Maa ki Dua a Hindi story for mothers day

Maa ki Dua
एक बहुत ही मशहूर कहानी है शायद आपने इसे कई बार देखा और पढ़ा होगा.कहते हैं की एक माँ थी और एक उसका बेटा था.माँ ने मेहनत मजदूरी करके अपने बेटे की परवरिश की.दुःख लक्लीफें उठाकर उसे पाला पोसा और बड़ा किया.अब ये नवजवान हो चुका था.एक दिन कहीं से गुजर रहा था तो रास्ते में एक लड़की पर नज़र पड़ी.पहली ही नज़र उसके दिल में घर कर गई ,और उसे उस लड़की से प्यार हो गया.अब वो रोजाना उसी रास्ते से गुजरने लगा.रोजाना आते जाते उसका दीदार करने लगा.इस तरह कई दिन बीत गये.और वो लड़की भी ये महसूस कर चुकी थी की ये नवजवान मेरे लिए ही रोजाना यहाँ से गुजरता है.एक दिन उस नवजवान ने हिम्मत करके उस लड़की से अपने प्यार का इजहार कर दिया.लड़की ने उसकी बात को हलके में लेते हुए कहा की अगर तू मुझसे प्यार करता है तो जो मै मांगूं वो मुझे लाकर दे.उस नवजवान ने कहा की बोल तो क्या चाहती है ? तो लड़की ने जवाब दिया की मुझे तेरी माँ का दिल चाहिए.ये सुनकर एक बार तो वो सन्न रह गया.फिर बोला की ये तो नामुमकिन है.तो वो लड़की बोली की फिर तुझसे प्यार करना भी मेरे लिए ना मुमकिन ही है.इस पर वो लड़का ये कहकर चला गया की मै सोचूंगा.फिर कुछ दिन यूँ ही गुजरते गये.उस नवजवान को उस लड़की की बहुत ज्यादा याद आती.उसकी मोहब्बत उसे बैचेन करती.उसकी याद में उसका जीना दुश्वार होने लगा.पर उसे लड़की की बात याद आती की माँ का दिल चाहिए.आखिर कार उसने इस प्यार के आगे हार मान ली.और अपनी माँ का कत्ल करने का इरादा कर लिया.और कुल्हाड़ी लेकर घर गया और अपनी माँ पर वार किया और उसे मार डाला.फिर चाकू लेकर उसके दिल को काटा ,और हाथ में लेकर दोड़ता हुआ उस लड़की की तरफ गया.इतने में पाऊं को ठोकर लगी और वो गिर पड़ा.उसके हाथ से माँ का दिल भी छुट पड़ा.उसके गिरते ही उस माँ के दिल से आवाज आई की ''ऐ मेरे लाल तुझे कहीं चोट तो नही आई ?'' लेकिन वो उस आवाज की परवाह किये बगैर दोड़ता हुआ उस लड़की के पास पहुंचा.और उसकी तरफ हाथ बढ़ाते हुए बोला की ये लो ये मेरी माँ का दिल है .ये देख कर लड़की एक दम सन्न रह गई.और बोली की ''ऐ नालायक , जिस माँ ने तेरी जिन्दगी भर दुःख तकलीफ उठाकर परवरिश की ,जब तू उसी का ना हुआ तो मेरा क्या हो सकेगा.मुझे अफ़सोस है तुझ पर की तुने एक छोटी सी मोहब्बत के लिए अपनी माँ को ही मार डाला.जा मुझे तुझ जैसे की मोहब्बत नही चाहिए.हो सकता है की कल तू किसी के कहने से मुझे भी मार डाले.उसकी बातें सुनकर वो नवजवान बहुत ज्यादा शर्मिदा हुआ.और अपनी माँ का दिल हाथ में लिए हुए रोता रहा.और कहता रहा की माँ मुझे माफ़ कर दो.मै एक मामूली से प्यार में अँधा हो चुका था.लेकिन माँ बिचारी क्या बोलती.और वो रात भर रोता रहा ,आखिर कार सुबह उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.
इस कहानी में एक नवजवान ने मोहब्बत के लिए अपनी माँ को मारकर उसका दिल निकाल लिया.और आज कल की औलाद अपनी मोहब्बत की खातिर अपने माँ बाप को जीते जी ही मार देती है.कभी घर से भागकर ,तो कभी आत्महत्या करके ,तो कभी नींद की गोलियां खाकर ,तो कभी किसी और तरीके से.इस तरह आज भी अपने माँ बाप की इज्जत की हत्या तो की ही जा रही है.जबकि मोहब्बत तो मोहब्बत का पैगाम देती है.इसमें नफरतें कहाँ से आ गई.मोहब्बत तो दिल जीतने का पैगाम देती है ,पर आज अपने माँ बाप के दिल तोड़कर अपने घरों को आबाद करने की कोशिश की जाती है.जबकि अपने माँ बाप के घर को छोड़कर ,उसको तोड़कर भागे थे ,आज अमन और सुकून की तलाश में मारे मारे फिरते हैं.लेकिन ऐसी औलाद को सुकून कहाँ से मिलेगा.जिन्होंने अपने माँ बाप की जिन्दगी को बेसुकुनी में छोड़ दिया.जब किसी की औलाद घर से भागती है तो सारे घर की इज्जत रोड पर आ जाती है.सारे समाज में उनको बे इज्जती की नज़र से देखा जाता है.जिस वजह से दुसरे बच्चों के रिश्ते करने में बहुत ही ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है.अगर किसी की औलाद आत्महत्या कर ले ,तो उसकी वजह से सारे घर वाले भी जीते जी मर जाते हैं.वो इस तरह से की ,कभी पुलिस की तरफ से होने वाली इन्क्वैरीयां ,कभी लोगों के ताने ,कभी उसकी यादें ,तो कभी कोर्ट कचेहरी के चक्कर ,कुल मिलकर इस वजह से भी बाकी घर वालों के लिए काफी मुश्किल होती है.काश की आज की निव जनरेशन ,नई पीढ़ी इन बातों को समझे ,और अपने माँ बाप की इज्जत की हिफाज़त करे.और जरुरत पड़ने पर अपनी मोहब्बत की क़ुरबानी देकर भी अपने माँ बाप के हक़ को अदा करे.
''मोहब्बत में अक्सर विलेन समझे जाने वाले माँ बाप हकीकत में तो मजलूम होते हैं.बस इनके दर्द को कोई समझ नही पाता.इस बात का अहसास आपको तब होगा जब आप भी किसी के माँ बाप बनोगे.''


कलम : ''आमिर दुबई.,,

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5 May 2012 at 08:37

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
लिंक आपका है यहीं, मगर आपको खोजना पड़ेगा!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

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31 January 2013 at 11:21

माँ के दिल जैसा दुनिया मेँ कोइ दिल नही

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