Showing posts with label मेरी डायरी. Show all posts
Showing posts with label मेरी डायरी. Show all posts
मोहब्बत और शादी

मोहब्बत और शादी

जिससे मोहब्बत की है अगर उसी के साथ जिन्दगी के लम्हात गुजारना नसीब हो जाये तो क्या ही अच्छी बात है। कहते हैं की वर्ना मोहब्बत का गम जिन्दगी भर सताता रहता है। जिन्दगी के तजर्बात तो इस बात को गलत ही साबित करते नज़र आते हैं। शादी एक ऐसी जड़ी बूटी है जो मोहब्बत के सारे जख्म भर देती है। और काफी हद तक जिन्दगी की तन्हाइयों को रोशन कर देती है। मोहब्बत का गम चाहे कितना भी शदीद हो ,एक मात्र शादी की इसका सबसे बेहतरीन और सफल इलाज लगती है।  शादी एक ऐसा पवित्र रिश्ता है जो की दो अंजानो को एक दूसरे के लिए हर मर्ज़ की दवा बना देता है। एक दूसरे का साथ जो की पहले से ही तय होता है ,उस तक पहुँचने के लिए कई कठिन रास्तों को तय करना पड़ता है ,जिनमे से सबसे कठिन रास्ता मोहब्बत है ,जो शादी से पहले किसी और से हो जाती है ,अगर कामियाब होती है तो जिन्दगी खुशनुमा हो जाती है और नाकाम होने पर नाकामी की एक दास्तान बनकर रह जाती है। इसका गम तो लम्बे समय तक रहता है ,लेकिन फिर भी शादी काफी हद तक इसका इलाज साबित होती है। मुझसे किसी ने एक बार कहा था की असल मोहब्बत तो शादी के बाद होती है ,उस समय मुझे इस बात पर कोई खास यकीन नही था ,धीरे धीरे यकीन होने लगा। अचानक ही किसी की एक आहट ने उजाला कर दिया ,कुछ लोग तो जिन्दगी में सूरज बनकर आते हैं ,और सब कुछ रोशन कर देते हैं। जब बिछड़ते हैं तो अँधेरा कर देते हैं। मै इन अहसासों को सलाम करता हूँ। और दुआ करता हूँ की ये साथ हमेशां बना रहे। तुम इसी तरह फूल बनकर मेरे गुलशन को महकाती रहो। 
शादी एक रिश्ता जो की सब कुछ भुला कर एक नयी जिन्दगी दे देता है ,सूने से सूने गुलशन को भी हरा भरा कर देता है। एक एक लम्हा एक यादगार अहसास बनकर रह जाता है। इन अहसासों को सिमटने के लिए जिन्दगी भी कम नज़र आती है। 

                                                  ''आमिर अली दुबई ,,
क्या ब्लोगिंग को सीरियसली लेना चाहिए ?

क्या ब्लोगिंग को सीरियसली लेना चाहिए ?


दोस्तों कई दिनों से मै इस कशमकश में उलझा रहा की क्या ब्लोगिंग को सीरियसली लेना चाहिए? कई लोग ब्लॉग लिखते हैं ज्ञान फ़ैलाने के लिए। तो कुछ लोग ब्लॉग लिखते हैं हिंदी को बढ़ावा देने के लिए। और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो शोहरत हासिल करने के लिए भी ब्लॉग लिखते हैं। और कुछ अपना फन्ने शायरी ,नज्म ,ग़ज़ल ,को लोगों तक पहुँचाने के लिए भी ब्लॉग लिखते हैं। तो कुछ आम लोग ख़ास बनने की चाह में ब्लॉग लिखते हैं। और अपना टाइम पास करने के लिए ब्लॉग लिखते हैं। और कुछ मेरे जैसे भी हैं जो सिर्फ अपना शौक पूरा करने के लिए ब्लॉग लिखते हैं।

 ब्लोगिंग करने से पहले भी मै लिखता था ,कभी अपने लिए तो कभी किसी के लिए। और मेरे दोस्त मेरे लेखन को काफी दिलचस्पी से पढ़ते थे। उनमे से कई लोगों ने मुझसे एक बात कही थी जो आज भी मुझे याद है। मुझसे कहा था की आमिर आपकी लेखनी ऐसी है जो की आपको बहुत जल्द मशहूर करने की ताकत रखती है। ऐसे कई कमेंट्स और ईमेल भी मिले जिन्होंने भी यही बात फिर से दोहराई मेरे ब्लॉग दुनिया में आने के बाद। किसी ने कहा था की आपकी लेखन शैली किसी बड़े ब्लोगर की तरह है। तो किसी ने कहा था की आपकी लेखन शैली जल्द ही अपनी तरफ आकर्षित करने वाली होती है।

 खैर। मै शुरू से ही एक आम आदमी बनकर रहना चाहता था,जैसा की आज भी हूँ। मशहूर होने की तमन्ना और ख्वाहिश को मैंने कभी भी अपने दिल में जगह ना दी। मुझे लोकप्रियता से काफी ज्यादा एलर्जी रही। इसलिए मै कभी भी तस्वीर के साथ इंटरनेट की दुनिया में नही आया। और ना ही मैंने किसी शोशल नेटवर्क पर अपनी कोई तस्वीर शेयर की। क्यूँ की ब्लोगिंग सिर्फ मेरा शौक है ,जो किसी दिन ख़त्म भी हो सकता है। शायद उस दिन से मै ब्लोगिंग ही छोड़ दूँ। फिर मेरे बतौरे ब्लोगर लोकप्रिय होना मेरे क्या काम आएगा। दूसरा ये की आमिर नाम से तो लाखों लोग हैं जो की ब्लोगिंग कर ही रहे होंगे। उन्ही गुमनामो में से मै भी किसी एक की तरह होकर रह जाऊं तो ये भी अच्छा है। शोहरत या लोकप्रियता मुझे काफी बुरी चीज़ मालुम होती है। किसी के लिए ये बहुत अच्छी भी होती है। कोई इसके लिए पता नही क्या क्या कर गुजरता होगा। लेकिन मेरे नज़दीक इसकी कोई अहमियत नही है। और मुझे इससे काफी ज्यादा नफरत भी रही है। 

अब क्यूँ की लेखन शैली ,जिसके बारे में लोगों ने पहले ही काफी कुछ मुझे कहा है, इसको तो मै बदल नही सकता था। इसलिए मैंने इसी लेखन शैली के साथ सिर्फ अपने नाम के साथ ही ब्लोगिंग शुरू की। ताकि पहचान बने भी तो सिर्फ आमिर के नाम की। जब मुझे किसी ने देखा ही नही होगा तो उसे कल के दिन मेरे ब्लॉग दुनिया से चले जाने का ज्यादा दुःख या गम भी नही होगा। इसके अलावा और भी कई वजह रही हैं जिनकी वजह से भी मेरा सामने आकर लिखना काफी मुश्किल है। किसी की रुसवाई का भी डर रहता है। क्यूँ की दुनिया में कई ऐसे भी तो लोग हैं ही जो मुझे शक्लो सूरत से जानते हैं। अगर वो मुझे देख कर मेरी लेखनी को पढेंगे तो शायद जिस शोहरत से मै भागता फिरता हूँ वही मुझे आकर पकड़ लेगी। ब्लोगिंग कोई सीरियसली काम नही है। मेरी नज़र में ये सिर्फ एक शौक ही है। जो समय के साथ एक दिन ख़त्म हो जायेगा। ना ही ये कोई नशा है। जिसे ना करें तो रह ना सकें। ना ही मै इसे कोई आदत समझता हूँ ,जिसे छोड़ा ना जा सके। मेरे लिए इसे छोड़ना आज भी उतना ही आसान है जितना की पहले था। ये और बात है की मेरा शौक अभी बाकी है। इसलिए इस बात का वादा तो मै नही कर सकता की हमेशां लिखता रहूँगा। क्या पता आने वाले कल की शाम कहाँ होगी। शायद कभी इस शौक से मेरा दिल भर जाये। उस दिन मै दुनिया में रहते हुए भी ब्लॉग जगत में ना रहूँ।

 इसलिए मै उन सभी से माफ़ी चाहता हूँ जिन्होंने प्रोफाइल के साथ तस्वीर शेयर करने की फरमाइश की। आप मुझे सिर्फ मेरे नाम से ही जाने ताकि कल आपको मेरे नाम को भुलाना आसान रहे। इसलिए प्लीज कोई भी इस तरह की फरमाइश ना करे जिससे मै असहज हो जाऊं। तस्वीर शेयर करने पर मै काफी असहज हूँ। क्यूँ की मेरी लेखनी आपके सामने है। और मै शोहरत या लोकप्रियता से दूर रहने वाला एक आम आदमी हूँ। जो आम बनकर ही रहना चाहता हूँ। और आम रहकर ही जुदा होना चाहता हूँ। जो तस्वीर शेयर करते हैं गलत वो भी नही हैं। वो अपनी जगह सही हैं और मै अपनी जगह। ये काम इतना जरुरी भी नही है ,की मेरे तस्वीर शेयर करने या ना करने से किसी को कोई फर्क पड़े। मेरे कलम को लोग बगैर मुझे देखे भी काफी दिलचस्पी से पढ़ते ही हैं।और बगैर देखे भी मुझसे मोहब्बत भी करते ही हैं। मेरी जगह अगर झरना बहता देख रहे हैं,और इससे ही वो मेरी शख्सियत का अंदाज़ा लगा सकते हैं,तो ये भी मेरे लिए सम्मान ही है। इसलिए इस झरने को मेरे नाम के साथ बहने दें। 

अब उन वो जिन्होंने मिलने की ख्वाहिश का भी इज़हार किया था। ,उनसे मै सिर्फ इतना ही कहूँगा की अगर कभी इंडिया आना हुआ और ये शौक बाकी रह गया तो मै आपकी इस ख्वाहिश को पूरा करने की कोशिश करूँगा। आप लोगों ने मुझे इतना प्यार दिया यही मेरे लिए काफी है। मै इन्ही लम्हात को संजो रहा हूँ। ताकि कभी ब्लॉग जगत की याद आएगी तो इन लम्हात में चला जाऊंगा। फिलहाल मै ब्लॉग जगत में हूँ। लेकिन एक दिन नही रहूँगा ये बात तय है। इसलिए ब्लोगिंग को कभी भी सीरियसली नही लेना चाहिए। इसे शौक की हद तक ही रखा जाये। ताकि शौक ख़त्म हो तो तकलीफ ना हो। हँसते हँसते ही अपने शौक को पूरा करके बिछड़ जाएँ। इससे बड़ी क्या बात होगी। मै अपने शौक को पूरा करने के साथ साथ इतना सारा ज्ञान इंटरनेट के हिंदी ब्लॉग जगत में छोड़ कर जाना चाहता हूँ जिससे नए लोगों की खूब खूब रहनुमाई होती रहे। उन्हें अपनी भाषा में ही काफी सारा ज्ञान मिलता रहे। इसी बहाने ही सही वो एक अनजान आमिर को दुआ तो देकर जायेंगे।
मेरा प्यारा राजस्थान

मेरा प्यारा राजस्थान


आज मै आपको अपने जन्म स्थान राजस्थान के बारे में कुछ बताता हूँ। भारत में मेरा ताअल्लुक राजस्थान राज्य से है। जहाँ की सुन्दरता पूरी दुनियां में मशहूर है। जो की पर्यटकों की पसंदीदा जगह है। बचपन से लेकर जवानी तक का अरसा अपने वतन में अपने राजस्थान में गुजरा। आज भले ही मै कई सालों से दुबई में हूँ। लेकिन राजस्थान को कभी नही भूला। आज भी वहां की मिट्टी की खुशबु मेरे दिल में है। इसीलिए ये हमेशा से मेरे दिल के करीब जगह रही है। मेरी पसंदीदा जगहों की सूची में भी मेरा राजस्थान सबसे पहले है। हालाँकि मै पूरे राजस्थान में तो कभी नही घूम सका। लेकिन काफी जगह पर तो घूमना जरुर नसीब हुआ। यहाँ के लोग काफी भोले ,और साफ़ दिल के होते हैं। दुनिया में जब कोई अनजान किसी के घर का पता पूछता है तो लोग डायरेक्शन देकर बताते हैं।लेकिन यहाँ अगर कोई किसी जगह का पता पूछे तो  अगर वो जगह करीब है साथ जाकर लोग उस अनजान को उस जगह तक पहुंचाते हैं। और यहाँ की मेहमान नवाजी तो इतनी जबरदस्त है की आने वाले जब लौटकर जाते हैं ,तो याद ही करते रह जाते हैं। और यहाँ के लोगों में इतना प्यार और सम्मान है की जो इनसे मिले या तो ये उसके हो जाते हैं ,या वो इनका हो जाता है। यहाँ दुसरे राज्यों के मुकाबले में गरीबी भी काफी ज्यादा है। लेकिन यहाँ के लोग दिल के तो बादशाह हैं। और जुबान के इतने पक्के हैं ,की प्राण जाये पर वचन ना जाये। 

राजस्थान एक रेगिस्तानी इलाका है। यहाँ की गर्मी के सामने तो अरब की गर्मी भी कुछ नही। यहाँ पर सभी धर्मों के लोग काफी मिलजुल कर रहते हैं। दंगे फसाद जैसी घटनाएँ कम ही होती है। यहाँ का माहौल इतना पुर अमन है की रात को भी किसी के साथ अनहोनी जैसी घटनाएँ कम ही होती हैं। राजस्थान में मेरी मालूमात के मुताबिक 33 जिले हैं। मुझे राजस्थान में सबसे ज्यादा अजमेर शरीफ पसंद है। जब भी मै इंडिया में होता हूँ,तो सबसे ज्यादा अजमेर शरीफ ही जाना पसंद करता हूँ। मेरे दिल को सबसे ज्यादा यहीं पर सुकून मिलता है। और अजमेर में गरीब नवाज़ के प्रति लोगों की आस्था देखते ही बनती है। पूरा साल इनके दरबार में लोगों की भीड़ लगी रहती है। हर हर तरह के लोग आते हैं। और अपनी खाली झोलियाँ भरकर लौटते हैं। इसके अलावा जोधपुर ,जयपुर ,बीकानेर ,अलवर ,सीकर ,नागौर , जैसलमेर , उदयपुर , वगैरा जिले भी देखने लायक हैं। त्यौंहारों के मौकों पर तो यहाँ का माहौल देखने लायक होता है। बड़ों का सम्मान ,छोटों से प्यार और स्नेह ,यहाँ का हिस्सा है। इसके अलावा यहाँ के लोग ज्यादातर मिलनसार होते हैं। 

यहाँ की सादगी का ये आलम है की आज भी गेस के ज़माने में भी यहाँ के कई गांवों में चूल्हे पर ही खाना पकाया जाता है। लोग आज भी चौपालों पर बैठते हैं। यहाँ आज भी अपनी परम्पराओं को माना जाता है। लाज शर्मो हया भी यहाँ का एक हिस्सा है। यहाँ पर अलग अलग इलाकों में अलग अलग जुबानें बोली जाती हैं। लेकिन गांवों में आज भी ज्यादातर राजस्थानी ,मारवाड़ी ही बोली जाती है। यहाँ पर ज्यादातर पाठ्य क्रम हिंदी में होते हैं। इसलिए यहाँ के लोग हिंदी में ज्यादा महारत रखते हैं। और यहाँ हिंदी के प्रति काफी प्रेम पाया जाता है। पढ़ा लिखा तबका आज भी हिंदी में ही बात करना पसंद करता है। यहाँ के लोग काफी ज्यादा मेहनती भी होते हैं। और खेती बाड़ी भी यहाँ का एक ख़ास पेशा है। वीरता के लिए भी यहाँ के लोग जाने जाते हैं। भारत की आजादी की लड़ाई में अपनी जाने कुर्बान करने वालों में राजस्थान के सपूत भी शामिल थे। राजस्थान की राजधानी जयपुर है। और राजस्थान भारत के प्राचीन तम राज्यों में से एक है। माउन्ट आबू राजस्थान का एक मात्र पर्वतीय स्थल है। यहाँ लोग अक्सर गर्मियों में छुट्टियाँ बिताने के लिए जाया करते हैं। फिलहाल इतना ही। और अगर आप राजस्थान के बारे में ज्यादा जानना चाहते हैं ,तो यहाँ क्लिक करके जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं। आखिर कुछ तो है राजस्थान में ,की जो यहाँ आता है यहीं का होकर रह जाता है। बॉलीवुड स्टार्स भी यहाँ के दीवाने हैं। अक्सर राजस्थान में अपनी फिल्मो की शूटिंग और प्रमोशन के लिए पूरा साल आते जाते ही रहते हैं। और पर्यटक भी पूरा साल यहाँ आते रहते हैं। विदेशों में भी राजस्थान के निवासियों की अच्छी खासी तादात है। 
                                                                        

तो कैसी लगी आपको हमारे राजस्थान की सैर  ? जरुर बताइयेगा।

''आपको ये पोस्ट कैसी लगी ? अपनी राय निचे कमेन्ट बॉक्स में जरुर दें.और अगर आपको मोहब्बत नामा ब्लॉग पसंद आई ,तो आज ही ज्वाइन कर लीजिये ,और इमेल्स के जरिये नई पोस्ट्स प्राप्त कीजिये.

                                                              ''आमिर दुबई.,,,

एक रात का सफ़र

एक रात का सफ़र


गमे मोहब्बत बड़ी जालिम होती है.13 जुलाई को आज से कई साल पहले ये खबर फोन पर मिली की आज उसकी निकाह है ,जो कभी आमिर की थी.बे साख्ता आँखों से अश्क रवां हो गये.और अल्फाज़ फिल नज्म कुछ यूँ तरतीब पाए.अरब के सहरा में अपनी तन्हाईयाँ अपने साथ हालात पर अश्क बहा रही थी.और दिल जज़्बात को तसल्ली दे रहा था.रात के अँधेरे में जब कोई इन हालात को देखने वाला नही था.लोग चैन की नींद सोये हुए थे.और उसकी आँखों के सामने गुज़रे हुए लम्हात एक एक कर दुबारा नज़र आ रहे थे.उस रात का दर्द इस कदर था ,की लगता था की कभी सुबहो होगी ही नही.जिसकी एक सिसकी से सब घर वालों की नींद उड़ जाया करती थी.इस  बेकसी और बेबसी की रात परदेस में वो तनहा बैठा अपनी किस्मत पर अश्क बहा रहा था.कोई उसे तसल्ली देने वाला भी नही था.परिंदे उसके आस पास आ आकर उसकी बेबसी को देख रहे थे.और उसके हालात पर रो रहे थे.लेकिन वो बे जुबान कर भी क्या सकते थे.

बस वो अपनी खामोश जुबान से यही कह रहे थे की परदेसी सिर्फ तू ही नही.हम भी तेरे वतन से आये हैं.दुनिया में सिर्फ तू ही गम का मारा नही ,गम और भी हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा.और वो उन परिंदों को देख देख कर कह रहा था की काश ,मै भी तुम्हारी तरह उड़ सकता.तो अपने महबूब की गलियों में जाकर गिर पड़ता.और वहीँ दम तोड़ जाता.लेकिन न वो बेजुबान उसका दर्द समझ सकते थे.और ना ही वो उन बे जुबानो की जुबान को समझ पाता.वो काफी देर तनहा बैठा समंदर की लहरों को देख रहा था ,की शायद ये मुझे भी डुबो दे तो अच्छा है.लेकिन लहरें उससे कह रहीं थीं की मुसाफिर ,अभी तेरा वक्त नही आया.आज तू डूबने की तमन्ना करता है.लेकिन तेरे नसीब में कई डूबतों को निकालना लिखा है.एक दिन तेरा ये गम और ये दर्द नाक रात तेरे लिए एक सपना होगा.जिस दर्द में तू आज आंसू बहा रहा है एक दिन इसी को याद करके मुस्कुराएगा.एक दिन तुझे इस मर्जे मोहब्बत से जरूर शिफा मिलेगी.और तू मोहब्बत में चोट खाए लोगों के लिए मरहम का सामान करेगा.

कहने को तो वो अकेला और तनहा था.लेकिन ऐसा लग रहा था की जैसे सारी मखलूक उसे गम से निकालने की कोशिश में थी.कैसी दर्द नाक रात थी किसी के लिए.और किसी के लिए वो जिन्दगी की सबसे हसीं रात थी.कोई अपनी मोहब्बत के गम में अश्क बहा रहा था.तो कोई अपने महबूब से मिलने की ख़ुशी में शर्म से लाल थी.उस गरिबुल वतनी का कोई पुरसाने हाल ना था.और उसका हौंसला इस कदर पस्त हो चुका था की उससे सब्र भी नही हो पा रहा था.२१ साल की कमसिन उम्र में हाय ये कैसा गम इसको लग गया था.जिसने एक नवजवान का जीना दूभर कर दिया था.जिसने अभी जिन्दगी की बहारें भी ना देखी थीं.और इस कम उम्री में मोहब्बत का दर्द सीने में लिए एक दर्द नाक रात अश्क बहाते हुए गुजार रहा था.इस बे सुकूनी के आलम में जिसने कभी सिगरेट को हाथ तक नही लगाया था,कई कई सिगरेट्स वो पी चुका था.लेकिन सुकून सिगरेट में कहाँ था ,जो उस बेबस को मिलता.एक तो वो घर बार और वतन से दूर रहने की सजा पहले ही काट रहा था.उपर से गमे मोहब्बत ने उसके दिल को टुकड़े टुकड़े करके रख दिया था.

ऐसा लगता था की जैसे ये रात उसकी जिन्दगी की आखिरी रात हो.लेकिन उसका सफ़र अभी काफी बाकि था. क्या रात थी जो ढलने का नाम ही नही ले रही थी.रोते रोते आँखें ही लाल हो चुकी थीं.कौन उसके जज़्बात का अंदाज़ा कर सकता था.उसके अपने भी उस वक्त गहरी नींद में सोये हुए थे.उसके गम का और उसकी तन्हाई का अंदाज़ा कौन लगा सकता था.कभी पुराने खतों को देखता तो कभी अपने महबूब की निशानियों को देख देख कर अपने गम को हल्का करने की कोशिश करता.शायद ये रात कुछ ज्यादा ही तवील हो चुकी थी.ऐसा लग रहा था की जैसे किसी ने बड़ी मेहनत से कोई आशियाना बनाया था ,और बनने के साथ ही वो टूट गया हो.और उसका मालिक उसके पास बैठकर अश्क बहा रहा हो.उसकी कैफियत भी कुछ ऐसी ही थी.बचपन से जिस मोहब्बत को दिल में लिए लिए घूमता रहा.आज वो सरे बाज़ार नीलाम हो चुकी थी.उसे कोई और खरीद कर ले जा चुका था.तसव्वुर में अपनी मोहब्बत को दुल्हन बनी देख रहा था.और सोच रहा था की ये दुल्हन के रूप में कितनी हसीन लगती है.काश की ये मेरे लिए दुल्हन बनी होती.लेकिन उसके नन्हे से दिल को क्या पता था की होनी कुछ और ही थी.लेकिन वो तो बस इन्ही खयालात में खोया हुआ था.तो कभी अपनी बेबसी पर आंसू बहाने बैठ जाता.शायद मोहब्बत का गम इसे ही ज्यादा था.दिल तो इस बात का यकीन करने के लिए भी तैयार नही था ,की आज सब कुछ पराया हो चुका था.ऐसा लगता था की शायद वो कोई बुरा सपना ही देख रहा था.जिसे ख़तम होने की उम्मीद भी बाकी थी.और ये भी यकीन था की ये सपना ही है ,और सपने कहाँ सच्चे होते हैं.लेकिन उसे मालूम था की ये हकीकत थी.तभी तो उसे खून के आंसू रुला रही थी.अजीब रात थी की एक ही रात जिन्दगी के कई साल के मोहब्बत के लम्हात को दिखा गयी.और फिर भी बाकी ही थी.गोया की इस रात में जिन्दगी सिमट कर सामने आ गयी थी.और उनके साथ गुजरे एक एक लम्हे दुबारा दिखा रही थी.ठंडी हवाएं चल रही थीं.और गहरी रात ,दूर दूर तक अँधेरा ,और चाँद की रौशनी में समंदर की शौर मचाती लहरें.और अरब के समंदर के साहिल पर तनहा बैठा एक गरिबुल वतनी नवजवान.ऐसा माहौल जिसमे अक्सर लोग अकेले आते हुए भी डरते हैं.और एक ये था की अपने आप में खोया हुआ घंटों तक बैठा था.

दूर दूर तक कोई इन्सान का नमो निशान तक नही.चरिन्दो परिंदे आस पास मंडरा रहे थे.और इस अजीब ओ गरीब को देख रहे थे.और आपस में बात कर रहे थे.की ये कौन है ,इस पर कौन सी मुसीबत आन पड़ी जो ये इस रात का तनहा मुसाफिर बैठा है.इसका भी घर बार होगा,माँ बाप होंगे.घर वाले होंगे.उनमे से एक परिंदे ने कहा की ये कोई परदेसी है.अरब का तो नही लगता.दुसरे ने कहा की तुम्हे क्या मालुम.तो वो परिंदा बोला की देख नही रहे हो ये कितनी देर से समंदर के साहिल की रेत पर अपनी भाषा में अपने महबूब का नाम लिख रहा है.तो कभी समंदर की लहरों के थपेड़े किनारे तक आते,तो उसके चहरे पर थोडा सा पानी डालकर उसके आंसू भी पोंछ जाते.लेकिन उसके अश्क थे की रुकने का नाम ही नही ले रहे थे.क्यूँ की ये जानता था की जो इसका था वो हमेशा के लिए अब पराया हो चुका था.जो अब कभी इसको नही मिल सकता.कभी भी नही.शायद आमना सामना ही ना हो.इस तरह अश्क बहाते बहाते जाने कब नींद की आगोश में चला गया.सुबह को जब आँख खुली तो देखा की रात अब गुजर चुकी है.और एक नई सुबहो उसकी जिन्दगी में हो चुकी है.अपने आप को समंदर के किनारे पर अकेला पाकर ,हैरान हो गया.लेकिन रात वाला माजरा याद आया तो समझ गया की रात यहीं पर गुजरी है.सुबह को वही परिंदे उसे घूर घूर कर देख रहे थे और कह रहे थे की मुसाफिर ,उठ और चल अपनी मंजिल की तरफ.अभी तेरा सफ़र बहुत बाकी है.जहाँ में और भी गम हैं मोहब्बत के सिवा.


''आपको ये पोस्ट कैसी लगी ? अपनी राय निचे कमेन्ट बॉक्स में जरुर दें.और अगर आपको मोहब्बत नामा ब्लॉग पसंद आई ,तो आज ही ज्वाइन कर लीजिये ,और इमेल्स के जरिये नई पोस्ट्स प्राप्त कीजिये.

                                                        ''आमिर दुबई.,,,

ईद मुबारक हो

ईद मुबारक हो


दोस्तों ,गुरूवार से हमारे यहाँ दुबई में तीन दिन की ईद की छुट्टियाँ हो गईं थीं.इसलिए ईद की खुशियों में मशगुल था.आज संडे को दुबारा ड्यूटी पर लौटा हूँ.और साथ ही अपने इंटरनेट की दुनिया में.आज इमेल्स चेक किये ,तो पता चला की कितने सारे इमेल्स आये हुए पड़े हैं.ईद की मुबारकबादियाँ मिल रही हैं.ऐसा लगा की मानो इंडिया में रहते हुए भी सब मेरे साथ ही हैं.कभी कभी किसी मश्गुलियत की वजह से इंटरनेट से दूर एक अलग दुनिया में भी जाना पड़ता है.इन तीन दिन की छुट्टियों में अपनी जिन्दगी के कुछ खुबसूरत दिनों को गुजारा.खूब इंजॉय किया.दुबई दर्शन का भी तो कभी कभी मौका मिलता है.जिसमे आराम से यहाँ की खूबसूरती को देखा जा सकता है.सभी दोस्तों के साथ घूमते फिरते कभी सफ़र करते ईद के दिन भी गुजर गये.और वही दिन चर्या दुबारा शुरू हो गई.काश की ईद कुछ दिन और रुक जाती.और थोडा सा आराम मिल जाता.कल रात को थकन से चूर चूर लौटा ,और घर आते ही सुकून की नींद सो गया.आज सुबह उठकर दुबारा अपनी दिन चर्या पर लौटा.ये छुट्टियों के दिन भी कितने प्यारे प्यारे होते हैं.टेलीफोन पर इंटरनेट के जरिये इंडिया घर वालों से बात करना.दोस्तों की महफ़िलों में देर रात तक बैठना ,घूमना फिरना ,कभी समंदर की लहरों का आनंद लेना ,खाना पकाना ,मेहमान नवाजियाँ ,दोस्तों से मिलना जुलना ,सभी कुछ होता है हमारे त्योंहारों में ,जो की दिल को भा जाता है.और जब दिल लगता है ,तो छुट्टियाँ ही साथ छोड़ जाती हैं.खैर आप सभी को मेरी तरफ से खूब खूब इदुल अजहा मुबारक हो.और मेरे सभी ब्लोगर दोस्तों को भी मेरी तरफ से शुभकामनायें.

                                                                     ''आमिर अली दुबई ''
आप भी अपना ब्लॉग बना सकते हैं

आप भी अपना ब्लॉग बना सकते हैं


दोस्तों  मै पहले कई बार आर्टिकल्स ,नगमे ,वगैरा लिखता था.जो की मेरे दोस्तों को बहुत पसंद आते थे.मैंने कई विषयों पर बहुत कुछ लिखा.एक बार एक दोस्त ने मुझे राय दी की यार आप इतना अच्छा लिखते हैं तो शेयर क्यूँ नही करते.तो मैंने उनसे पूछा की कैसे ? वो बोले की गूगल ने ब्लोगर नाम से एक मंच बनाया है.जहाँ पर फ्री ब्लॉग बनाये जा सकते हैं.वहां अपना फ्री ब्लॉग बनाइये.उसमे कोई खर्चा नही है.मैंने उनसे पूछा की कैसे बनाएं.उन्होंने मुझे कुछ ब्लोग्स वगैरा बताये.जिनमे से कंप्यूटर दुनिया नामक ब्लॉग से प्रेरित होकर मैंने भी अपना ब्लॉग बनाने की ठानी.लेकिन नया नया था.क्या कैसे करना है,इसका कुछ भी पता नही था.लेकिन इंटरनेट की दुनिया से ऐसे दोस्त मिले जिन्होंने इस काम में मेरी काफी मदद की.मैने ब्लॉग तो जैसे तैसे बना लिया.बाकि मै इसमें पोस्ट्स करता रहा.शुरू में ये सिलसिला चलता रहा.लेकिन इतनी नाकामी मिली की मै मायूस हो गया.और मैंने ब्लॉग को बंद कर दिया.कुछ समय बाद ''टिप्स हिंदी में''ब्लॉग पर जाना हुआ.वहां से बहुत कुछ सिखने के बाद दुबारा ब्लॉग पर काम शुरू किया.मोहब्बत नामा जिसे मै बंद कर चुका था.इसे दुबारा शुरू किया.
इसकी सजावट हमारे एक ब्लोगर गुरु विनीत नागपाल ने कर दी.जो की ''टिप्स हिंदी में''ब्लॉग के ब्लोगर हैं.ब्लॉग की सजावट होने के बाद मैंने दुबारा इस पर पोस्ट्स करनी शुरू की.फिर धीरे धीरे सीखते सीखते आज मोहब्बत नामा आपके सामने है.मोहब्बत नामा के लिए मयंक भारद्वाज ,और विनीत नागपाल ने मेरा जो साथ दिया उसे मै कभी नही भूल सकता.आज मोहब्बत नामा इन दोनों की वजह से ही है.वरना मै तो कबका मायूस हो चुका था.ब्लोगिंग के इस सफ़र में कई लोग मिलते रहे.और ब्लोगिंग सीखते सीखते आज मै काफी हद तक जानकारी हासिल कर चुका.तकनिकी ब्लोग्स पढ़ पढ़ कर मेरी दिलचस्पी ज्यादा तकनिकी ब्लोग्स में ही रही.फिर मैंने मास्टर्स टेक के नाम से एक तकनिकी ब्लॉग शुरू किया.ताकि मै भी जो कुछ मुझे जानकारियां हैं उन्हें लोगों तक पहुंचा सकूं.आज भी मेरी ज्यादा दिलचस्पी मास्टर्स टेक में ही है.उसमे मैंने अपनी जानकारियों के मुताबिक कई पोस्ट्स भेजीं.जिनसे कई लोगों ने फायदे भी उठाये.उसके तो प्रसंशा इमेल मुझे आज भी मिलते रहते हैं.इन दोनों ब्लोग्स पर मैंने कई विषयों पर लिखा ,और बहुत कुछ लिखा.और ब्लोगर्स के लिए भी बहुत कुछ अपने तजुर्बात की रौशनी में लिखता रहा.आज भी मै ब्लोगर्स के लिए टिप्स बड़ी दिलचस्पी से लिखता हूँ.क्यूँ की इससे कई नए ब्लोगर्स की दुआएं मिलती हैं.नयी प्रतिभाओं को रास्ता मिलता है.इसलिए मास्टर्स टेक मेरा सबसे ज्यादा पसंदीदा ब्लॉग बना.इसे मैंने अपनी मेहनत से अपने तजर्बात से बनाया है.और नयी प्रतिभाओं के लिए इसमें बहुत कुछ है.
लेकिन अब मै ये खवाहिश रखता था की ब्लोगिंग जिसमे मैंने इतने पापड़ बेले,इसमें कुछ आसानी होनी चाहिए.ताकि नए ब्लोगर्स के लिए कुछ सहूलत हो.जो लोग अच्छा लिखते हैं.या बहुत सारी जानकारियां रखते हैं.और उन्हें शेयर करना चाहते हैं.दुनिया तक अपनी भावनाएं ,अपने जज्बात पहुँचाना चाहते हैं.अपना ज्ञान पहुँचाने की खवाहिश रखते हैं.उनके लिए ब्लोगिंग सिखने का कोई आसान तरीका होना चाहिए.मेने अपनी इस ख्वाहिश का इजहार ''ऑनलाइन एज्युकेशन ब्लॉग ''के ब्लोगर इमरान अली से किया.उन्होंने इस पर काम शुरू किया.और एक विडियो पोस्ट तैयार की.''Learn Bloging in Urdu-Hindi ''इस पोस्ट के जरिये उन्होंने ब्लोगिंग का विडियो टोटोरियल तलाश करके पोस्ट कर दिया.और मुझे बताया की आमिर भाई मैंने ब्लोगिंग सिखाने वाले वीडियोज पोस्ट्स कर दिए हैं.तो मुझे बेहद ख़ुशी हुई.मैंने इस पोस्ट पर जाकर उन वीडियोज को देखा.और जैसा मै चाहता था ,वैसा ही विडियो टोटोरियल उन्होंने पोस्ट कर दिया.आपमें से जो भी अच्छा लिखते हैं.और अपना खुद का ब्लॉग बनाने की ख्वाहिश रखते हैं.वो इस पोस्ट को पढ़ लें.और इन वीडियोज को देख कर ब्लोगिंग सीख लें.और फिर अपना ब्लॉग बना सकते हैं.और उसमे पोस्ट्स के जरिये अपने दिल की बात सभी के साथ शेयर कर सकते हैं.इसके अलावा मैंने भी नए ब्लोगर्स के लिए कुछ हिंदी पोस्ट्स के लिंक जमा किये.ताकि उन्हें पढ़कर एक नया ब्लोगर अपनी ब्लॉग को बेहतर से बेहतर बना सके.आज मै अपनी इस पोस्ट के जरिये उन नए लोगों के लिए जो अपना खुद का ब्लॉग बनाना चाहते हैं ,बहुत सारा लिटरेचर लेकर आया हूँ.जिसकी मदद से आप अपना ब्लॉग खुद बना भी सकेंगे और उसे तैयार भी कर सकेंगे.साथ ही उसे बेहतर भी बना सकेंगे.अगर आप ब्लोगिंग की दुनिया में आना चाहते हैं तो सबसे पहले आमिर आपका स्वागत करता है.किसी भी प्रकार की ब्लॉग मदद के लिए आप मुझे इमेल कर सकते हैं.मै आपकी हर संभव मदद के लिए हर वक्त तैयार हूँ.क्यूँ की जो ख़ुशी दूसरों की मदद करके मिलती है उसकी बात ही कुछ और है.ऐसी ही ख़ुशी उन ब्लोगर्स को भी मिली होगी जिन्होंने शुरू में मेरी मदद की थी.
आज मै ये महसूस कर रहा हूँ की नयी प्रतिभाओं को भी एक मौका मिलना चाहिए.ताकि वो भी कुछ कर सकें.उनकी भी हर संभव मदद की जानी चाहिए.मैंने एक दो नए ब्लोगर्स को ब्लोगिंग के लिए एक मौका दिया.तो उन्होंने तो कमाल ही कर दिया.ऐसी ऐसी जानकारियां शेयर कीं कि मै भी देखता ही रह गया.जिनकी खुद मुझे भी बहुत जरुरत थी.तो किसी ने वीडियो एज्युकेशन के जरिये लोगों का दिल जीत लिया.
इसलिए मुझे लगता है कि ऐसे नए लोगों को भी ब्लोगिंग में आना चाहिए.आपकी हमारी हिंदी दुनिया को बहुत जरुरत है.आप हिंदी में अपने ब्लोग्स बनाएं.और अपनी प्रतिभा को दुनिया तक पहुंचाएं.आपके जरिये कई लोगों का भला होगा.लोग आपको बहुत दुआएं देंगे.सबसे हसीन जिन्दगी उसी कि है जो दूसरों के लिए जीते हैं.आप इतना कुछ लिख कर इंटरनेट पर छोड़ जाएँ कि आने वाली नस्लें भी आपको याद करें.और आपके बाद भी आपकी पोस्ट्स से लोग फायदे उठाते रहें.आइये आप भी ब्लोगिंग के मैदान में.और अपना हुनर और टेलेंट से खूब खूब लोगों को पहुंचाइए.
अब मै आपको उन हिंदी पोस्ट्स के लिंक दे रहा हूँ जहाँ से आप ब्लोगिंग के बारे में काफी कुछ सीख सकेंगे.और पूरी तैयारी के साथ ब्लोगिंग के मैदान में उतर सकेंगे.पहला लिंक ब्लोगिंग की वीडियो एज्युकेशन का है.जहाँ आप वीडियोज देख कर ब्लोगिंग सीख सकेंगे.उसके बाद वाले लिंक सभी आर्टिकल्स हैं.जहाँ से आपको ब्लोगिंग के लिए काफी मदद मिलेगी.जिन्हें पढ़कर आप एक बेहतरीन ब्लोगर बन सकते हैं.

1.''Learn Bloging in Urdu-Hindi ''

2.ब्लॉग को प्रचारित करने के तरीके 

3.अपना ब्लॉग कैसे शुरू करें ?

 



6.अपने ब्लॉग का ट्राफिक कई गुना बढ़ाएं 




13.वेबसाइट या ब्लॉग का ट्रैफिक बढ़ाएं

14.मास्टर्स टेक ब्लॉग ट्रिक्स 

15.ब्लॉग ट्राफिक बढ़ाने के लिए कुछ टिप्स 



''आपको ये पोस्ट कैसी लगी ? अपनी राय निचे कमेन्ट बॉक्स में जरुर दें.और अगर आपको मोहब्बत नामा ब्लॉग पसंद आई ,तो आज ही ज्वाइन कर लीजिये ,और इमेल्स के जरिये नई           पोस्ट्स प्राप्त कीजिये.

                                                      ''आमिर दुबई.,,,

गुरूजी का डर

गुरूजी का डर


डियर रीडर्स ,
जैसा की आप जानते हैं की मैंने मोहब्बत नामा पर मेरी डायरी नामक कॉलोम शुरू किया था.जिसमे मै अपनी जिन्दगी के कुछ अनछुए पहलुओं को आप सभी के साथ शेयर करता हूँ.आज भी उसी कॉलोम की एक कड़ी ये है.ये भी एक यादगार वाकिया हुआ था.
बात उन दिनों की है जिन दिनों मै एक स्कुल में टीचर था.एक दिन मै क्लास में पढ़ा रहा था.अचानक देखा की बच्चे अपनी जगह से खड़े हो गये.और डर के मारे इधर उधर भागने लगे.मै भी परेशान हो गया की क्या हो गया है.आखिर मैंने उनसे भागने की वजह पूछी तो उनमे से एक ने बताया की क्लास में छिपकली आ गई है.मैंने उनको जैसे तैसे बिठाया.और खुद एक साइड में खड़ा था.इतने में मैंने देखा की छिपकली मेरी तरफ दौड़ती हुई आई.मै भी डर के मारे उपर उछला ,मेरी आँखें बंद थी.और जब जमीन पर खड़ा हुआ तो देखा की छिपकली गायब थी.मैंने इधर उधर देखा.लेकिन वो नज़र नही आई.फिर किसी ने बताया की सर अपने पॉंव के निचे देखो.मैंने देखा की जिस छिपकली से डर के मारे मै उपर उछला था.वो मेरे ही पॉंव के निचे आकर मर गई.अब तो बस मेरी वाह वाही शुरू हो गई.की सर ने अपने पॉंव से छिपकली को मार दिया.अब ये किसको पता था की सर खुद डर के मारे उपर उछला था.और वो इत्तिफाक से मर गई.स्टाफ भी मेरी प्रसंशा करने लगे.मै भी मुस्कुरा रहा था.और मन ही मन सोच रहा था की इनको क्या मालुम ,मै तो खुद भी डर गया था.आज भी ये बात याद आती है तो मै मुस्कुराकर रह जाता हूँ.उन दिनों से जब मै स्कुल में पढाता था ,मेरी बहुत सारी यादें जुडी हुई हैं.वो वक्त मेरे लिए काफी अहम था.और उन दिनों मैंने बहुत कुछ सीखा.जो की आज मुझे होंसला देता है.बतौरे अध्यापक मै अपने बच्चों से बहुत प्यार करता था.आज मेरे वो छोटे छोटे बच्चे इतने बड़े हो गये हैं की उनमे से कईयों की शादी भी हो चुकी.और बच्चे भी हो गये.लेकिन आज भी मै उनको कभी कभी याद करता हूँ.


''आपको ये पोस्ट कैसी लगी ? अपनी राय निचे कमेन्ट बॉक्स में जरुर दें.और अगर आपको मोहब्बत नामा ब्लॉग पसंद आई ,तो आज ही ज्वाइन कर लीजिये ,और इमेल्स के जरिये नई पोस्ट्स प्राप्त कीजिये.




                    ''आमिर दुबई.,,,

आज मिलिए आमिर दुबई से

आज मिलिए आमिर दुबई से


कई तरह के विषय पर कई तरह की पोस्ट्स लिखने के बाद कई लोगों ने मेरे बारे में जानने की इच्छा जताई.आज की पोस्ट उन सभी के लिए ही है जो मेरे बारे में जानने के खवाहिश मंद थे.अपनी फोटो इसलिए शेयर नही करता की कहैं पोपुलर ना हो जाऊं.मेरी नज़र में वो जिन्दगी ज्यादा अफज़ल है ,की हमारी अपनी कोई हस्ती ना हो.ताकि हमारे अन्दर कोई मै ना आ जाये.और वैसे भी मेरा नजरिया यही है की इन सबकी जरुरत या तमन्ना मै अपने अन्दर नही पाता.इसलिए कई बार सिर्फ नाम ही काफी होता है.और आज ब्लोगिंग की दुनिया में आमिर ने भी अपना इतना योगदान तो दे ही दिया होगा की उसके लिए उसका नाम ही काफी है.आइये आज आपको अपनी पसंद ना पसंद के बारे में आगाह करता हूँ.

पूरा नाम आमिर अली 
लोकेशन दुबई अरब इमारात 
नागरिकता भारतीय 
उम्र - तक़रीबन 28 साल 
पसंदीदा कलर - ब्लेक ,वाईट 
शौक इंटरनेट सर्फिंग ,और नज्म ,स्टोरीज ,कॉलोम,आर्टिकल्स लिखना 
दिलचस्पी - पढाई ,तकनिकी ज्ञान,न्यूज पढना ,या ऑनलाइन एज्युकेशन.
पसंदीदा मोबाइल आई फ़ोन 4 S 
पसंदीदा लेपटोप - डेल ,एपल 
पसंदीदा परफ्यूम - ब्ल्यू फॉर मेन , अरेबियन , सहरा अल अरब ,गुले अत्तार ,रेड रोज ,अल हयात.
पसंदीदा कोल्ड ड्रिंक - थम्स अप ,ग्रीन टी 
पसंदीदा ड्रेस जींस शर्ट ,पठानी सूट
पसंदीदा खाना भारतीय ,अरबिक 
जॉब असिस्टेंट इंजिनियर 
पसंदीदा खरीददारी पेन ,परफ्यूम ,मोबाइल ,लेपटोप.
पसंदीदा जगह भारत में राजस्थान ,गुजरात ,मुंबई ,देहली.और विदेश में दुबई ,शारजाह ,अबू धाबी,मलेशिया ,मस्कत,रियाद,
भाषा बोलने में उर्दू ,लिखने में हिंदी.इसके अलावा इंग्लिश ,अरबिक ,पंजाबी ,गुजराती,मारवाड़ी .घरेलु भाषा उर्दू ही है.
पसंदीदा अभिनेता सलमान खान ,शाहरुख़ खान ,कादर खान,दिलीप कुमार.
पसंदीदा अभिनेत्री - केटरीना कैफ ,प्रीटी जिंटा,साधना.
पसंदीदा फिल्म चक दे इंडिया ,तेरे नाम,माय नेम इस खान,DDLG ,हम साथ साथ हैं,टायटेनिक.
पसंदीदा मौसम - सर्दी 
पसंदीदा वेबसाइट हिंदी टेक गुरु 
खुद की ब्लोग्स - मास्टर्स टेक टिप्स ,मोहब्बत नामा.
पसंदीदा ब्लॉग -सभी तकनिकी ब्लोग्स ,और खासकर ऑनलाइन एजुकेशन ब्लॉग, कंप्यूटर टिप्स एंड ट्रिक्स.
पसंदीदा अखबार -बीबीसी हिंदी 
दिनचर्या सुबह से शाम कंप्यूटर पर बैठना.
अख़लाक़ - कभी हंसमुख ,कभी संजीदा.
आदत -बगैर किसी बात के उदासी.या तन्हाई.
व्यवहार दोस्ताना 
नशा कुछ नही.
कोंटेक्ट डिटेल : Aamir2692@Gmail.com 


आज के लिए सिर्फ इतना ही.आइन्दा मैका मिला तो अपने बारे में और कुछ लिखने की कोशिश करूँगा.दुनिया में कई लोग ऐसे होंगे जिनकी पसंद ना पसंद मुझसे काफी मिलती होगी.लेकिन मुझे चंद ही मिले.खैर आपको मोहब्बत नामा की ये पोस्ट कैसी लगी अपनी राय से मुझे जरुर आगाह करें.और आपको मेरे बारे में जानकार कैसा लगा ? ये भी जरुर बताएं.ताकि मै दुबारा अपने बारे में कभी लिखने का होंसला पा सकूं.

एक हादसा जिसने हिलाकर रख दिया था.

एक हादसा जिसने हिलाकर रख दिया था.

कभी कभी जिन्दगी में कुछ ऐसा हो जाता है जो की उम्र भर याद रहता है.इन्ही सब बातों को शेयर करने के लिए मैंने मोहब्बत नामा ब्लॉग पर ''मेरी डायरी कॉलम शुरू किया है.आज भी मै आपको एक सच्ची घटना बताता हूँ.जो की मेरे साथ हुई थी.सन 2010 में मैने  दुबई अरब इमारात से अपने वतन इंडिया छुट्टी आने का इरादा किया था.ये उन दिनों की ही बात है.मेरे अलावा मेरे चाचा जी भी यहीं दुबई में थे.लेकिन वो दूसरी जगह जॉब करते थे और मै दूसरी जगह.लेकिन अक्सर फोन पर बात होती रहती थी.2010 में हम दोनों ने एक साथ इंडिया जाने का प्रोग्राम बनाया था.चाचा जी ने किसी प्लेन का नाम लेते हुए कहा की मै इसमें टिकट करवा रहा हूँ.हम दोनों इसी में इंडिया चलेंगे.लेकिन न जाने क्यूँ मेरे ज़हन इसके लिए तैयार ही नही हो रहा था.मैंने किसी दुसरे एयरोप्लेन में उनसे चलने को कहा.मैंने उनसे कहा की आप इसमें टिकट करवाएं.लेकिन वो भी जिद्द पर अड़े हुए थे.की जिस प्लेन का मै बोल रहा हूँ उसमे जाने में क्या प्रोब्लम है.लेकिन उसमे मेरा दिल गवारा नही कर रहा था.इसलिए मै ज़हनी तौर पर तैयार नही था.आखिर कई दिन बहस करने के बाद चाचा जी को मेरी बात माननी पड़ी.और हमने उसी एयरो प्लेन का टिकट करवाया जिसका मैंने बोला था.और हमारा फ्लाईट चाचा जी के बताये हुए प्लेन से 3 दिन बाद था.एक दिन ऑफिस में मै काम कर रहा था ,इतने में अचानक खबर मिली की इंडिया में एक प्लेन टकरा गया है.और उस हादसे में जितने भी लोग प्लेन में सवार थे सभी मारे गये.ये खबर सुनकर मेरे पूरे बदन में झुरझुरी पैदा हो गई.क्यूँ की ये वही एयरोप्लेन था जिसमे चाचा जी टिकट करवाना चाह रहे थे.और मेरा ज़हन नही माना था ,जिसकी वजह से मेरे बताये हुए प्लेन में हम टिकट करवा चुके थे.उस वक्त मै इस कदर डर गया था ,की मैने चाचा जी से टिकट केंसल करवाने को भी बोल दिया था.मेरा सफ़र करने का बिलकुल भी मन नही हो रहा था.और कई दिन तक मै इस घटना को सोच सोच कर परेशान रहा.की अगर हम उस प्लेन का टिकट केंसल ना करवाते ,तो चाचा जी उसी का टिकट करवाने के लिए जिद्द कर रहे थे.खैर जिन्दगी और मौत तो रब के हाथ में है.लेकिन इस घटना से मै काफी ज्यादा अपसेट हो गया था.और उसके कई दिनों के बाद हम जिसका मै चाहता था उसी प्लेन में इंडिया गये थे.आज भी जब इस तरह की घटना की खबर पढता या सुनता हूँ तो वही हादसा याद आ जाता है.और मै काफी परेशान हो जाता हूँ.मैंने उस प्लेन का नाम वगैरा नही लिखा जिसका हादसा हुआ था.और ना ही उसका नाम लिखा जिसमे हमने सफ़र किया था.ताकि किसी तरह का कोई फितना पैदा ना हो.और ये प्लेन भी बदनाम ना हो.क्यूँ की इस तरह नाम लेकर आर्टिकल लिखने से भी कई बार लोग डर जाते हैं और उस प्लेन में सफ़र करने से कतराते हैं.हालाँकि हादसे रोजाना तो नही होते.जिससे उन प्लेन का भी काफी नुक्सान होता है.जो समझदार हैं वो वैसे भी समझ ही जायेंगे की हमारे यहाँ किन किन प्लेनों का हादसा हुआ है.आज भी जब भी मै किसी प्लेन के हादसे की खबर सुनता हूँ  तो मुझे यही हादसा दुबारा याद आ जाता है.और मै काफी देर तक सोचता रहता हूँ.इस घटना के बाद आज भी जब मुझे एयरो प्लेन में सफ़र करना होता है तो मै असहज ही रहता हूँ.

ये पोस्ट आपको कैसी लगी ? अपनी राय निचे कमेन्ट बॉक्स में जरुर दें.अगर आपको भी मोहब्बत नामा पसंद है तो आज ही ज्वाइन कर लीजिये.

                                                        ''आमिर दुबई''
गुरूजी का आशीर्वाद

गुरूजी का आशीर्वाद

डियर रीडर्स ,मैंने आपको पिछली एक पोस्ट में बताया था की मै अब ''मेरी डायरी '' के नाम से भी एक कॉलम शुरू करूँगा.जिसमे मै अपनी जिन्दगी के कुछ यादगार वाकियात आप सभी से शेयर करूँगा.हर एक की जिन्दगी में कई सारी बातें और वाकियात ऐसे होते हैं.जो की ज़हन में रह जाते हैं.और जब हम मेच्योर होते हैं.तो उन्हें याद कर करके मुस्कुराते हैं.और अपनी यादें ताज़ा करते हैं.आइये मै आज एक बहुत ही खुबसूरत वाकिये से अपनी डायरी का आगाज़ करता हूँ.
बात उन दिनों की है जिन दिनों मै इंडिया में एक स्कुल में टीचर था.मै अपने स्टुडेंट्स से बहुत ज्यादा प्यार करता था.शायद इसी लिए वो मुझे अपने सबसे ज्यादा करीब पाते थे.मै भी उनको अपनी औलाद की तरह समझता था.उनके हर दुःख दर्द को अपना समझता था.हत्ता की अगर कोई टेंशन में हो या उदास हो तब भी मै बेकरार हो जाता था.और उनकी परेशानियों को दूर करके उनके चहरे पर मुस्कान लाता था.क्यूँ की मै हर एक को अपना समझता था इसी लिए हर एक मुझे भी अपना सबसे पसंदीदा सर समझते थे.एक दिन क्लास में पढ़ाते हुए मैंने गौर किया की एक बच्ची स्कुल नही आई थी.मैंने दुसरे बच्चों से पता किया तो मुझे खबर मिली की वो इन दिनों बहुत ज्यादा बीमार है.उसने खाना पीना भी छोड़ दिया.ये सुनकर मुझे झटका लगा.और मै बहुत ज्यादा परेशां हो गया.आखिर मैंने उसके घर जाकर उसके हालात को देखने का फैसला किया.फिर मै दुसरे बच्चों के साथ छुट्टी को उस बच्ची के घर गया.और मैंने वहां पहुंचकर उसके माँ बाप से हालात का जायजा लिया.उन्होंने बताया की ये कई दिनों से बीमार है.इत्तिफाक से मुझे इसका काफी दिन बाद ज्ञान हुआ.खैर मैंने उसके माँ बाप को तसल्ली दी.और उन्हें काफी प्यार से सब्र करने के लिए समझाया.और क्यूँ की वो लड़की खाना पीना छोड़ चुकी थी.उसे सिर्फ जूस वगैरा ही पिलाया जा रहा था.मै उस बच्ची के पास गया ,और मैंने उसके माँ बाप से चाय और बिस्किट मंगवाए.और उस बच्ची को खाने के लिए कहा.लेकिन वो बोली की सर मै नही खा सकती.खाते ही मुझे उलटी आएगी.मैंने उसे तसल्ली दी.और कहा की कुछ नही होगा.आप मेरे कहने से खाओ.आप बहुत जल्द ठीक हो जाएँगी.लेकिन वो बच्ची लगातार मना करती रही.आखिर कार मैंने उसे वो चाय बिस्किट खिला ही दिए.और उसे काफी तसल्ली दी.और उसके दिमाग से ये बात निकाल दी की वो बीमार है.और उस बच्ची से काफी देर तक मै हंसी मज़ाक करता रहा.उसका दिल बहलाता रहा.फिर मै वहां से चला गया.दो दिन बाद पता चला की वो बच्ची बिलकुल ठीक हो चुकी है.पर एक अजीब सी बात ये हुई की जब वो बीमार थी तो मै जब उसके घर गया था तो मैंने उसके सर पर हाथ फेरा था.तो हुआ यूँ की उसके ठीक होने के बाद एक दिन सुबह सुबह एक औरत स्कुल में आई.उसकी गोद में एक प्यारा सा बच्चा था.आते ही वो मेरे बारे में पूछने लगी.तो स्टाफ ने उसे मेरे पास भेज दिया.वो मेरे पास आई और कहने लगी की सर जी ,आपने उस बच्ची के सर पर हाथ फेरा था ,जो की ठीक हो गई.ये मेरा बच्चा है काफी दिनों से बीमार है.थोडा इसके सर पर भी आप अपना हाथ फेर दीजिये.मै उसकी बात सुनकर चौंक पड़ा.और मैंने उसे समझाया की ऐसा कुछ नही है.वो बच्ची दवाइयां वगैरा लेकर ही ठीक हुई है.लेकिन वो औरत जिद्द करने लगी की आप बस मेरे बच्चे के सर पर हाथ फेर दीजिये.मुझे उम्मीद है की ये ठीक हो जायेगा.आखिर कार मुझे उसके बच्चे के सर पर हाथ फेरना पड़ा.इत्तिफाक से कुछ दिन बाद वो भी ठीक हो गया.हाथ फेरने में कोई प्रोब्लम नही थी.बल्कि मुझे तो उनके अंधविश्वास पर ताज्जुब हो रहा था.फिर मैंने पता लगाया की जिस बच्ची के घर मै गया था उसके माँ बाप ने ही मेरी नेक नामी के किस्से शुरू कर दिए थे की ये बच्ची इतने अरसे से बीमार थी और दवाइयां भी ले रही थी,मगर ठीक नही हुई.बस इसके सर ने इसके सर पर हाथ फेरा आशीर्वाद दिया ,और ये दुसरे दिन ही ठीक हो गई.धीरे धीरे स्टाफ में भी ये बात फ़ैल गई.वो भी मुझसे मज़ाक करते की सर जी हमे भी आशीर्वाद दे दीजिये.मै काफी देर तक अपनी हंसी रोक नही पाता.आज भी ये बात याद आती है तो मै मुस्कुरा उठता हूँ.ये मेरी जिन्दगी का एक कभी न भूलने वाला वाकिया हुआ था.जो आज मै आप सभी से शेयर कर रहा हूँ.इस बात को दस साल का अरसा गुजर गया.लेकिन आज भी ये मेरी यादों की डायरी में सहेजा हुआ है.



''आपको ये पोस्ट कैसी लगी ? अपनी राय निचे कमेन्ट बॉक्स में जरुर दें.और अगर आपको मोहब्बत नामा ब्लॉग पसंद आई ,तो आज ही ज्वाइन कर लीजिये ,और इमेल्स के जरिये नई पोस्ट्स प्राप्त कीजिये.

                          ''आमिर दुबई.,,,

ईद मुबारक

ईद मुबारक


सलाम , इन दिनों मै ईद की छुट्टियों पर हूँ.हमारे यहाँ दुबई में आज ईद हो चुकी है.और इंडिया में दो दिन बाद है.एक तरफ माहे रमजान जैसे मुक़द्दस महीने के जाने का गम और दूसरी तरफ ईद जैसे बड़े त्योंहार की आने की ख़ुशी के मिले जुले जज्बात के साथ आज ईद का त्यौंहार मना रहे हैं.फिर परदेस की ईद खुद किसी इम्तहान से कम नही होती.ईद के दिन भी तन्हाई और अकेलापन खाए जा रहा है.दोस्तों की यादें सता रहीं हैं ,काश की उनके साथ होते तो क्या ही बात थी.लेकिन नसीब.सोचा की फ्री बैठे भी क्या करेंगे चलो दोस्तों को इंटरनेट के जरिये ही सही मिस कर लेते हैं.उनसे बात करने के साथ अपना मोहब्बत नामा भी याद आ गया.और इस पोस्ट के साथ आप सभी को भी ईद की शुभकामनायें दे रहा हूँ.रोजाना ऑफिस से इंटरनेट पर ब्लॉग पर आना होता है ,लेकिन आज ईद के दिन और छुट्टियों के साथ एक इंटरनेट कैफे पर आकर पोस्ट कर रहा हूँ.जो की यक़ीनन मेरे लिए एक यादगार रहेगी.जल्द ही इंडिया में भी ईद होगी.और खुशियाँ मनाई जाएँगी.इसलिए आप सभी को पहले से ही मै ईद की मुबारक बाद अर्ज़ कर रहा हूँ.आप सभी को मेरी तरफ से खूब खूब ईद मुबारक.

आपका '' आमिर दुबई.,,,
माहे रमजान मुबारक

माहे रमजान मुबारक


दुबई अरब इमारात में आज गुरूवार को चाँद नज़र आने पर कल से माहे रमजान शुरू हो जायेगा.और मेरे वतने अजीज भारत में शुक्रवार शाम को चाँद नज़र आने पर शनिवार से माहे रमजान शुरू हो जायेगा.'' बेटा इस साल रमजान से पहले इंडिया आ जाना,और माहे रमजान हमारे साथ ही गुजारना.घर वाले सुबहो शाम तुम्हे याद करते हैं.''अम्मी के ये अलफ़ाज़ याद आते ही ,मै रो पड़ा.और गम की वजह ये थी की इस साल भी मै रमजान वतन में नही पा सका.और प्रोफेशनल प्रोब्लम्स की वजह से इंडिया जा नही सका.इस साल भी दुबई में घर वालों से दूर रहकर अकेले माहे रमजान गुजार रहा हूँ.
पवित्र माह के आते ही हर तरफ खुशियों की बहार आ गई है.और इबादत का शौक दिल में बढ़ा.और बचपन के वो दिन नज़र के सामने घुमने लगे जब मै छोटा था.तब हमारे पड़ोस में एक परिवार रहता था.जो की मुस्लिम नही था.लेकिन हर साल माहे रमजान का बहुत अह्तिराम करता था.और उनके परिवार के कई सदस्य माहे रमजान में हमारे घर वालों के साथ रोजे भी रखते थे.कभी कभी सहरी के लिए मै उनको जगाने के लिए जाता.तो कभी वो हमे जगाने के लिए आते.कितना प्रेम होता था उस समय.की लोग मिसालें देते थे.लेकिन आज प्रेम साम्प्रदायिकता की भेंट चढ़ गया.और धर्म के नाम पर अंग्रेजों ने मेरे भारत को बाँट कर रख दिया.किसी एक के गलती करने पर आज उसका इल्जाम पूरी कौम के सर पर थोंप दिया जाता है.भारत जैसे सर्व धर्म देश को तोडना इतना आसान नही था.लेकिन भारत के दुश्मनों ने इन्हें धर्म के नाम पर लड़वाकर खोखला कर दिया.आज हमारी बदकिस्मती है की वही देश के दुश्मनों वाला काम करने वाले लोग भारत में भी पैदा हो गये.और धर्म के नाम पर सियासत शुरू कर दी.कभी अपने मफाद के लिए इफ्तार पार्टी का आयोजन ,तो कभी आरक्षण के नाम पर देश को बाँट कर रख दिया.इलेक्शन के दिनों में धर्म के नाम पर सियासत चमकाने वालों ने कभी ये नही सोचा की इससे देश का कितना नुक्सान हो रहा है.इसी तरह धर्मो में भी कई लोग ऐसे पैदा हो गये जिन्होंने इस काम को आगे बढाया.आज भारत में जो साम्प्रदायिकता है वो इसी का नतीजा है.खैर आज भी कई भारतीय ऐसे भी हैं जो सबका सम्मान करते हैं.आज भी कई लोग ऐसे हैं जो दुसरे धर्मो के होने के बावजूद भी माहे रमजान को पवित्र मानते हैं.पहले मै ये सुनता था की माहे रमजान में गैर मुस्लिम लोग भी बाहर खाने पिने से कतराते थे की कहीं हमारा मुस्लिम भाई ना देख ले.क्यूँ की उसके रोजा रखा हुआ होगा.इस कदर प्रेम होता था मेरे भारत में रहने वाले भारतियों में.लेकिन आज ,हालात सबके सामने हैं.माहे रमजान पवित्र महिना है.इस महीने में मुस्लिम रोजे रखते हैं.और अपने रब की इबादत करते हैं.और पूरे महीने में रोजे रखने के बाद ईद का त्योंहार आता है.और माहे रमजान अपनी यादें देकर चला जाता है.इन दिनों मै भारत को बहुत मिस करता हूँ.जब मै घर में होता था तो अपने अम्मी अब्बू के साथ सहरी करके रोजे रखता था ,और उन्ही के साथ इफ्तार करता था.बहुत सारी यादें और माहे रमजान में अपने वालिदैन के साथ गुजरे वक्त को याद करके ग़मगीन हो जाता हूँ.जिन्दगी की मजबूरियों ने माँ बाप से दूर अकेले रमजान गुजारने की आदत डलवा दी.चाँद दिखा भी नही है पोस्ट लिखने तक ,लेकिन माँ बाप को याद करके और अपने वतने अजीज भारत को याद करके दिल पर गम तारी हो गया.काश की मै भारत में अपने माँ बाप के पास जा सकता.और वहां पर माहे रमजान के रोजे रखता.और उनके साथ इफ्तार करता.माँ तरह तरह के खाने बनाती ,जैसे की मै उनका बेटा नही बल्कि कोई मेहमान बनकर आया हूँ.हर एक के लिए मेरा वहां होना स्पेशल हो जाता था.बच्चे हर वक्त मुझे घेरे रहते ,और भाई जान भाई जान करते मुझे दिन भर परेशान करते रहते.और कभी कभी एक शेर कहते .
''वो क्या गया की महफ़िल से रौनक चली गई ,एक शख्स सारे घर को वीरान कर गया....''.माहे रमजान आने से काफी पहले हर साल मश्गुलियत बढ़ जाती है.और वादे करके भी उनके साथ रमजान बिता नही पाता.इस साल सोचा था की माहे रमजान से पहले अपने वतन लौट कर जाऊंगा.लेकिन ,इस लेकिन ने मुझे इसका मौका ही नही दिया.सिर्फ फोन पर घर वालों को तसल्लियाँ देकर संतुष्ट कर देना,ये जैसे की आदत सी बन गई.खैर अभी यहाँ चाँद दिखने में कुछ ही समय बाकी है.और थोड़ी देर में माहे रमजान का चाँद नज़र आएगा.और कल शुक्रवार से रोजे शुरू हो जायेंगे.आप सभी को आमिर की तरफ से खूब खूब माहे रमजान मुबारक.


''आपको ये पोस्ट कैसी लगी ? अपनी राय निचे कमेन्ट बॉक्स में जरुर दें.और अगर आपको मोहब्बत नामा ब्लॉग पसंद आई ,तो आज ही ज्वाइन कर लीजिये ,और इमेल्स के जरिये नई पोस्ट्स प्राप्त कीजिये.

                          ''आमिर दुबई.,,,


मेरे बारे में

मेरे बारे में


नाम :

वर्तमान लोकेशन :

देश :

ई-मेल पता :
आमिर अली

Dubai

United Arab Emirates

Aamir2692@Gmail.com 


    मुझे मोहब्बत से बहुत मोहब्बत है ,ओर इश्क के नाम से भी इश्क है अपने बारे में सिर्फ इतना ही बताना चाहूँगा की मै एक गरीबुल वतनी हूँ.यानि मै भारतीय होकर भी अपने वतने अज़ीज़ भारत से बहुत दूर दुबई में हूँ.यहाँ एक कम्पनी में मैंनेजर की पोस्ट पर कार्यरत हूँ | लिखने का शौक बचपन ही से रहा है | जब सबने ये मशवरा दिया की अच्छा लिखते हो तो शेयर क्यूँ नही करते ? लेकिन अब भी मुझे नही लगता की मै कोई अच्छा लेखक बन पाया हूँ | बस आदतन लिख लिया करता हूँ | इश्क के बारे में लिखने का जब फैसला लिया पहले ही बहुत कुछ लिखा जा चुका था | मैंने तो सिर्फ ये कोशिश की की उर्दू भाषा में कुछ लिख कर उसे हिंदी में सब तक पहुंचाऊं.और मेरी भाषा उर्दू बोलने में और हिंदी लिखने में दोनों ही रही है, और मै कमेंट्स और टिप्पणी पर यकीं नही रखता | मेरा मानना है, कि कोई कमेंट्स करे या ना करे आप अच्छा लिखते रहें | लोग उसे पढ़ते हैं, यही उनका प्यार है | मै तो इसी पर खुश हूँ की लोग मेरे कलाम को पढ़ते हैं, और पसंद करते हैं | तारीफ़ नही करते तो बुराई भी तो नही करते | आखिर में ''आमिर दुबई ''का आप सब को मरहबा ..पढ़ते रहिये मोहब्बत नामा ....

मेरा नाम आमिर अली है। मै एक भारतीय हूँ, भारत में राजस्थान राज्य का निवासी हूँ। जो की पिछले 7 साल से दुबई अरब अमारात में रहता हूँ। बचपन से ये तमन्ना थी की पत्रकार बनू। लेकिन नसीब में परदेश की आबो हवा थी। सो यहाँ दुबई में आया ,और यहीं का होकर रह गया। यहाँ मै असिस्टेंस इन्जिनीर के रूप में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में कार्य कर रहा हूँ। लेखन कार्य मेरा शौक रहा है। और इसी शौक को पूरा करने हिंदी ब्लॉग जगत में आया। तब से हिंदी ब्लॉग जगत के एक सदस्य के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इंटरनेट के हिंदी ब्लॉग जगत में मेरे 3 प्रमुख हिंदी ब्लॉग हैं। जो की सभी अलग अलग विषय पर हैं। आइये मै आपको उनका परिचय करवाता हूँ।

1. मोहब्बत नामा 

ये मेरा पहला हिंदी ब्लॉग है। जिसमे मेरे द्वारा लिखी गयी कहानियां ,रचनाएँ ,नज्मो -ग़ज़ल ,प्रेम कहानियां ,आर्टिकल्स ,वगैरा हैं। इसमें ज्यादा तर लेख प्यार और मोहब्बत के बारे में हैं। इसके अलावा चुटकुले ,और दुसरे विषयों पर भी काफी लिटरेचर है। जो की सब मेरा अपना लिखा हुआ है। इस ब्लॉग का लिंक इसके नाम के साथ ही है।आप चाहे तो इसे विजिट कर सकते हैं।

2. मास्टर्स टैक टिप्स 

ये मेरे द्वारा निर्मित एक तकनिकी ब्लॉग है। जिसमे कंप्यूटर ,इंटरनेट ,मोबाईल ,से सम्बंधित जानकारियां हैं। इसके अलावा तरह तरह के सोफ्ट्वेयरस ,ऑडियो वीडियो टूल्स ,मोबाईल टूल्स ,ब्लॉग और वेबसाइटस ,वगैरा के बारे में जानकारियां हैं। ब्लॉग टिप्स ,इंटरनेट ट्रिक्स ,कंप्यूटर के बारे में जानकारियां वगैरा और नयी नयी तकनिकी जानकारियां इस ब्लॉग में आपको मिल जाएँगी।इसका लिंक भी इसके नाम के साथ ही है। जिसे आप चाहें तो विजिट कर सकते हैं।

3. इंडियन ब्लोगर्स वर्ल्ड 

ये मेरे द्वारा निर्मित एक सामूहिक ब्लॉग है।जिसका मकसद ब्लॉग सम्बंधित जानकारियां देना ,ब्लोगिंग टिप्स देना ,दुसरे ब्लोगों को प्रमोशन करना ,हिंदी ब्लोग्स का परिचय करवाना ,ब्लॉग सम्बंधित गेजेट्स विजेट्स का ज्ञान नए ब्लोगर्स तक पहुँचाना ,नए नए ब्लोगर्स की मदद करना। इनकी ब्लॉग सम्बंधित समस्याओं को दूर करना , नए ब्लोगर्स को गाइड करना वगैरा है। इसमें आपको कई हिंदी ब्लोग्स के अपडेट्स भी मिलेंगे , आप यहाँ से कई हिंदी ब्लोग्स पर जा सकते हैं। इंडियन ब्लोगर्स वर्ल्ड सभी भारतीय ब्लोगर्स का अपना है। जहाँ ये अपने ब्लॉग का प्रचार प्रसार कर सकते हैं। और साथ ही हर तरह की ब्लॉग सम्बंधित समस्याओं के लिए मदद हासिल कर सकते हैं। इससे हर हिंदी ब्लोगर को जुड़ना चाहिए। इसका लिंक भी इसके नाम के साथ ही है। आप इनमे से किसी भी ब्लॉग के नाम पर क्लिक करके उस ब्लॉग पर जा सकते हैं।

मेरे ब्लॉग जगत में आने का मकसद अपने दिल का हाल लिखना। नयी नयी जानकारियां लोगों तक पहुँचाना। नए नए लोगों की मदद करना। और हिंदी भाषा को इंटरनेट की दुनिया में बढ़ावा देना। नए नए ब्लोगर्स की हर तरह से मदद करना वगैरा रहा है।

आप जब चाहे मुझसे सम्पर्क कर सकते हैं। फिलहाल मै सिर्फ गूगल टॉक पर  Aamir2692  के नाम से हूँ। जहाँ आप मुझसे लिखित बात कर सकते हैं। इसके अलावा आप अगर फोन पर मुझसे बात करना चाहें तो आप अपने मोबाईल नंबर मुझे ईमेल कर दें। मै आपको जरुर कॉल करूँगा। और ब्लॉग सम्बंधित जितनी हो सकेगी मदद करूँगा। मेरा ईमेल एड्रेस आप ऊपर देख सकते हैं।  

                                                आपका दोस्त  ''आमिर दुबई,.... 


ज्यादा जानकारी के लिए निचे दी गई पोस्ट पढ़िए.
                                     
                              ''आज मिलिए आमिर दुबई से ''

                                                                  आमिर दुबई