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पुलिस की छवि

पुलिस की छवि

एक बार कुछ दोस्त बस में सफ़र कर रहे थे। अचानक एक जगह पर बस रुकवा दी गयी। इतने में एक दोस्त ने दूसरे दोस्तों को बताया की पुलिस ने बस रोक दी है। और कारवाही चल रही है। शायद टाइम लगेगा। इतने में एक को गुस्सा आया। और वो बोला की इन कुत्तों को जब तक हड्डी नही डाली जाती ये बस को नही जाने देंगे। इतने में उसकी सिट के पीछे बैठा आदमी बोल पड़ा की आप सभी पुलिस वालों के बारे में ऐसा कैसे कह सकते हैं। पुलिस को भी तो आखिर अपना काम करना होता है। इतने में उस दोस्त ने जवाब दिया की हाँ हाँ जानता हूँ मै इनके महान काम। बस अभी अपनी जेब गरम करेंगे और जाने देंगे। ये सब हराम खोर हैं, जब तक इन्हें हराम का टुकड़ा नही मिलता ये पूछताछ करते रहेंगे। तो इस पर वो आदमी काफी नाराज हुआ ,और दोस्त को समझाने लगा की पुलिस की छवि कुछ खराब और भ्रष्ट लोगों ने की है। हालाँकि इस डिपार्टमेंट में भी कई ईमानदार लोग मौजूद हैं। इसलिए इस तरह आम नागरिकों का सभी पुलिस वालों को गलत ठहराना तो बिलकुल गलत है। तो दोस्त बोला की मुझे तो आज तक कोई ईमानदार पुलिस वाला मिला नही अगर आपको मिले तो मुझे जरुर बताना। ये दोनों बातें ही कर रहे थे इतने में कुछ पुलिस वाले बस में आये और ड्राइवर से बस के कागजात वगैरा के बारे में पूछने लगे। बस वाले के पास कोई भी कागजात नही थे। और सब कुछ फर्जी था। तो वो पुलिस वाले ड्राइवर को बस से बाहर लेकर गये। और कड़ी पूछताछ करने लगे। बस में बैठे सभी नागरिक देख रहे थे। इतने में दोस्त अपने पीछे बैठे उस आदमी से बोला की भाई साहब देखिये इस बस वाले के पास कुछ भी कागजात नही हैं ,फिर भी 10 मिनट में ये बस पुलिस वाले छोड़ देंगे। बस ये हड्डी मिलने तक पूछ ताछ करेंगे। वो आदमी दोस्त की बात सुनकर बस बाहर देखता रहा। और थोड़ी देर में वही हुआ जो दोस्त ने कहा था। उन पुलिस वालों ने काफी देर तक पूछताछ की ,फिर ड्राइवर ने अपनी जेब से कुछ रूपए निकाले और पुलिस वालों को दिए ,और फिर पुलिस वालों ने बस को छोड़ दिया। फिर ड्राइवर ने उनसे पूछा की आगे तो कोई प्रोब्लम नही होगी ना ? तो पुलिस ने अपना नाम बताते हुए कहा की अगर आगे कोई रोके तो मेरा नाम लेकर कहना की साहब से बात हो गयी है। फिर उसने बस रवाना कर दी। ये देख कर दोस्त हंसने लगा ,और पीछे बैठे आदमी से कहने लगा की देख लो ,मैंने क्या कहा था ,की सभी पुलिस वाले ऐसे ही होते हैं। इतने में वो आदमी बड़ी नरमी से बोला की ये आपकी गलत फहमी है की सभी पुलिस वाले ऐसे भ्रष्ट होते हैं ,मै भी एक पुलिस अधिकारी हूँ। लेकिन इन लोगों की हरकत ने मेरी बोलती बंद कर दी है ,वर्ना मै भी आपको बता देता की पुलिस वाले ऐसे भी होते हैं। ये सुनकर दोस्त के पसीने छुटने शुरू हो गये। और फिर वो कहने लगा की अरे नही भाई साहब ,मेरे कहने का मतलब तो यूँ था, की इन कुछ लोगों ने देश का नाम खराब कर रखा है। मुझे भी पता है की आपके जैसे सेकड़ों ईमानदार पुलिस अधिकारी भी इस डिपार्टमेंट में हैं। तभी तो देश की कानून व्यवस्था चल रही है। वो आदमी उसके उस बदले हुए सुर को देख कर मुस्कुराने लगा। और कहने लगा की जब तक आम नागरिक पुलिस का साथ नही देंगे ,तब तक देश से भ्रष्ट लोग ख़त्म नही हो सकते। और अगर आम नागरिक सारे पुलिस डिपार्टमेंट के लिए आपके जैसी सोच रखेंगे तो लोगों का पुलिस से विशवास उठ जायेगा। जिस तरह 5 उँगलियाँ बराबर नही होती उसी तरह सभी पुलिस वाले एक जैसे नही होते। कुछ खराब लोगों की वजह से अच्छे लोग भी बदनाम हो जाते हैं। अभी हाल ही में कुछ वतन से मोहब्बत करने वाले नागरिकों ने 2 लड़कों को तस्वीर खिंची जो की एक लड़की को छेड़ रहे थे। और वो तस्वीर उन्होंने स्थानीय पुलिस तक पहुंचा दी। उसी समय प्रशाशन हरकत में आया और 24 घंटे में उन लड़कों को गिरफ्तार कर लिया गया। इस तरह नागरिक सुरक्षा कार्यों में पुलिस की मदद करते रहेंगे तभी देश भ्रस्टाचार खत्म हो सकेगा। उस आदमी की बातें सुनकर दोस्त के दिल में पुलिस की छवि काफी हद तक साफ़ हुई। और जो गलत फहमियां थीं वो भी दूर हुई।

                                                     ''आमिर अली दुबई'' 
खतों का ज़माना

खतों का ज़माना


खतों का ज़माना बीत गया। खतों में कितना प्यार था। कुछ ख़त आँखों में आंसू ले आते थे। कुछ ख़त यादगार की तरह कापियों में छुपाये जाते थे। किसी की लिखी हेंड राइटिंग कितनी अजीज होती थी। तो कभी परदेसियों के ख़त ,जिसे सुनने को सारा महल्ला जमा होता था। बड़ी दिलचस्पी से सुनते और खुश होते थे। तो कभी एक नयी नवेली दुल्हन खतों में अपने जज़्बात लिख लिख कर जमा करती रहती थी। और मौका पाकर अपने साजन को पहुंचा देती थी। और साजन एक एक ख़त को कई कई बार पढ़कर अपने दिल को बहलाते थे। खतों में कितना प्यार था। जब किसी परदेसी को घर की याद सताती ,तो वो उन पुराने खतों को पढ़कर अपने दिल को बहला लेते , और कुछ देर के लिए ही सही ,खुश हो जाते। तो कभी घर वालों को अपने परदेसी की याद आती ,तो उसके भेजे हुए खतों को पढ़ कर उसे याद कर लेते थे। और उसका लिखित प्यार को पा लेते थे। 

प्रेमी जब प्रेमिका को ख़त लिखने बैठते , तो एक एक कर कई ख़त लिखते और फिर फाड़ डालते ,सही नही लिखा ,फिर कोशिश करके एक अच्छा सा ख़त लिखते ,और उसे भेजते। उन खतों को भेजने के लिए भी किसी सहारे की जरुरत होती। कभी खुद उन खतों को पहुँचाने की हिम्मत ही नही पाते थे। कितनी दिलचस्पी और गहराई से लिखे जाते थे ये ख़त। और उतनी ही दिलचस्पी से ,समय निकाल कर एकांत में जाकर पढ़ा जाता था उन खतों को। तो कभी खतों को दिल से लगाकर ,सुकून पा लेते थे। जो बातें जुबाँ से नही निकलती थी ,ख़त उन्हें बयाँ कर देते थे। कितना प्यार था उन खतों में, जिन्हें सहेजकर रखा जाता था। ''आज तेरा ख़त आया है '' ये अल्फाज़ ढेर सारी खुशियाँ लेकर आते थे। तो कई बार वो डाकिये की साइकल की घंटी सुनकर ही बेक़रार हो जाते थे। ''मियां परदेश जाकर तो हमे भूल ही गये ,कम से कम एक ख़त भी नही लिख सकते'' महल्ले के बुजुर्गों के ये प्यार भरे ताने सुनकर चेहरे पर मुस्कान आ जाया करती थी। कितना प्यार होता था उन खतों में। 

रात को जब नींद नही आती ,तो रात ख़त लिखते उसे सजाते संवारते ही गुजर जाती। परदेसियों का पसंदीदा काम ही ख़त लिखना हुआ करता था। एक ख़त को लिखने में कई कई घंटे लगाते थे ,फिर भी बोर नही होते थे। और दिलचस्पी बनी रहती थी। तो स्कुल कॉलेज के ज़माने में भी खतों का काफी प्रचलन था। किसी के सामने बात करने , या देखने की हिम्मत न होती थी। क्या ज़माना था खतों का ,जब मोहब्बत का आगाज़ भी खतों से होता था। खतों में लेखन की जो मिठास थी , आज वो कहाँ चली गयी। मुझे याद है ,जब मै दुबई आया था। तो घर से किसी के हाथों एक ख़त मिला। उसमे छोटी सी बहन ने लिखा था की इस साल आप घर पर नही हैं इसलिए मै जन्म दिन नही मनाऊंगी। इतने से अलफ़ाज़ थे उस ख़त के ,और इतने सारे आंसुओं के साथ इन्हें कई कई बार पढ़ा। और दिल की बेकरारी इतनी बढ़ गयी की खुद को संभालना भारी हो गया। इसी तरह किसी का ख़त मिला था उसमे कुछ अलफ़ाज़ थे ''ये मेरा आखिरी ख़त है '' इतने से अलफ़ाज़ आज तक बेक़रार कर देते हैं। ये अल्फाज़ उस समय दिल पर ऐसे लगे जैसे की रूह जिस्म से निकल गयी हो।

 इसी तरह एक ख़त मिला था की जिसे सभी दोस्तों ने मिलकर लिखा था। उनकी रायटिंग और लिखा देख कर ऐसा लगा था जैसे सभी मेरे पास मौजूद हैं। कितना प्यार था उन खतों में। जिन्हें दिल से लिखा जाता था ,और दिल से पढ़ा जाता था। जिन्हें कई कई बार पढ़कर भी दिल ना भरता था। लेकिन आज। खतों की जगह टेलीफोन और इंटरनेट ने ले ली है। वो खतों का प्यार ,एक गुज़रा ज़माना बनकर रह गया। आज तो जो जिसके दिल में आता है बिना झिझक ही फोन पर बोल देते हैं। तो चैटिंग में भी कौन पीछे है। आज कल तो रही सही कमी भी विडियो चैट मेसेंजर ने पूरी कर दी है। आज ख़त का सिर्फ नाम ही बाकि है। मै ये मानता हूँ की दुनियां ने तरक्की कर ली है। नयी और बेहतर तकनीक का भी इनकार नही है। लेकिन मेरे दोस्त , इनमे खतों का वो प्यार भी नही है। 

'' पहले जब तू ख़त लिखता था , कागज़ में चेहरा दिखता था ,
बंद हुआ ये मेल भी अब तो ,खत्म हुआ ये खेल भी अब तो।
                                                            ''आमिर अली दुबई,,,
विदेश में रहने वाले सिने प्रेमी

विदेश में रहने वाले सिने प्रेमी

डियर रीडर्स , विदेश में रहने वाले भारतीय भी बॉलीवुड से कितना प्रेम करते हैं,और कितनी जानकारियां रखते हैं ,इसका अंदाज़ा आप इस पोस्ट से लगा लीजिये।इस पोस्ट के साथ ही मोहब्बत नामा के एक नए कॉलोम का आगाज़ कर रहा हूँ। जिसका नाम मैंने रखा है ''एक परदेशी की चिट्ठी '' इस कॉलोम में मै आपसे परदेश और परदेश में रहने वालों की जिन्दगी ,और यहाँ की यादें ,और परदेश से जुडी बातें  ,वगैरा आप सभी से शेयर करूँगा। ये इस कॉलोम की पहली पोस्ट है। आप बताएं की आपको इस नए कॉलोम की ये पहली पोस्ट यानी अपने एक परदेशी की ये पहली चिट्ठी आपको कैसी लगी ? अपनी कीमती राय कमेंट्स बॉक्स में जरुर दें। 

सैफ -करीना की शादी इंडिया में हुई थी, और यहाँ दुबई कई जगह में सैफ - करीना की शादी पर मिठाइयाँ इनके प्रशंषकों ने बांटी थीं। और यहाँ हर फिल्म शुक्रवार से एक दिन पहले ही रिलीज हो जाती है। ज्यादातर फिल्मो के प्रीमियर दुबई में ही होते हैं। पूरा साल बॉलीवुड कलाकार यहाँ आते ही रहते हैं। कई फिल्मो की शूटिंग भी यहाँ पर होती रहती है। यहाँ पर बसने वाले भारतियों को बॉलीवुड का इतना ज्ञान होता है ,जितना की अपने रिश्तेदारों का होता है। हर नयी फिल्म यहाँ पर बिजनस के नए रिकोर्ड बनाती है। और कई बार मैंने खुद भी देखा है की बॉलीवुड एक्टरों की निजी लाइफ के बारे में यहाँ घंटों बहस चलती रहती है। लोग फ़िल्मी ख़बरें बड़ी दिलचस्पी से पढ़ते हैं। अपने पसंदीदा कलाकारों के बारे में इतना ज्ञान रखते हैं ,की लोग हैरत में पड़ जाएँ। सभी इंडियन चैनल यहाँ भी काफी ज्यादा देखे जाते हैं। अब तो इंटरनेट का दौर है ,पल पल की खबर नेट पर ही मिल जाती है। फ़िल्मी ख़बरों की मेग्जीने आज भी यहाँ काफी ज्यादा बिकती हैं।

परदेश में रहने वाले कई कई लोग फिल्मे देख कर ही टाइम पास करते हैं। कौन सी फिल्म कब रिलीज होगी ,किस फिल्म ने कितना बिजनस किया ,यहाँ के भारतियों से आप पता कर सकते हैं। इस कदर शौक ,की मै कभी कभी सोचता हूँ की इंडिया से ज्यादा साइन प्रेमी यहाँ विदेशों में बस रहे हैं। कौन सा हीरो किस पायदान में है ,यहाँ के भारतियों से पूछ लो ,सब कुछ आपको बता देंगे। मै खुद भी कई बार यहाँ के सिनेमा हॉल में फिल्म देखने गया हूँ। यहाँ भारतियों के अलावा दुसरे देशों के लोग भी काफी दिलचस्पी से बॉलीवुड की फिल्मे देखते हैं। कई बार हाउस फुल की वजह से हमे भी टिकट नही मिल पाता। भारतियों के अलावा सबसे ज्यादा पाकिस्तानी ,और बंगलादेशी यहाँ बॉलीवुड के फेन हैं। इसी तरफ किसी फिल्म का प्रीमियर हो तो उसका टिकट मिलना भी काफी दुश्वार होता है। यहाँ बॉलीवुड के ऐसे चाहने वाले हैं ,की हर फिल्म के प्रीमियर पर पहुँच जाते हैं ,जैसे इनके किसी कजन की फिल्म है। इनके अलावा अरब लोग भी बॉलीवुड फिल्मो को काफी पसंद करते हैं। यहाँ सिनेमा हॉल में फिल्म हिंदी भाषा में चलती है ,लेकिन उसके साथ ही अरबिक ,और इंग्लिश में ट्रांसलेशन की पट्टी चलती रहती है। जिसे पढ़ पढ़ कर ये लोग अपनी भाषा में उस फिल्म को समझ पाते हैं।

शाहरुख़ खान यहाँ सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। यहाँ तक की शाहरुख़ खान के फिल्म के प्रीमियर की तो टिकट मिलना ,नामुमकिन सा होता है। इसके अलावा सलमान खान की लोकप्रियता भी यहाँ कम नही है। यहाँ आज भी रेडियो बड़े दिलचस्पी से सुने जाते हैं। हर कार में गाड़ियों में रेडियो FM चलते हैं। जिनमे ज्यादातर हिंदी रेडियो सुने जाते हैं।और दुसरे लोग भी अपनी अपनी भाषाओँ के रेडियो भी सुनते हैं। रेडियो यहाँ का ख़ास मिडिया है ,इसलिए फिल्म स्टार्स रेडियो चैनल्स पर भी आते हैं। लोग उनकी आवाज सुनकर ही बहुत खुश हो जाते हैं। इसमें रेडियो स्टेशन में कॉल करके अपने पसंदीदा कलाकार से सवाल भी कर सकते हैं।जिसका वो रेडियो पर ही जवाब देते हैं। इस तरह फिल्म स्टार्स से फोन पर बात करना ,उनसे प्रीमियर के मौकों पर मिलना ,ऑटोग्राफ लेना ,साथ तस्वीरें खिचवाना ये सब यहाँ के लोगों के लिए काफी आसान रहता है। अभी पिछले हफ्ते की ही बात है, लोग किसी शोपिंग मॉल में शोपिंग कर रहे थे ,अचानक दबंग फिल्म की पूरी टीम उसी शोपिंग मॉल में आ पहुंची। बस फिर क्या था ,भारतियों ने घेर लिया सलमान खान को। खूब तस्वीरें खिचवाई। हाथ मिलाये। अरबी लोग भी कहाँ पीछे रहने वाले थे ,उन्होंने भी जमकर इस मौके का फायदा उठाया। किसी को यकीन ही नही हो रहा था की इस मॉल में सलमान खान अपने परिवार के साथ शोपिंग कर रहा है।

यहाँ के लोग बॉलीवुड कलाकारों को बहुत प्यार और स्नेह देते हैं। बल्कि यूँ समझिये की हर हफ्ते कोई ना कोई फिल्म स्टार यहाँ दुबई में आता रहता है। अभी चंद दिनों पहले यहाँ के लोकप्रिय स्टार शाहरुख़ खान का दुबई में आना हुआ था ,बस लोग तो पागल हो गये। इसीलिए फिल्म जब तक है जान ने यहाँ काफी ज्यादा बिजनस किया। यहाँ पर बॉलीवुड कलाकारों की लोकप्रियता का हर एक को अंदाज़ा है ,इसलिए यहाँ हर किसी ख़ास प्रोग्राम पर इनको इंडिया से बुलाया जाता है।बल्कि कई फिल्म स्टार्स के तो यहाँ घर भी हैं। इतने अरसे में मैंने जो देखा था की सबसे ज्यादा हिट फिल्म यहाँ हुई थी ''माय नेम इस खान '' इस फिल्म में शाहरुख़ खान की एक्टिंग को अरबो अज़म के लोगों ने खूब सराहा था। इसी तरह यहाँ हर समय विदेशी सेलानियों का आना जाना लगा ही रहता है।हर हर जगह अंग्रेजों से भरी पड़ी है। अंग्रेज भी काफी ज्यादा बॉलीवुड के दीवाने हैं। ख़ास कर शाहरुख़ खान इनमे भी काफी ज्यादा लोकप्रिय है।

कई बार दुबई भ्रमण का मौका मिला। यहाँ के माहौल को बहुत करीब से देखा। और काफी तज़र्बात हासिल किये। कई बार गैर मुल्कियों ने मेरे सामने भी बॉलीवुड कलाकारों के बारे में बात की। एक बार एक अरबी ने पूछा था की इंडिया में आपका घर शाहरुख़ खान के घर से कितना दूर है ? इस बात पर मुझे कई दिन तक हंसी आती रहती थी। इसी तरह का एक और वाकिया हुआ था ,एक अरबी से हम बातें कर रहे थे ,उससे मैंने पूछा की आपको इंडिया के बारे में कुछ पता है? तो उसने जवाब दिया की बस इतना ही पता है की शाहरुख़ खान ,इंडिया में रहता है। उसकी इस बात पर हम सारे दोस्त हँसते ही रह गये। सच में बॉलीवुड का भारत में कितना ज्यादा योगदान है ,ये बात विदेश में रहते हुए समझ में आ गयी। कई बार फिल्म के प्रीमियर में जाने का भी मौका मिला। वहां जाकर करीब से उन बॉलीवुड स्टार्स को देखा जिनकी आज दुनिया दीवानी है। हैं तो वो भी अपनी तरह के इंसान ही ,लेकिन उनकी लोकप्रियता और भारतीय फिल्म जगत में उनके योगदान ने उन्हें हमसे काफी आगे पहुंचा दिया है।

यहाँ पर रहने वाले भारतीय या तो बिजनस में हैं ,और या फिर जॉब करते हैं।दिन भर काम करने के बाद टीवी और इंटरनेट ही इनका सहारा होता है। इसलिए फिल्मे यहाँ काफी शौक से देखी जाती हैं। और ज्यादा फिल्मो के चलने की वजह से बॉलीवुड यहाँ काफी लोकप्रिय है। हर शुक्रवार को यहाँ पर साप्ताहिक छुट्टी रहती है ,इसलिए यहाँ गुरूवार को ही नयी फिल्मे रिलीज हो जाती हैं,हर हफ्ते फिल्मो की एडवांस बुकिंगें चलती रहती हैं। यहाँ पर रहने वाले भारतियों के परिवार भी शुक्रवार को फिल्म देखना ही ज्यादा पसंद करते हैं। इसी तरह बॉलीवुड फिल्मो की सीडी डीवीडी की भी यहाँ काफी ज्यादा बिक्री होती है।अरब देश होने के बावजूद यहाँ पर ज्यादातर हिंदी ,उर्दू ही बोली जाती है। जिसे दुसरे देशों के भी लोग कुछ हद तक समझ ही लेते हैं। ये है विदेश में रहने वाले सिने प्रेमियों की जिन्दगी। कैसा लगा आपको इनके सिने प्रेम के बारे में जानकार ? जरुर बताना। आइन्दा मौका मिला तो और भी इस तरह की पोस्ट्स लिखूंगा जिन्हें पढ़कर आपको विदेश में रहने वाले भारतियों की जिन्दगी को करीब से जानने का मौका मिलेगा। बस यार ,अब आमिर को इजाजत दो ना। की सारा आज ही जानना है।
शब् बखैर ,
                                                आपका ''आमिर अली दुबई ''