एक हादसा जिसने हिलाकर रख दिया था.

कभी कभी जिन्दगी में कुछ ऐसा हो जाता है जो की उम्र भर याद रहता है.इन्ही सब बातों को शेयर करने के लिए मैंने मोहब्बत नामा ब्लॉग पर ''मेरी डायरी कॉलम शुरू किया है.आज भी मै आपको एक सच्ची घटना बताता हूँ.जो की मेरे साथ हुई थी.सन 2010 में मैने  दुबई अरब इमारात से अपने वतन इंडिया छुट्टी आने का इरादा किया था.ये उन दिनों की ही बात है.मेरे अलावा मेरे चाचा जी भी यहीं दुबई में थे.लेकिन वो दूसरी जगह जॉब करते थे और मै दूसरी जगह.लेकिन अक्सर फोन पर बात होती रहती थी.2010 में हम दोनों ने एक साथ इंडिया जाने का प्रोग्राम बनाया था.चाचा जी ने किसी प्लेन का नाम लेते हुए कहा की मै इसमें टिकट करवा रहा हूँ.हम दोनों इसी में इंडिया चलेंगे.लेकिन न जाने क्यूँ मेरे ज़हन इसके लिए तैयार ही नही हो रहा था.मैंने किसी दुसरे एयरोप्लेन में उनसे चलने को कहा.मैंने उनसे कहा की आप इसमें टिकट करवाएं.लेकिन वो भी जिद्द पर अड़े हुए थे.की जिस प्लेन का मै बोल रहा हूँ उसमे जाने में क्या प्रोब्लम है.लेकिन उसमे मेरा दिल गवारा नही कर रहा था.इसलिए मै ज़हनी तौर पर तैयार नही था.आखिर कई दिन बहस करने के बाद चाचा जी को मेरी बात माननी पड़ी.और हमने उसी एयरो प्लेन का टिकट करवाया जिसका मैंने बोला था.और हमारा फ्लाईट चाचा जी के बताये हुए प्लेन से 3 दिन बाद था.एक दिन ऑफिस में मै काम कर रहा था ,इतने में अचानक खबर मिली की इंडिया में एक प्लेन टकरा गया है.और उस हादसे में जितने भी लोग प्लेन में सवार थे सभी मारे गये.ये खबर सुनकर मेरे पूरे बदन में झुरझुरी पैदा हो गई.क्यूँ की ये वही एयरोप्लेन था जिसमे चाचा जी टिकट करवाना चाह रहे थे.और मेरा ज़हन नही माना था ,जिसकी वजह से मेरे बताये हुए प्लेन में हम टिकट करवा चुके थे.उस वक्त मै इस कदर डर गया था ,की मैने चाचा जी से टिकट केंसल करवाने को भी बोल दिया था.मेरा सफ़र करने का बिलकुल भी मन नही हो रहा था.और कई दिन तक मै इस घटना को सोच सोच कर परेशान रहा.की अगर हम उस प्लेन का टिकट केंसल ना करवाते ,तो चाचा जी उसी का टिकट करवाने के लिए जिद्द कर रहे थे.खैर जिन्दगी और मौत तो रब के हाथ में है.लेकिन इस घटना से मै काफी ज्यादा अपसेट हो गया था.और उसके कई दिनों के बाद हम जिसका मै चाहता था उसी प्लेन में इंडिया गये थे.आज भी जब इस तरह की घटना की खबर पढता या सुनता हूँ तो वही हादसा याद आ जाता है.और मै काफी परेशान हो जाता हूँ.मैंने उस प्लेन का नाम वगैरा नही लिखा जिसका हादसा हुआ था.और ना ही उसका नाम लिखा जिसमे हमने सफ़र किया था.ताकि किसी तरह का कोई फितना पैदा ना हो.और ये प्लेन भी बदनाम ना हो.क्यूँ की इस तरह नाम लेकर आर्टिकल लिखने से भी कई बार लोग डर जाते हैं और उस प्लेन में सफ़र करने से कतराते हैं.हालाँकि हादसे रोजाना तो नही होते.जिससे उन प्लेन का भी काफी नुक्सान होता है.जो समझदार हैं वो वैसे भी समझ ही जायेंगे की हमारे यहाँ किन किन प्लेनों का हादसा हुआ है.आज भी जब भी मै किसी प्लेन के हादसे की खबर सुनता हूँ  तो मुझे यही हादसा दुबारा याद आ जाता है.और मै काफी देर तक सोचता रहता हूँ.इस घटना के बाद आज भी जब मुझे एयरो प्लेन में सफ़र करना होता है तो मै असहज ही रहता हूँ.

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                                                        ''आमिर दुबई''

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26 September 2012 at 23:50

जीवन में ऐसे हादसे अक्सर हो जाते है,मेरा मानना है कि यदि मन किसी कार्य को करने के लिये न माने तो उस कार्य को नही करना चाहिए,,,,,

RECENT POST : गीत,

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27 September 2012 at 04:39

उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

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27 September 2012 at 20:23

सब ऊपर वाले के हाथ में है !

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14 November 2012 at 09:16

इस घटना पर तो यहो कहा जा सकता है...जाको राखे साईंयां, मार सकै न कोय.

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