माहे रमजान मुबारक


दुबई अरब इमारात में आज गुरूवार को चाँद नज़र आने पर कल से माहे रमजान शुरू हो जायेगा.और मेरे वतने अजीज भारत में शुक्रवार शाम को चाँद नज़र आने पर शनिवार से माहे रमजान शुरू हो जायेगा.'' बेटा इस साल रमजान से पहले इंडिया आ जाना,और माहे रमजान हमारे साथ ही गुजारना.घर वाले सुबहो शाम तुम्हे याद करते हैं.''अम्मी के ये अलफ़ाज़ याद आते ही ,मै रो पड़ा.और गम की वजह ये थी की इस साल भी मै रमजान वतन में नही पा सका.और प्रोफेशनल प्रोब्लम्स की वजह से इंडिया जा नही सका.इस साल भी दुबई में घर वालों से दूर रहकर अकेले माहे रमजान गुजार रहा हूँ.
पवित्र माह के आते ही हर तरफ खुशियों की बहार आ गई है.और इबादत का शौक दिल में बढ़ा.और बचपन के वो दिन नज़र के सामने घुमने लगे जब मै छोटा था.तब हमारे पड़ोस में एक परिवार रहता था.जो की मुस्लिम नही था.लेकिन हर साल माहे रमजान का बहुत अह्तिराम करता था.और उनके परिवार के कई सदस्य माहे रमजान में हमारे घर वालों के साथ रोजे भी रखते थे.कभी कभी सहरी के लिए मै उनको जगाने के लिए जाता.तो कभी वो हमे जगाने के लिए आते.कितना प्रेम होता था उस समय.की लोग मिसालें देते थे.लेकिन आज प्रेम साम्प्रदायिकता की भेंट चढ़ गया.और धर्म के नाम पर अंग्रेजों ने मेरे भारत को बाँट कर रख दिया.किसी एक के गलती करने पर आज उसका इल्जाम पूरी कौम के सर पर थोंप दिया जाता है.भारत जैसे सर्व धर्म देश को तोडना इतना आसान नही था.लेकिन भारत के दुश्मनों ने इन्हें धर्म के नाम पर लड़वाकर खोखला कर दिया.आज हमारी बदकिस्मती है की वही देश के दुश्मनों वाला काम करने वाले लोग भारत में भी पैदा हो गये.और धर्म के नाम पर सियासत शुरू कर दी.कभी अपने मफाद के लिए इफ्तार पार्टी का आयोजन ,तो कभी आरक्षण के नाम पर देश को बाँट कर रख दिया.इलेक्शन के दिनों में धर्म के नाम पर सियासत चमकाने वालों ने कभी ये नही सोचा की इससे देश का कितना नुक्सान हो रहा है.इसी तरह धर्मो में भी कई लोग ऐसे पैदा हो गये जिन्होंने इस काम को आगे बढाया.आज भारत में जो साम्प्रदायिकता है वो इसी का नतीजा है.खैर आज भी कई भारतीय ऐसे भी हैं जो सबका सम्मान करते हैं.आज भी कई लोग ऐसे हैं जो दुसरे धर्मो के होने के बावजूद भी माहे रमजान को पवित्र मानते हैं.पहले मै ये सुनता था की माहे रमजान में गैर मुस्लिम लोग भी बाहर खाने पिने से कतराते थे की कहीं हमारा मुस्लिम भाई ना देख ले.क्यूँ की उसके रोजा रखा हुआ होगा.इस कदर प्रेम होता था मेरे भारत में रहने वाले भारतियों में.लेकिन आज ,हालात सबके सामने हैं.माहे रमजान पवित्र महिना है.इस महीने में मुस्लिम रोजे रखते हैं.और अपने रब की इबादत करते हैं.और पूरे महीने में रोजे रखने के बाद ईद का त्योंहार आता है.और माहे रमजान अपनी यादें देकर चला जाता है.इन दिनों मै भारत को बहुत मिस करता हूँ.जब मै घर में होता था तो अपने अम्मी अब्बू के साथ सहरी करके रोजे रखता था ,और उन्ही के साथ इफ्तार करता था.बहुत सारी यादें और माहे रमजान में अपने वालिदैन के साथ गुजरे वक्त को याद करके ग़मगीन हो जाता हूँ.जिन्दगी की मजबूरियों ने माँ बाप से दूर अकेले रमजान गुजारने की आदत डलवा दी.चाँद दिखा भी नही है पोस्ट लिखने तक ,लेकिन माँ बाप को याद करके और अपने वतने अजीज भारत को याद करके दिल पर गम तारी हो गया.काश की मै भारत में अपने माँ बाप के पास जा सकता.और वहां पर माहे रमजान के रोजे रखता.और उनके साथ इफ्तार करता.माँ तरह तरह के खाने बनाती ,जैसे की मै उनका बेटा नही बल्कि कोई मेहमान बनकर आया हूँ.हर एक के लिए मेरा वहां होना स्पेशल हो जाता था.बच्चे हर वक्त मुझे घेरे रहते ,और भाई जान भाई जान करते मुझे दिन भर परेशान करते रहते.और कभी कभी एक शेर कहते .
''वो क्या गया की महफ़िल से रौनक चली गई ,एक शख्स सारे घर को वीरान कर गया....''.माहे रमजान आने से काफी पहले हर साल मश्गुलियत बढ़ जाती है.और वादे करके भी उनके साथ रमजान बिता नही पाता.इस साल सोचा था की माहे रमजान से पहले अपने वतन लौट कर जाऊंगा.लेकिन ,इस लेकिन ने मुझे इसका मौका ही नही दिया.सिर्फ फोन पर घर वालों को तसल्लियाँ देकर संतुष्ट कर देना,ये जैसे की आदत सी बन गई.खैर अभी यहाँ चाँद दिखने में कुछ ही समय बाकी है.और थोड़ी देर में माहे रमजान का चाँद नज़र आएगा.और कल शुक्रवार से रोजे शुरू हो जायेंगे.आप सभी को आमिर की तरफ से खूब खूब माहे रमजान मुबारक.


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                          ''आमिर दुबई.,,,



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19 July 2012 at 06:52

शनिवार 21/07/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. आपके सुझावों का स्वागत है . धन्यवाद!

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19 July 2012 at 07:18

रमज़ान का पाक महीना आपको और आपके वालदैन को बहुत- बहुत
मुबारक हो ...
शुभकामनाएँ!

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19 July 2012 at 08:16

आपको भी मेरे व मेरे सभी दोस्‍तो की तरफ से रमजान मुबारक हो

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20 July 2012 at 02:36

apko bhi mahe ramjaan ki dhero mubarakbad:-)

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20 July 2012 at 06:09

रमजान मुबारक!
बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (21-07-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

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20 July 2012 at 11:38

बहुत बहुत मुबारक.....
दुआओं में याद रखियेगा.

अनु

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20 July 2012 at 21:50

शुक्रिया आप सभी का.और आप सबकी मुबारक बाद मिल गई.आप सभी को भी मेरी तरफ से ये पवित्र माह मुबारक.

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20 July 2012 at 22:15

आप सबको भी रमजान मुबारक ..
बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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21 July 2012 at 06:30

दुनिया में हो शांती, आपस का विश्वास ।
महिना यह रमजान का, बड़ा मुबारक मास ।

बड़ा मुबारक मास, बधाई सबको भाई ।
भाई चारा बढे, ख़त्म होवे अधमाई ।

रविकर धर्मम चरति, धर्म में कहाँ खराबी ?
करे धर्म कल्याण, सुधारे जीवन- भावी ।

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21 July 2012 at 09:21

माहे रमजान मुबारक
अच्छा तो मोहब्बतनामा यहाँ है
मैं सोच ही रहा था दिख नहीं रहा है
पता नहीं आज छुपा कहाँ है !!
मुबारक !

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22 July 2012 at 09:10

आपको मेरी तरफ से माहे रमजान खूब खूब मुबारक !
आपने सही कहा कि अब साम्प्रदायिकता ने अपनी पैठ बना ली है ,,,
लेकिन अभी भी आप जैसे विचारों वाले लोग भारत में हैं और हमें विश्वास है
कि आने वाला भारत ऐसा बनेगा जब इसका कहीं नामोनिशां नहीं होगा ..
आपके विचार बहुत अच्छे लगे ...
शुभकामनाएँ !
सादर !

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22 July 2012 at 22:11

हलचल का आभार.

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22 July 2012 at 22:12

चर्चा मंच का आभार.

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22 July 2012 at 22:14

मरहबा, खुश आमदीद ,स्वागतम.आपका मोहब्बत नामा पर स्वागत है.

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16 June 2014 at 10:06

Masha Allah सभी भाईयों और बहनो को हम सब दोस्तों और फेमली की तरफ से रमजानूल मुबारक......

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