद भी उनको जलील करती है.इसलिए मै आप को यही मशवरा दूंगा कि चाहे कितनी ही मोहब्बत क्यों न हो ,ऐसा कदम हरगिज ना उठाये जिसकी वजह से आपके माँ बाप की इज्जत खराब हो.हर संभव कोशिश की जाये फिर भी अगर बात नही बन पाती ,तो सब्र किया जाये.जिन माँ बाप ने बिना किसी स्वार्थ के आपकी खिदमत की.आपको पाला पोसा ,क्या इसलिए कि आप अपने माँ बाप को ही छोड़ कर चले जाए.जो घर से भाग कर अपनी मोहब्बत को आबाद करने की सोच रखते हों वो मेरी बातों पर गोर जरुर करें.ये राहे आबाद नही ,बल्कि राहे बर्बाद है.दूसरा माँ बाप को भी मै ये मशवरा देना चाहूँगा कि अपने बच्चो की शादी तय करने से पहले उनसे भी मशवरा करें तो बहतर है,ये उनकी जिन्दगी का सवाल है.जब आपके बच्चों ने आपका इतना अदब किया कि कभी आपके सामने अपनी पसंद न पसंद का जिक्र नही किया तो आपका भी ये फर्ज बनता है कि आप भी उन्हें अहमियत दें.
इस पैगाम को आप तक पहुँचाने के लिए मैंने इस कहानी का सहारा लिया है.अगर आप इससे सहमत हैं तो मुझे अपने मशवरों से जरुर आगाह करें.
आपका ''आमिर'' दुबई

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7 November 2011 at 20:14

अरे यार जिन्दगी जीना इतना आसन नहीं ...हर फैसले बड़े सोच समझ के ..एक छोटे से भूकंप से कितनी जिन्दगियां तबहा हो जाती है ...

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2 April 2012 at 09:15

सच में जिंदगी के फैसले बहुत सोच समझकर लेने चाहिए..
वरना ऐसे ही पछताना पड़ सकता है..
और इस कहानी में एक बात है की..अफसाना के अब्बू सही थे,वो अपनी लाडली बेटी को ऐसे इन्सान के हाथ कैसे दे देते जो कमाता ही न हो...जिसका कोई भविष्य ही न हो...उसे थोडा सब्र रखकर समीर को अपने कैरिअर बनाने के लिए कहना चाहिए था..अच्छा भविष्य देख कर शायद अब्बू मान जाते...

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31 January 2013 at 13:02

अच्छी सीख देती कहानी

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