प्यार इश्क और मोहब्बत का फलसफा ?


प्यार इश्क और मोहब्बत का फलसफा ?

दोस्तों आपने अक्सर सुना होगा कि इसको प्यार हो गया है ,उसको इश्क हो गया है ,वगेरा .बल्कि कई तो कहते हें कि मुझे इतनी इतनी बार मोहब्बत हुई है ,तादात भी बताते है कि जिन्दगी में ३ बार प्यार हुआ है वगेरा .

आज मै आपको बताता हु कि इसका फलसफा क्या है .इन्सान को जिन्दगी में प्यार एक ही बार हो सकता है ,बाकि ये बार बार होने वाला प्यार सिर्फ जिस्मानी आकर्षण है ,जिसे प्यार का नाम दे दिया जाता है .इसको आप यु समझिये कि इन्सान किसीके भी साथ कुछ वक्त गुजार लेता है तो जल्द ही उसकी और आकर्षित हो जाता है .अब ये प्यार नही है .कितनी ही बार कितनो के साथ थोडा सा वक्त गुजार लेने से हर बार प्यार हो गया ऐसा नही है .ये सिर्फ आकर्षण है .

कैसे पता चले कि वाकई प्यार हुआ है ?
जिन्दगी में पहली बार किसी कि तरफ दिल का आकर्षित होना ,और ओ भी ऐसा कि दिल में घर कर जाना ,यानि उसके बगेर दिल न लगना ,चैन न आना ,हर जगह उसी का दिखाई देना ,और उसके प्रति दिल में कोई गन्दा ख्याल न होना ,उससे शादी कि नियत का पाया जाना ,ये प्यार होता है ,बाकि बार बार इस तरह कि कैफियत का होना प्यार नही .एक और पहचान ये है कि पहला प्यार जिन्दगी भर याद रहता है .बाकि प्यार को इन्सान भूल जाता है ,ये सिर्फ आकर्षण होता है .
मोहब्बत क्या है ?
किसी के प्यार में दिल ही दिल में घुटना ,अन्दर एक जलन का सा महसूस होना ,एक दर्द का सा हर वक्त महसूस होना ,बगेर किसी बात के दिल का उदास उदास सा रहना ये मोहब्बत की  डेफिनेशन  में आता है .जिसको मोहब्बत हुई है उसे मोहिब्ब कहते है ,और जिससे मोहब्बत हुई है उसे महबूब कहते है .मोहिब्ब जब तक मोहिब्ब रहे तब तक तो कोई खास खतरा नही होता ,लेकिन जब ये आशिक बन जाये तो फिर इसकी जिन्दगी को ज्यादा खतरा बढ़ जाता है ,आइये अब इश्क और आशिक के बारे में भी आपको बता देता हु .
इश्क क्या है ?
प्यार जब शिद्दत बन जाता है ,मसलन इन्सान मोहब्बत में इतना गुम हो गया कि उसे दिन रात का, खाने पिने का , पहनने ओढने का ,किसी भी चीज़ का ख्याल न रहा तो समझो कि इसका प्यार अब इश्क बन गया है ,इसकी एक मिसाल यु समझिये कि एक बार मजनू एक कुत्ते के पाऊँ चूम रहा था किसी ने पूछा कि ये क्या कर रहे हो ,शर्म करो तुम कुत्ते के पाऊँ चूम रहे हो ,तुम इन्सान हो ,ऐसी हरकत अच्छी नही ,तो मजनू बोला कि मै तो सिर्फ ये जानता हु कि ये कुत्ता लैला कि गली का है ,और महबूब कि गलियों के कुत्ते भी महबूब ही हुआ करते है .
इसे इश्क का नाम दिया जा सकता है ,क्यों कि उसे होश ही नही रहा कि वो क्या कर रहा है ? प्यार जब शिद्दत बन जाये तो इश्क कहलाता है ,और इश्क जब शिद्दत बन जाये तो इन्सान पागल हो जाता है .क्यों कि इसके बाद मोहब्बत कि कोई मंजिल नही होती .
सच्चे आशिक में और झूठे में क्या फर्क है ?
सच्चा आशिक कभी भी अपनी मोहब्बत का राज़ किसी को नही बताते वो अन्दर ही अन्दर घुटते रहते है ,मगर जुबान पर शिकायत नही लाते.और कभी भी अपने महबूब का नाम इसलिए नही लेते कि बदनाम न हो जाये ,अब आप सोच रहे होंगे कि मजनू भी तो लैला लैला करता था तो क्या वो झूठा था ,इसका जवाब में पहले ही दे चूका कि वो इश्क में था ,इश्क में अपने होश खो चुका था ,अब उसे क्या पता कि वो क्या कर रहा है .
दूसरा झूठा आशिक ,इस तरह के आपको बे शुमार मिल जायेंगे ,जो अपनी मोहब्बत का ढिंढोरा सबके सामने पिटते फिरते है .अपने महबूब को इतना बदनाम कर देते है कि उसे जीने लायक नही छोड़ते .फिर अगर शादी न हो तो जो जग हंसाई होती है वो तोबा तोबा.
टैटू वगेरा गुदवाना ?
टैटू वगेरा गुदवाना यानि अपने जिस्म को अपने हाथो से तकलीफ देना क्या सही है ? कोई भी धर्म इसकी इजाजत नही देता .हाँ अगर कोई इश्क में है ,जेसे कि उसको होश नही ,तो एक अलग बात है ,अब उसपर कोई क्या कह सकता है ,लेकिन यहाँ सब होश में होते हुए भी इस तरह के काम करते है ,जो कि गलत है .मोहब्बत दिल कि एक केफियत का नाम है ,न कि इस तरह कि हरकतों का .वो दिल से होती है उसे दिल में ही रहने दे ,दुनिया में न आने दे .
घर से भागना ,?
अपनी जिन्दगी को आबाद करने के लिए अपने सारे खानदान को जीते जी मार जाना ,अपनी ख़ुशी को पाने के लिए अपने माँ बाप को जिन्दगी भर के लिए बदनामी का दुःख दे जाना ये कहाँ कि समझदारी है भाई ,आप ये सोच कर भाग जाओगे कि हंसी ख़ुशी जिन्दगी गुजार देंगे ,लेकिन ये भी गलत फहमी ही है ,आप घर से भागने के बाद एक दिन भी चेन से नही रह सकते ,अपने सारे घर वालो को दुनिया के सामने जलील करने के बाद आप कैसे खुश रह सकते है ,ये गलती करने के बाद जिन्दगी भर इसका दुःख रहता है ,कि काश मैंने ऐसा न किया होता .इससे पहले एक १०० बार सोच लो ,इसका अंजाम जिल्लत और रुसवाई के आलावा कुछ भी नही है .लोग न आपको जीने देंगे और न आपके माँ बाप को ,ताने मार मार कर जीते जी मार डालेंगे .पूरा समाज थू थू करेगा.

नशे के जरिये गम को भुलाने की नाकाम कोशिश :

कई लोग इस मर्ज़ के गम को भुलाने के लिए नशे वगेरा भी करने लगते है ,बेचारे ये समझते है की इससे गम को भुला सकेंगे ,इसी गलत फहमी में वो नशे के आदी होकर रह जाते है .नाशो से गम दूर नही होता ,ये तो ऐसा है जेसे एक बीमारी को दूर करने के लिए दूसरी बीमारी को पालना ,ये बेवकूफी है .नशा खुद एक मर्ज़ है ,इससे क्या कोई मर्ज़ दूर होगा ,शायद ये फिल्मो से सिखा है ,ये हमारी बदनसीबी है कि आज कल कि फिल्मे हमारी गलत तरबियत कर रही है ,और हम बच्चो कि तरह गुमराह भी हो रहे है .हीरो बिल्डिंग से कूदता है ,मगर उसको देख कर तो कहते है कि ये कमरे का कमाल है ,उसकी नकल नही कि जाती ,लेकिन कितने बेवकूफ लोग है जो उनको नशा करते देख कर खुद भी नशे करने लगते है ,इसे कमरे का कमाल क्यों नही समझते .हमारे समाज में नशेडी को कोई अच्छा नही समझा जाता ,फिर क्यों नशे करते हो भाई .ये दिमाग में बिठा ले कि इससे कभी भी गम दूर नही होता ,बीमारी दवा से ठीक होती है न कि दूसरी बीमारी पालने से .

इलाजे मोहब्बत को करने चला था ,

बीमारी को इक और क्यों लेके आया ?

शिफा चाहिए तो दवा और दुआ कर ,

नशे को समझ कर दवा लेके आया ?

नशा है बुरा ये तुझे भी पता है ,

तो फिर क्यों न इससे कभी बाज़ आया ?

नशा तो इलाजे मोहब्बत नही है ,
तेरी अक्ल में फिर है क्यों कर ये आया ?
ऐ "आमिर " नशा तो खुद खुदकशी है ,
इलाजे मोहब्बत इसे क्यों बनाया ?
इसका इलाज़ क्या है ?
प्यार इश्क और मोहब्बत ये सब बोलने में एक ही समझे जाते है लेकिन तीनो की डेफिनेशन में फर्क है ,जो आप समझ चुके होंगे .अब मै इसके इलाज़ की तरफ आता हु ,इसका एक ही वाहद इलाज़ है और वो है शादी .जो इसका महबूब है उससे इसकी शादी कर दी जाये तो इसको इस बीमारी से शिफा मिल सकती है ,इसके आलावा दूसरा इलाज़ है बर्दाश्त .जो की हर एक के बस में नही होता ,कुछ लोग तो बर्दाश्त करने में कामियाब हो जाते है और कुछ जो बर्दाश्त नही कर पाते ,वो खुदकशी कर लेते है .जबकि खुदकशी भी इसका इलाज़ नही है .ये कायरों और बुझदिलो का तरीका है ,जिन्दा दिलो का नही है
एक और इलाज़ ,
एक और इलाज़ ये है कि आप हवा पानी बदल दे ,यानि कि आप किसी ऐसे मुल्क में चले जाये जहाँ आप अपना करियर भी बना सकें और इस गम को भी भुला सकें .ये सबसे बहतर तरीका है ,मैंने कई आशिक नुमा लोगो को इस तरीके से  इलाज़ किया है ,आज वो बिलकुल ठीक है .कोई भी आपको इस मर्ज़ का मरीज मिले तो उसे आप इस तरीके से शिफा दिला सकते है .दुसरे मुल्कों में जिन्दगी ऐसे गुजरती है कि किसी चीज़ का पता ही नही चलता ,कब सुबह हुई कब शाम हुई ,ऐसे माहोल में गम को भुलाना ज्यादा आसन होता है .इन्सान इतना बिजी हो जाता है कि उसे अपने गम को भुनाने का टाइम ही नही मिलता .अगर आप गरीब है दुसरे मुल्क नही जा सकते तो कोई बात नही किसी दुसरे शहर में ही चले जाये कुछ साल के लिए ,जब सब कुछ नोर्मल हो जाये तो वापस आ जाये .यकीं मानिये ये बहुत ही पावर फुल इलाज़ है .इससे इन्सान सब्र करना सिख जाता है .
आखिरी अर्ज़ ,
उम्मीद है कि आपको ये पोस्ट पसंद आई होगी ,ये मैंने अपनी मालूमात के हिसाब से लिखी है ,जहाँ तक मुझे इल्म था .मेरे इस ब्लॉग का मकसद सिर्फ यही है कि टूटे दिलो के लिए कुछ मरहम का काम हो जाये ,उनकी तसल्ली का कुछ काम हो जाये ,और लोगो को प्यार इश्क और मोहब्बत के टोपिक पर सही मालूमात हो सके .खुदा हाफिज़
आपका आमिर दुबई

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28 October 2011 at 20:36

इलाज तो बहुत अच्छा बताया है आपने लेकिन जो सच्चे दिल से प्यार करते है उनके दिल से अपने पहले प्यार की यादे कभी नहीं जा सकती चाहे वो कुछ भी कर ले

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31 March 2012 at 20:22

एक निवेदन
कृपया निम्नानुसार कमेंट बॉक्स मे से वर्ड वैरिफिकेशन को हटा लें।
इससे आपके पाठकों को कमेन्ट देते समय असुविधा नहीं होगी।
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अधिक जानकारी के लिए कृपया निम्न वीडियो देखें-
http://www.youtube.com/watch?v=VPb9XTuompc

धन्यवाद!

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31 March 2012 at 20:23

कृपया ऊपर वाले कमेन्ट को इगनोर या डिलीट कर दें। यह कमेन्ट गलती से प्रकाशित हो गया है।

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31 March 2012 at 20:23

आज 01/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर (सुनीता शानू जी की प्रस्तुति में) लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

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31 March 2012 at 23:55

पढ़कर अच्छा लगा बहुत ही अच्छी बात बताई है..
उत्तम लेख ...जिसको प्रेम के प्रति भ्रम है वो जान जायेंगे की वो क्या कर रहे है...और उन्हें क्या करना चाहिए.....
बढ़िया प्रस्तुति......

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6 June 2012 at 04:50

आपका मोहब्बते मश्वरा पढकर अच्छा लगा ,,,,,बढ़िया पोस्ट,,,,,

MY RESENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: स्वागत गीत,,,,,

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21 June 2012 at 11:54

बहुत बढ़िया जानकारी मिली .... काश प्यार करने वाले इसे एक बार ज़रूर पढ़ें

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30 June 2012 at 19:22

नेक सलाह का शुक्रिया............
दीवानों के काम आएगी
:-)

अनु

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9 July 2012 at 06:37

आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार १०/७/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चामंच पर की जायेगी आप सादर आमंत्रित हैं |

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26 August 2012 at 06:36

वाह!......बहुत अच्छा परिभाषा दिया है आपने प्यार के अलग-अलग रूपों का!........मेरा पर्सनल एक्सपीरियंस इस पर एकदम फिट बैठता है!.....

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31 January 2013 at 13:30

आपके इस मशवरे को पढकर लगता हैँ आप मास्टर्र और गुरु के साथ लवगुरु बनने योग्य हैँ ,, हैँ क्या ये ब्लाँग बना चुकी है

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4 May 2014 at 00:40

Aamir Bhai aapke tajurbe Ko hum salam Karte Hai ...:)

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