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Maa ki Dua a Hindi story for mothers day

Maa ki Dua a Hindi story for mothers day

Maa ki Dua
एक बहुत ही मशहूर कहानी है शायद आपने इसे कई बार देखा और पढ़ा होगा.कहते हैं की एक माँ थी और एक उसका बेटा था.माँ ने मेहनत मजदूरी करके अपने बेटे की परवरिश की.दुःख लक्लीफें उठाकर उसे पाला पोसा और बड़ा किया.अब ये नवजवान हो चुका था.एक दिन कहीं से गुजर रहा था तो रास्ते में एक लड़की पर नज़र पड़ी.पहली ही नज़र उसके दिल में घर कर गई ,और उसे उस लड़की से प्यार हो गया.अब वो रोजाना उसी रास्ते से गुजरने लगा.रोजाना आते जाते उसका दीदार करने लगा.इस तरह कई दिन बीत गये.और वो लड़की भी ये महसूस कर चुकी थी की ये नवजवान मेरे लिए ही रोजाना यहाँ से गुजरता है.एक दिन उस नवजवान ने हिम्मत करके उस लड़की से अपने प्यार का इजहार कर दिया.लड़की ने उसकी बात को हलके में लेते हुए कहा की अगर तू मुझसे प्यार करता है तो जो मै मांगूं वो मुझे लाकर दे.उस नवजवान ने कहा की बोल तो क्या चाहती है ? तो लड़की ने जवाब दिया की मुझे तेरी माँ का दिल चाहिए.ये सुनकर एक बार तो वो सन्न रह गया.फिर बोला की ये तो नामुमकिन है.तो वो लड़की बोली की फिर तुझसे प्यार करना भी मेरे लिए ना मुमकिन ही है.इस पर वो लड़का ये कहकर चला गया की मै सोचूंगा.फिर कुछ दिन यूँ ही गुजरते गये.उस नवजवान को उस लड़की की बहुत ज्यादा याद आती.उसकी मोहब्बत उसे बैचेन करती.उसकी याद में उसका जीना दुश्वार होने लगा.पर उसे लड़की की बात याद आती की माँ का दिल चाहिए.आखिर कार उसने इस प्यार के आगे हार मान ली.और अपनी माँ का कत्ल करने का इरादा कर लिया.और कुल्हाड़ी लेकर घर गया और अपनी माँ पर वार किया और उसे मार डाला.फिर चाकू लेकर उसके दिल को काटा ,और हाथ में लेकर दोड़ता हुआ उस लड़की की तरफ गया.इतने में पाऊं को ठोकर लगी और वो गिर पड़ा.उसके हाथ से माँ का दिल भी छुट पड़ा.उसके गिरते ही उस माँ के दिल से आवाज आई की ''ऐ मेरे लाल तुझे कहीं चोट तो नही आई ?'' लेकिन वो उस आवाज की परवाह किये बगैर दोड़ता हुआ उस लड़की के पास पहुंचा.और उसकी तरफ हाथ बढ़ाते हुए बोला की ये लो ये मेरी माँ का दिल है .ये देख कर लड़की एक दम सन्न रह गई.और बोली की ''ऐ नालायक , जिस माँ ने तेरी जिन्दगी भर दुःख तकलीफ उठाकर परवरिश की ,जब तू उसी का ना हुआ तो मेरा क्या हो सकेगा.मुझे अफ़सोस है तुझ पर की तुने एक छोटी सी मोहब्बत के लिए अपनी माँ को ही मार डाला.जा मुझे तुझ जैसे की मोहब्बत नही चाहिए.हो सकता है की कल तू किसी के कहने से मुझे भी मार डाले.उसकी बातें सुनकर वो नवजवान बहुत ज्यादा शर्मिदा हुआ.और अपनी माँ का दिल हाथ में लिए हुए रोता रहा.और कहता रहा की माँ मुझे माफ़ कर दो.मै एक मामूली से प्यार में अँधा हो चुका था.लेकिन माँ बिचारी क्या बोलती.और वो रात भर रोता रहा ,आखिर कार सुबह उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.
इस कहानी में एक नवजवान ने मोहब्बत के लिए अपनी माँ को मारकर उसका दिल निकाल लिया.और आज कल की औलाद अपनी मोहब्बत की खातिर अपने माँ बाप को जीते जी ही मार देती है.कभी घर से भागकर ,तो कभी आत्महत्या करके ,तो कभी नींद की गोलियां खाकर ,तो कभी किसी और तरीके से.इस तरह आज भी अपने माँ बाप की इज्जत की हत्या तो की ही जा रही है.जबकि मोहब्बत तो मोहब्बत का पैगाम देती है.इसमें नफरतें कहाँ से आ गई.मोहब्बत तो दिल जीतने का पैगाम देती है ,पर आज अपने माँ बाप के दिल तोड़कर अपने घरों को आबाद करने की कोशिश की जाती है.जबकि अपने माँ बाप के घर को छोड़कर ,उसको तोड़कर भागे थे ,आज अमन और सुकून की तलाश में मारे मारे फिरते हैं.लेकिन ऐसी औलाद को सुकून कहाँ से मिलेगा.जिन्होंने अपने माँ बाप की जिन्दगी को बेसुकुनी में छोड़ दिया.जब किसी की औलाद घर से भागती है तो सारे घर की इज्जत रोड पर आ जाती है.सारे समाज में उनको बे इज्जती की नज़र से देखा जाता है.जिस वजह से दुसरे बच्चों के रिश्ते करने में बहुत ही ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है.अगर किसी की औलाद आत्महत्या कर ले ,तो उसकी वजह से सारे घर वाले भी जीते जी मर जाते हैं.वो इस तरह से की ,कभी पुलिस की तरफ से होने वाली इन्क्वैरीयां ,कभी लोगों के ताने ,कभी उसकी यादें ,तो कभी कोर्ट कचेहरी के चक्कर ,कुल मिलकर इस वजह से भी बाकी घर वालों के लिए काफी मुश्किल होती है.काश की आज की निव जनरेशन ,नई पीढ़ी इन बातों को समझे ,और अपने माँ बाप की इज्जत की हिफाज़त करे.और जरुरत पड़ने पर अपनी मोहब्बत की क़ुरबानी देकर भी अपने माँ बाप के हक़ को अदा करे.
''मोहब्बत में अक्सर विलेन समझे जाने वाले माँ बाप हकीकत में तो मजलूम होते हैं.बस इनके दर्द को कोई समझ नही पाता.इस बात का अहसास आपको तब होगा जब आप भी किसी के माँ बाप बनोगे.''


कलम : ''आमिर दुबई.,,
प्यार इश्क और मोहब्बत का फलसफा ?

प्यार इश्क और मोहब्बत का फलसफा ?


प्यार इश्क और मोहब्बत का फलसफा ?

दोस्तों आपने अक्सर सुना होगा कि इसको प्यार हो गया है ,उसको इश्क हो गया है ,वगेरा .बल्कि कई तो कहते हें कि मुझे इतनी इतनी बार मोहब्बत हुई है ,तादात भी बताते है कि जिन्दगी में ३ बार प्यार हुआ है वगेरा .

आज मै आपको बताता हु कि इसका फलसफा क्या है .इन्सान को जिन्दगी में प्यार एक ही बार हो सकता है ,बाकि ये बार बार होने वाला प्यार सिर्फ जिस्मानी आकर्षण है ,जिसे प्यार का नाम दे दिया जाता है .इसको आप यु समझिये कि इन्सान किसीके भी साथ कुछ वक्त गुजार लेता है तो जल्द ही उसकी और आकर्षित हो जाता है .अब ये प्यार नही है .कितनी ही बार कितनो के साथ थोडा सा वक्त गुजार लेने से हर बार प्यार हो गया ऐसा नही है .ये सिर्फ आकर्षण है .

Love of Film Actress

Love of Film Actress


                                फ़िल्मी हिरोइन और मोहब्बत :

फिल्मो में हम देखते है की हिरोइन एक गरीब की मोहब्बत में सब कुछ कुर्बान करती नजर आती है ,और अक्सर फिल्मो की स्टोरीज में यही दिखाया जाता है कि हिरोइन किसी गरीब से प्यार करके सारी दुनिया से बगावत करके उससे शादी कर लेती है ,अपनी तमाम अमीर आदतें निकलकर एक गरीब के साथ बिलकुल एक आम सी ओरत बनकर जिन्दगी गुजरने के लिए तैयार हो जाती है ,या फिर एक राजकुमार हीरो किसी गरीब कनीज़ कि मोहब्बत में अपना सब कुछ कुर्बान करके उसे पा लेता है ,ग्रेट है हमारी फिल्मे जिनमे गरीबो को इतनी तरजीह दी जाती है .उनसे मोहब्बत कि तालीम दी जाती है ,उंच नीच कि दीवारों को मिटने का पैगाम दिया जाता है .अमीरी गरीबी से ज्यादा प्यार को महान बताया जाता है ,कभी गरीब हीरो अमीर बनने के लिए किसी अमीर हिरोइन से प्यार कर लेता है ,और हिरोइन भी आसानी से उसकी मोहब्बत को दिलो जान से कबूल कर लेती है ,
Happy New Year 2014

Happy New Year 2014

डियर रीडर्स , आप सभी को मोहब्बत नामा ब्लॉग कि तरफ से नया साल मुबारक। दुआ है कि ये नया साल हम सभी के लिए ढेर सारी खुशियां लेकर आये। इस साल 2013 में इस ब्लॉग पर मै बहुत ही कम पोस्ट्स कर पाया। इसकी वजह लेखन की कमी नही बल्कि ब्लॉगिंग से दिलचस्पी कम होना है ,फिर भी आने वाले नए साल में कोशिश रहेगी कि इस ब्लॉग के लिए भी पोस्ट्स करता रहूँ। आप सभी इसे विजिट करते रहिये ,ये सफ़र नए साल में आगे बढ़ता रहेगा। 

                                                         आमिर अली 
मोहब्बत और शादी

मोहब्बत और शादी

जिससे मोहब्बत की है अगर उसी के साथ जिन्दगी के लम्हात गुजारना नसीब हो जाये तो क्या ही अच्छी बात है। कहते हैं की वर्ना मोहब्बत का गम जिन्दगी भर सताता रहता है। जिन्दगी के तजर्बात तो इस बात को गलत ही साबित करते नज़र आते हैं। शादी एक ऐसी जड़ी बूटी है जो मोहब्बत के सारे जख्म भर देती है। और काफी हद तक जिन्दगी की तन्हाइयों को रोशन कर देती है। मोहब्बत का गम चाहे कितना भी शदीद हो ,एक मात्र शादी की इसका सबसे बेहतरीन और सफल इलाज लगती है।  शादी एक ऐसा पवित्र रिश्ता है जो की दो अंजानो को एक दूसरे के लिए हर मर्ज़ की दवा बना देता है। एक दूसरे का साथ जो की पहले से ही तय होता है ,उस तक पहुँचने के लिए कई कठिन रास्तों को तय करना पड़ता है ,जिनमे से सबसे कठिन रास्ता मोहब्बत है ,जो शादी से पहले किसी और से हो जाती है ,अगर कामियाब होती है तो जिन्दगी खुशनुमा हो जाती है और नाकाम होने पर नाकामी की एक दास्तान बनकर रह जाती है। इसका गम तो लम्बे समय तक रहता है ,लेकिन फिर भी शादी काफी हद तक इसका इलाज साबित होती है। मुझसे किसी ने एक बार कहा था की असल मोहब्बत तो शादी के बाद होती है ,उस समय मुझे इस बात पर कोई खास यकीन नही था ,धीरे धीरे यकीन होने लगा। अचानक ही किसी की एक आहट ने उजाला कर दिया ,कुछ लोग तो जिन्दगी में सूरज बनकर आते हैं ,और सब कुछ रोशन कर देते हैं। जब बिछड़ते हैं तो अँधेरा कर देते हैं। मै इन अहसासों को सलाम करता हूँ। और दुआ करता हूँ की ये साथ हमेशां बना रहे। तुम इसी तरह फूल बनकर मेरे गुलशन को महकाती रहो। 
शादी एक रिश्ता जो की सब कुछ भुला कर एक नयी जिन्दगी दे देता है ,सूने से सूने गुलशन को भी हरा भरा कर देता है। एक एक लम्हा एक यादगार अहसास बनकर रह जाता है। इन अहसासों को सिमटने के लिए जिन्दगी भी कम नज़र आती है। 

                                                  ''आमिर अली दुबई ,,
नाकाम मोहब्बत का फलसफा

नाकाम मोहब्बत का फलसफा


मोहब्बत , जब होती है तो इन्सान सिर्फ कामियाब होने के ही ख्वाब देखता है ,मोहब्बत करने वाले कभी नकारात्मक सोचना भी पसंद नही करते ,लेकिन जब मोहब्बत नाकामी का मुह दिखाती है ,तो इन्सान टूट जाता है। इस गम से उभरने में काफी समय लगता है। लेकिन वक्त की दवा इसके जख्मो का मरहम कर ही देती है। आइये आज मोहब्बत की नाकामी के फलसफे को समझने की कोशिश करते हैं। ताकि मोहब्बत में नाकाम हुए लोगों के लिए कुछ तसल्ली का सामान हो जाये। और कुछ रहनुमाई हो सके। 

मोहब्बत में नाकामी क्यूँ ?
मोहब्बत में नाकामी की बहुत सारी वजह होती हैं , जिनमे धोखा ,ना इत्तिफाकी , या जाती बिरादरी का फर्क ,या धर्मो का फर्क , या रिश्तेदारियां ,वगैरा बहुत सी ऐसी वजह होती हैं ,जिनमे सबसे ज्यादा बड़ी वजह बनती है ''मजबूरी '' , कभी लड़का मजबूर हो जाता है ,और साथ छोड़ देता है ,तो कभी लड़की मजबूर हो जाती है और साथ छोड़ देती है। इसी मज़बूरी को मोहब्बत करने वाले समझ नही पाते ,और इसे बेवफाई का नाम दे दिया जाता है ,और इस तरह मोहब्बत में नाकामी होती है। 

बेवफाई क्या है ?
मोहब्बत में जहाँ बेवफाई का जिक्र काफी ज्यादा किया जाता है , बेवफाई एक का साथ छोड़कर दूसरे का साथ पकड़ लेने का नाम है। जिसे आम भाषा में धोखा भी कह सकते हैं। लेकिन ये काम जान बुझकर तो कोई भी नही करता। इसमें भी कहीं न कहीं कोई मज़बूरी जरुर होती है। लेकिन उस समय इसे मज़बूरी समझना ,ये मोहब्बत करने वालों की अक्ल में नही आता। इसलिए वो जल्द ही इसे बेवफाई का नाम दे देते हैं। और कभी कभी हकीकत में भी कोई कोई बेवफाई कर भी देते हैं। यानी एक से दिल भर गया तो दूसरे का हाथ थाम लेते हैं। लेकिन ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता है। ज्यादातर मज़बूरी के मारे ही होते हैं। जिनका बस चलता नही है। और मज़बूरी के हाथों अपनी मोहब्बत को कुर्बान कर देते हैं। और हमेशां के लिए अपने माथे पर बेवफाई का दाग सजा लेते हैं। लेकिन उन्हें बेवफा कहने वाले अगर उनकी मज़बूरी को समझते तो शायद कभी शिकवा नही करते। लेकीन मोहब्बत का नशा भी ऐसा होता है जो उस समय ये बातें समझने नही देता। लेकिन बाद में धीरे धीरे सब कुछ समझ में आ जाता है। आजकल तो बेवफाई वाकई काफी ज्यादा होती जा रही है। इसलिए की मोहब्बत का सिर्फ नाम बाकि है ,हकीकत में दिल्लगी ही रह गयी है।

दिल्लगी क्या है ?
दिल्लगी ,जिसे आम भाषा में आप टाइम पास करना भी कह सकते हैं। और वो भी मोहब्बत के नाम पर। जब तक दिल लगा दिल को लगा लिया ,और जब दिल भर गया तो दूसरे से दिल लगा लिया। ये हर हफ्ते होने वाली मोहब्बतें हकीकत में मोहब्बत नही बल्कि दिल्लगी है। आज कल तो इस दिल्लगी को यूँ कह सकते हैं की ''हम हैं राही प्यार के हमसे कुछ ना बोलिए ,जो भी बेहतर से बेहतर लगा हम उसी के हो लिए। 
ये एक तरह का खेल है। जिसका अंजाम सिर्फ धोखा है। इसमें जो नादान होता है ,वो धोखा खा लेता है। ज्यादातर दिल्लगी रूपए पैसे के लिए की जाती है। दिल्लगी करने वाले लोग अपने मजे के लिए किसी की जिन्दगी को बर्बाद कर देते हैं। उन्हें इस बात का अहसास तक नही होता। 

नाकामी और नशा 
एक सर्वे के मुताबिक ये बात भी सामने आई की ज्यादातर लोग जो की नशेडी हैं उन्होंने नशा करना शुरू तब किया था जब वो मोहब्बत में नाकाम हो गये थे। यानी कोई भी पैदाइशी नशेड़ी नही होता। कोई ना कोई वजह जरुर रही होती है। और जितनी भी वुजुहात हैं उनमे सबसे बड़ी वजह मोहब्बत में नाकामी ही सामने आती है। शायद ये लोग नशे के जरिये अपनी नाकामी के गम को भुलाने की कोशिश करते हैं। और ये कोशिश इनपर इतनी भारी पड़ती है की ये नशे के आदी बनकर रह जाते हैं। ये बात हमेशां याद रखें की नशा नाकामी का इलाज नही है। बल्कि ये खुद एक बीमारी है। इसलिए मोहब्बत में नाकाम होने वालों ,नशा करके क्यूँ जिन्दगी में नाकाम होना चाहते हो। इसलिए नशे को छोड़कर ,आगे बढ़ने की कोशिश कीजिये। 

मोहब्बत की नाकामी का इलाज 
मोहब्बत की नाकामी का इलाज सिर्फ समय ही है। और कुछ नही। वो एक समय होता है ,जब मोहब्बत की नाकामी आपको तोड़कर रख देती है। और उसके बाद एक समय ऐसा भी आता है ,जब आप उन दिनों को याद करके मुस्कुराते हैं। इन्सान जब मेच्योर हो जाता है ,तो इन सब बातों से उसे काफी राहत मिल जाती है। इसके अलावा जब मोहब्बत में नाकामी का समय आपकी जिन्दगी में आये तो फोरी तौर पर आप इसका इलाज 2 तरीके से कर सकते हैं। या तो फ़ौरन ,जितना जल्दी हो सके शादी कर लें। और अगर ये मुमकिन ना हो तो हवा पानी बदल लें। यानि अपने शहर से दूर किसी और शहर में ,या किसी और देश में चले जाएँ ,हवा पानी बदलने से इस नाकामी में बड़ी राहत मिलती है। ये तजर्बे से लिख रहा हूँ। गम ,टेंशन , ये सब एक ही तरह के हवा पानी से ज्यादा बढ़ते हैं। और हवा पानी बदलने से इसमें बड़ा फायदा होता है। इसी तरह टेंशन का इलाज भी यही है अगर आपको कई दिनों से काफी ज्यादा टेंशन हो रही है ,तो आप कुछ दिनों के लिए कहीं चले जाएँ ,उम्मीद है की आपकी टेंशन काफी हद तक खत्म हो जाएगी। ये भी मेरा पर्सनल तजर्बा है। हवा पानी बदलने से इन्सान रिफ्रेश हो जाता है। कई बार एक ही जगह पर जमे रहने से तरह तरह की टेंशन ,और फिक्रें हो जाती हैं ,हत्ता की दम घुटने लगता है ,इसकी वजह भी वहां का हवा पानी ही है। जब आप किसी दूसरी जगह जाते हैं ,और आप कुछ दिन वहां ठहरते हैं ,तो आपमें कुछ ना कुछ बदलाव जरुर आ जाता है। इसलिए मै अक्सर छुट्टियों में कहीं ना कहीं घुमने फिरने जाता ही रहता हूँ। जब लौटता हूँ तो अपने आप को पहले से फ्रेश महसूस करता हूँ। 

तसल्ली सबसे बेहतरीन इलाज 
मोहब्बत में जब नाकामी हो तो वहां किसी की बात समझ में नही आती ,अक्सर वहां खुद को समझाना पड़ता है। इसके अलावा दोस्तों को भी मदद करनी चाहिए। जब कोई मोहब्बत में नाकाम हो जाये तो तसल्ली ही उसके लिए सबसे बड़ी दवा साबित होती है। जितनी ज्यादा उसे तसल्ली दी जाती है उसी कदर उसका गम हल्का होता रहता है। अक्सर मोहब्बत में नाकाम लोगों को तसल्ली देकर उनका गम हल्का करने वाले बहुत कम होते हैं। क्यूँ की मोहब्बत में नाकामी के बाद सबसे बड़ी बिमारी जो सबसे पहले लगती है वो है तन्हाई। ये तन्हाई धीरे धीरे उसे तबाह करती रहती है। इसलिए ऐसे लोगों को कभी भी तन्हां नही छोड़ना चाहिए। और उन्हें खुद भी तन्हां नही रहना चाहिए। मेरे हिसाब से मोहब्बत में नाकाम लोगों के लिए दोस्त एक जड़ी बूटी का काम कर सकते हैं। अगर अच्छे दोस्त हैं तो वो ही उसे उस गम से छुटकारा दिला सकते हैं। ऐसे में दोस्तों को अपना किरदार अदा करना चाहिए। उसे घुमाने फिराने ले जाएँ , जितना हो सके उसका दिल बहलायें , उसे तसल्ली दें ,हर तरह से कोशिश करें की आपका दोस्त दुबारा अपनी पहले की सी रूटीन में आ जाये। है थोडा मुश्किल लेकिन ना मुमकिन नही है। बशर्ते आप उसके सच्चे दोस्त हैं। 

नाकामी और खुदकशी 
मोहब्बत में नाकाम लोग कई बार खुदकशी करने की भी कोशिश करते हैं। इसकी कई वजह हैं ,एक वजह तो मोहब्बत में नाकामी के बाद उन्हें जिन्दगी उजड़ी उजड़ी सी लगती है। और ऐसा लगता है की अब उसके जिन्दा रहने का कोई मकसद नही। दूसरा तन्हाई , जो उसकी बीमारी को बढ़ा देती है। यानि वो तन्हाई में अक्सर गलत सोचता है, और ऐसे असबाब बन जाते हैं जो उसे खुदकशी की तरफ ले जाते हैं। और तीसरी वजह है हिम्मत हार जाना। हम अक्सर रहते हैं की हिम्मत कभी नही हारना चाहिए ,लेकिन जब ऐसा मौका आता है तो हम ज्ञान को अलमारी में रख कर हिम्मत हार जाते हैं। खुदकशी भी इसका इलाज तो नही है। खुदकशी एक बुझदिली जरुर है। आपको जिन्दगी इसलिए नही मिली की आप उसे खत्म कर दें। मोहब्बत ना भी मिली लेकिन आपको जीने का हक़ तो मिला हुआ ही है। जब ऐसा मौका आये तो खुद को रोकें ,सिर्फ आप ही नाकाम नही हैं ,इस दुनिया में हर कामियाब नाकामी की सीढ़ी पर चढ़कर ही कामियाब हुआ है। इसलिए आपका भी अच्छा समय जरुर आएगा। अमर वो नही जो मोहब्बत में अपनी जान दे दे ,बल्कि अमर तो वो है जो मोहब्बत का दर्द अपने सीने में लिए जिन्दगी गुजार दे। बहादुरी तो ये है की हर हाल में सब्र करे। और अपनी नाकामी को लेकर बैठ जाने के बजाय ,उसे भुला कर आगे बढ़ने की कोशिश करे। आज आप नाकाम हैं ,अगर आप हिम्मत रखेंगे ,हौंसला रखेंगे ,आगे बढ़ने की जद्दो जहद करेंगे तो एक दिन कमियाबी आपके कदम चूमेगी। आज के लिए इतना ही। 

आइन्दा कुछ और फलसफों को समझने की कोशिश करते रहेंगे। अगर आपको ये आर्टिकल पसंद आये तो ही अपनी राय रखें, अन्यथा पढ़कर चले जाएँ ,आपका दिलचस्पी से पढना ,मेरे लिए सबसे बड़ा कमेन्ट है। बाकि मै झूठी तारीफों पर यकीं नही रखता। 

                                             आपका  ''आमिर अली दुबई ''
दोस्ती के कुछ और फलसफे

दोस्ती के कुछ और फलसफे

कभी कमेंट्स कभी ईमेल्स 
दोस्ती का फलसफा , अचानक ही दोस्ती के विषय पर क्या कुछ लिख डाला ,इसका अंदाज़ा उस समय नही हुआ। जब से ये पोस्ट की है तभी से कभी कमेंट्स कभी ईमेल्स ,का सिलसिला चलता रहा। जिनमे ईमेल्स ज्यादा मिले। मुझे लिखते समय इतना अंदाज़ा नही था की इस विषय पर इस आर्टिकल को इतना पसंद किया जायेगा। और साथ ही कई लोगों ने मै और मेरे दोस्त के विषय पर जल्द पोस्ट लिखने का आग्रह किया। समय की कमी ,और पाठकों की फरमाइशें, और एक तरफ मश्गुलियत ,एक दो दिन में मै कुछ दिनों के लिए सफ़र पर जा रहा हूँ। इसलिए ब्लोगिंग संभव नही रहेगी। अगली पोस्ट शायद आज से 20 दिन बाद ही कर सकूंगा। दोस्ती का फलसफा ये मोहब्बत नामा की वो पहली पोस्ट है जिसे मेरी लिखी दूसरी पोस्ट्स के मुकाबले में ज्यादा पसंद किया गया। और इसके लिए सबसे ज्यादा ईमेल्स मिले। कुल मिलाकर ये भी एक यादगार पोस्ट बन गयी। 
एक और खुश खबरी 
वो ये की 26 फरवरी को मेरा जन्म दिन है। और इस दिन खास मै अपने माता पिता के साथ ही गुजारना पसंद करता हूँ। लेकिन इस साल शायद इस दिन मुमकिन नही। चलो आप सभी के साथ ही सही। इस साल दुबई में ही हूँ। 

दोस्ती की नजाकत 
दोस्ती एक नाजुक शीशी की तरह भी है ,और एक फौलाद की तरह भी है। अगर बहकावे में आकर दोस्ती टूटती है तो शीशी की तरह है ,और हर हाल में वफा होती रहे और लाख तूफ़ान आयें पर दोस्ती में दरार ना आये तो दोस्ती फौलाद की तरह है। 

सोशल मिडिया पर दोस्ती 
सोशल मिडिया पर बहुत ही कम ऐसा होता है की कोई अच्छा और सच्चा दोस्त मिले। ज्यादातर मफाद परस्त ही मिलते हैं। जो अपने फायदे के लिए सिर्फ यूज करते हैं। आसानी से इन पर भरोसा करना भी मुश्किल होता है। हाँ कभी कभी कोई अच्छे दोस्त भी मिल ही जाते हैं। मुझे इस पर वो किस्सा याद आ गया जो मैंने रक्षा बंधन पर पोस्ट किया था। की एक लड़की गूगल पर भाई तलाश करने निकली और भाई मिला भी ,और वो भी ऐसा की जो उसकी खातिर अपना सब कुछ कुर्बान कर दे। लेकिन ऐसा बहुत ही कम होता है। 

दोस्ती और ना इत्तिफाकी 
ना इत्तिफाकी यानि किसी बात पर एक का सहमत होना और दुसरे का नही होना। ये भी आम बात है। ये तो शौहर बीवी के बीच भी होता है ,माँ बाप और औलाद के बीच भी हो जाता है। तो अगर दोस्ती में हो जाये तो कौन सी नयी बात है। दोस्ती होती है सोच के मिलने से। लेकिन हर बात में आपकी हर सोच मिले ये ना मुमकिन है। ना इत्तिफाकी होना आम सी बात है ,और इसी ना इत्तिफाकी पर दोस्ती तोडना ,ये बुरी बात है। हो सकता है की आपको दोस्त की एक बात पसंद ना आये तो और कई बातें पसंद भी तो आती ही हैं। लिहाज़ा अगर किसी बात पर ना इत्तिफाकी हो भी जाये तो दोस्ती पर इसकी आंच नही आने देना चाहिए। ये सब चलता रहता है। 

दोस्ती और मतलब परस्ती 
मतलब परस्ती यानि अपना काम निकालना। ये बहुत ही बुरी बात होती है। की दोस्तों से अपना काम निकालना ,और जब उन्हें आपकी जरुरत पड़े ,तो भाग खड़े होना। ऐसा करने वालों से दूर रहने में ही भलाई होती है। क्यूँ की ये आदत ऐसी है जो बरक़रार रहती है। आज उसने ऐसा किया है ,कल फिर ऐसा कर सकता है। इससे उसकी वफा का अंदाज़ा हो जाता है। दोस्ती की राह में भी कई ठोकरें खानी पड़ती है तब जाकर सही दोस्त जिन्दगी में आते हैं। और ये ठोकरें भी बहुत कुछ सीखा जाती हैं। जब किसी के साथ इस तरह की मतलब परस्ती बार बार होती है तो उसका दोस्ती से भी भरोसा उठ जाता है। हालाँकि अच्छे लोगों की दुनिया में कमी भी नही है। सारे गलत तो नही होते। लेकिन कई मतलब परस्त लोग जब तक पैसा है दोस्ती है ,पैसा ख़त्म उसके बाद पूछते भी नही ,यही लोग दोस्ती के नाम पर दुश्मनी करते हैं। 

दोस्ती और रुपये 
जब तक दोस्ती के बीच में माल दौलत ना आये तब तक सही है। जब ये आ जाते हैं ,तो अक्सर दोस्तों में पाई जाने वाली मोहब्बत को साथ ले जाते हैं। ये अक्सर देखा भाला है। अगर ऐसी मज़बूरी आ भी जाये की दोस्तों से रूपए वगैरा की मदद लेनी पड़े ,तो उसे समय पर लौटाना भी जरुरी है। ताकि आपकी दोस्ती बरक़रार रहे। वर्ना इस तरह कर्ज लेकर टालमटोल करना ,या खा जाना ,अक्सर दोस्ती के साथ भरोसे को भी तबाह कर देता है। इन्सान एक बार किसी के व्यवहार को देखता है, उसी पर उसका भरोसा कायम होता है। ज्यादातर दोस्तियाँ मालो दौलत की वजह से ही टूटती हैं। जिनमे दोस्ती के साथ भरोसा भी टूटता है। इसलिए कभी भी दोस्ती के बीच माल दौलत को लाने से बचना चाहिए। जब तक की सख्त मज़बूरी ना आ पड़े।

सच्चे दोस्त की पहचान 
''अगर जीने की ख्वाहिश है ,तो कुछ पहचान पैदा कर,'' इस शेअर की तरह ,इन्सान को इन्सान की पहचान का हुनर आना जरुरी है। मेरे ख्याल से ये हुनर भी ठोकर खाने से ही मिलता है। बाकी वफा ही एक पहचान है ,की दोस्त कितना वफादार है। वैसे मुसीबत के समय भी अच्छे अच्छों की पहचान हो जाया करती है। मुसीबत के समय साथ दे वही सच्चा दोस्त होता है। क्यूँ की खुशियों में तो हर कोई शरीक होता है ,गम में और मुश्किल की घडी में साथ देने वाले हमेशां याद रहते हैं। इसलिए दोस्तों को चाहिए की अपने दोस्त को मुश्किल की घडी में अकेला ना छोड़ें। 

दोस्ती और अमीरी गरीबी 
कई बार ऐसा होता है की एक दोस्त अमीर होता है ,और कुछ गरीब होते हैं। ऐसे में बहुत ज्यादा एहतियात करने की जरुरत पड़ती है। ऐसे समय में बराबर के हकदार रहें। अगर दोस्त तोहफा दे ,तो आप भी उसको तोहफा पेश करें। अगर वो खर्चा करे तो आप भी खर्चा करें। किसी में मामले में उससे पीछे ना रहें। बस हमेशां अपनी हैसियत का ख़याल जरुर रखें। सिर्फ वही तोहफे कबूल करें ,जो आपकी हैसियत के अन्दर हैं। बाकि उसे समझा बुझा कर इनकार भी किया जा सकता है। लेकिन ये ख्याल रहे की उसे बूरा भी ना लगे। इसकी मिसाल आप यूँ समझिये की एक बार एक अमीर दोस्त ने अपने गरीब दोस्त को एक सोने की चैन का तोहफा पेश किया ,गरीब समझदार था ,और अपनी हैसियत जानता था ,उसने बड़ी समझदारी से कहा की ये क्या ,आपका तोहफा तो बड़ा अच्छा है लेकिन अगर आप मुझे मेरी पसंद का तोहफा देते तो मुझे ज्यादा ख़ुशी होती। उसने कहा आप बताएं आपको क्या पसंद है। तो उस गरीब दोस्त ने एक 50 रूपए की घड़ी पसंद की। और कहा की देना है तो ये दो, तो उसने ख़ुशी ख़ुशी उसे ये खरीद कर दे दी। इस तरह उसने वही तोहफा लिया जो उसकी हैसियत के अन्दर था। इसी तरह खर्च करते समय भी यही ख्याल रखा जा सकता है। ऐसा और इतना ही खर्च कबूल किया जाये जिसे आप भी कर सकें। इस तरह आपकी अमीरी गरीबी के बावजूद भी दोस्ती हमेशां सलामत रहेगी। इसमें भी कई लोग मतलब परस्त जरुर मिल जाते हैं ,जो दोस्ती करते ही इसलिए हैं की वो पैसे वाला है। खूब खर्च करेगा। ऐसे लोगों को अपने करीब भी ना आने दें। अमीरी गरीबी की दोस्ती में एक वाजेह पहचान है सच्चे दोस्त की और वो ये की वो कभी भी अपनी हैसियत से बाहर नही निकलेगा। यही इस बात की दलील होती है की ये सच्चा दोस्त है। 

आजकल की दोस्तियाँ 
आज कल तो दोस्त कपड़ों की तरह बदले जाते हैं। इसकी वजह ये है की इनमे वफा नही होती। ना दोस्ती करने वाले में और ना ही दोस्तों में। इसलिए ऐसी दोस्तियाँ ज्यादा समय तक चलती नही है। वर्ना आपने कई लोग ऐसे भी देखे होंगे जो बरसों से ,और कई कई तो बचपन से दोस्त हैं। और आज तक दोस्ती और मोहब्बत कायम है। इसकी वजह है इन दोनों में वफा है। आजकल तो सही मायनो में सच्चे दोस्त तलाश करना बहुत मुश्किल काम है। लेकिन ना मुमकिन नही। 

वफादार दोस्त 
कई जगह मैंने वफा का जिक्र किया। ये भी जान लीजिये की दोस्तों में वफा क्या है। वो ये है की अपने दोस्त की हर बात को अपने दिल में ही रखना। कभी भी किसी से भी ना कहना। और अपने दोस्त को ख़ुशी और गम में भी कभी तन्हाँ ना छोड़ना। चाहे लाख तूफ़ान आ जाएँ ,कितनी भी ना इत्तिफकियाँ हो जाएँ इनकी दोस्ती में कुछ फर्क ना आये। और इनको चाहे कोई कितना भी बहका दे ,इनकी दोस्ती ना टूटे, और ये एक दूसरे के लिए कुछ भी करने के तैयार हों। ये है दोस्ती में वफा। 

दोस्ती और धर्म 
कई बार दो अलग अलग धर्मो के लोगों में दोस्ती हो जाती है। ऐसे में इस बात का ख़ास ख्याल रखना चाहिए की अपने दोस्त के धर्म के बारे में कभी भी उससे बात ही ना करे। क्यूँ की बात होगी तो इख्तिलाफ होगा। और ना ही अपने दोस्त के धर्म के बारे में कुछ लिखें ,ना मजाक करें,ना ही इस पर कोई बहस करें। दो धर्मो के लोगों में सबसे ज्यादा दोस्ती में दरार इन्ही कारणों से पड़ती है। इन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। भारत में अक्सर इस तरह की दोस्तियाँ होना मुमकीन रहता है। इसमें सबसे ज्यादा धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखना जरुरी होता है। कोई ऐसी बात ना करें जिससे उसकी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचे। और ना ही इस मामले में किसी के बहकावे में आयें। आजकल धर्म के नाम पर बांटने की बड़ी सियासतें हो रही हैं। ऐसे में ऐसे दोस्तों को ख्याल रखना चाहिए की कोई चिंगारी इनकी दोस्ती को ना जला दे। 

दोस्ती और खुश अख्लाकी 
आपने अक्सर देखा होगा की दोस्तों में कोई ऐसा भी होता है जो सबसे ज्यादा और सबका चाहिता होता है। इस तरह का वो होता है जिसके अख़लाक़ सबसे अच्छे हैं। कई लोग ऐसे होते हैं ,जिनसे एक बार कोई मिल ले तो उसे दोस्त बना लेता है। ये एक केटेगिरी है। ये एक कुदरती इनाम है। हर एक में नही मिलता। ऐसे लोग बड़े जिन्दा दिल होते हैं। वफा में ,और हर हर मामले में सबसे आगे रहते हैं। और ऐसे लोगों के आसपास दोस्तों का अधिक घेरा होता है। मिलनसारी इनकी आदत ,हमेशां चहरे में मुस्कराहट ,सभी का सम्मान करने वाले ,सभी के दुःख सुख में काम आने वाले ,ये खुश अख़लाक़ लोग होते हैं। ऐसे लोगों के आस पास दोस्तों की कमी भी नही होती। इनके साथ लोगों के दिल लग जाया करते हैं। दोस्त अपने गम भूल जाया करते हैं। इसलिए ये दोस्तों में सबके चहिते बन जाते हैं। इसके बिलकुल उलट अमीर दोस्तों के आस पास भी दोस्तों की भीड़ होती है ,और चाहने वालों की अच्छी खासी तादात भी, फर्क इतना है की अच्छे अख़लाक़ वालों के पास जब कुछ नही भी होता ,तब भी अकेले नही होते। और अमीर दोस्त के पास जब कुछ नही होता तो सब उसका साथ भी छोड़ जाते हैं। अक्सर ये खर्च करने वाले और चमचों से घिरे रहने वाले अकेले और तन्हां रह जाया करते हैं।

डियर रीडर्स , ये सब मेरा अपना लिखा हुआ है ,किसी किताब वगैरा से नही लिखा। इसलिए गलती होने के भी चांस हैं। अगर गलती पायें तो मुझे इत्तिला कर दें। और साथ ही माफ़ भी कर दें। एक बार फिर से शुक्रिया ,दोस्ती के फलसफे को पसंद करने के लिए।

आर्टिकल लम्बा हो गया इसलिए आज के लिए बस इतना ही। बाकी दोस्ती का ये फलसफा आइन्दा भी समझेंगे। ताकि हमे सही दोस्तों की पहचान मिले। और अपने दोस्तों की मोहब्बत पैदा हो। क्यूँ की मोहब्बत नामा तो है ही मोहब्बत का समंदर। पढने वाले सभी दोस्तों और पाठकों को मेरा सलाम ,और ढेर सारा प्यार। अगली पोस्ट 20 दिन बाद ही होगी। तब तक के लिए अलवदा। 

                                                  ''आमिर अली दुबई,,,,
दोस्ती का फलसफा

दोस्ती का फलसफा


डियर रीडर्स ,
आज कुछ टूटे फूटे अल्फाज़ में दोस्ती का फलसफा लिखता हूँ। 
दोस्ती एक बहुत ही अज़ीम शय है। जिन्दगी में सब कुछ मिल जाता है मगर अच्छे और सच्चे दोस्त बहुत ही कम मिलते हैं। दोस्त उस हस्ती का नाम है जो अपने दोस्त पर सब कुछ कुर्बान करने का जज्बा रखते हैं। और खुशियों में खुशियाँ बांटने और गमो के बोझ को हल्का करने में इन्ही दोस्तों का किरदार हमेशां काम आता है। दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो जिन्दगी भर साथ रहता है। अगर दोस्त वफादार है तो वो कभी भी तन्हां नही छोड़ता। इस रिश्ते की मिठास इतनी है की चाहे आप दूर रहें या नज़दीक ,ये हमेशां आपको याद रहता है। जब तक की कोई ख़ुशी इनमे ना बांटी ,उसका मजा नही ,और जब तक कोई गम इनमे शेयर नही किया उसका इलाज़ नही। 

1.दोस्ती का परिचय 
दोस्ती एक मुक़द्दस रिश्ते का नाम है। जब दो लोग एक जैसे खयालात के मिलते हैं तो अक्सर उनमे दोस्ती हो जाया करती है। दोस्ती करने की कम ही जरुरत पड़ती है अक्सर दोस्ती हो जाया करती है। हर इन्सान के दिल में ये बात होती है की कोई ऐसा हो जिसे वो अपनी खुशियाँ बाँट सके। जिसे अपने गमो का फसाना सुना सके। जो उसे तसल्ली दे ,उसका हौंसला बनाये रखे। जो दुःख सुख में उसके काम आये। जो उसे समझ सके। जब ऐसा कोई मिल जाता है जो इसकी उम्मीदों पर खरा उतरता है ,तो उसी से एक रिश्ता जुड़ जाता है ,जिसे दोस्ती कहते हैं। दोस्त हमेशां एक दुसरे का सम्मान करते हैं। एक दुसरे की भावनाओं को समझते हैं। 

2.दोस्ती के उसूल 
दोस्ती के भी कई उसूल हैं जिन्हें सच्चे दोस्त समझते भी हैं और उसे निभाते भी हैं। दोस्ती में एक दुसरे की हलकी बात पर पर्दा डालना दोस्तों का खास्सा होता है। एक दुसरे के ऐब को छुपाना ,एक दुसरे के काम आना ,एक दुसरे से वफ़ा करना। एक दुसरे की पसंद पर अपनी पसंद को कुर्बान करना ये जज्बा दोस्तों में ही मिला करता है। दोस्त अक्सर एक दुसरे की कमजोरियों से वाकिफ होते हैं। ऐसे में सच्चा दोस्त वही होता है जो अपने दोस्त की कमजोरियों को छुपाये। 
लेकिन ऐसा बहुत ही कम होता है ,इसकी वजह ये है की हम खुद सच्चे दोस्त नही बन सके इसलिए हमे सच्चे दोस्त नही मिल सके। 

3.दोस्ती में ना इत्तिफकियाँ 
जब दोस्त कच्चे कान के होते हैं तो उनमे अक्सर ना इत्तिफकियाँ आम होती हैं। यानि दोस्त के खिलाफ किसी की बात सुनकर उसे मान लेते हैं। हालाँकि दोस्ती का एक उसूल भरोसा भी है। दोस्त पर हमे इतना भरोसा होना चाहिए की उसके बारे में हमे विश्वास हो की वो हमारे खिलाफ बात नही कर सकता। और दोस्त को भी चाहिए की किसी और के आगे अपने दोस्त की कमजोरियां बयान ना करे। अक्सर दोस्तियाँ इसी वजह से टूट जाती हैं की एक दुसरे पर सही मायनो में भरोसा नही होता। और जल्द ही लोगों की बातों में आ जाते हैं। 

4. दोस्तों की कद्र ना करना।
अक्सर ये शिकायत भी आम है की दोस्त हमारी कद्र नही करते। इसका जवाब ये है की अगर आप अपने दोस्तों की कद्र करेंगे तो वो भी आपकी कद्र करने वाले बन जायेंगे। ताली दोनों हाथों से ही बजती है। जब एक वफा नही करता तो दुसरे से उसे इस तरह की उम्मीद नही रखनी चाहिए। खुद बा वफा दोस्त बन जाएँ ,फिर देखें आपके दोस्त आपके लिए कितना कुछ कर सकते हैं। दोस्तों को एक दुसरे से प्यार होना चाहिए वो भी ऐसा की अपने दोस्त के खिलाफ सुनने से कान बहरे हों ,और उसकी बुराई देखने से आँखें अंधी हो। दोस्त की कोई भी बात किसी से भी शेयर नही करनी चाहिए। 

टाइम की कमी की वजह से फिलहाल इतना ही ,बाकि दोस्ती के कुछ और फलसफे आइन्दा पोस्ट करूँगा। 
आइन्दा पोस्ट में आपको दोस्ती के कुछ और करीबी मामलात के बारे में ,कुछ और उसूलों के बारे में बताऊंगा। और इसके साथ ही ''मै और मेरे दोस्त'' इस पर भी कुछ अर्ज करूँगा। ताकि आपको इस बात का भी अंदाज़ा हो की दोस्ती पर लिखने वालों की दोस्तियों का आलम क्या होता है। तब तक इन्तजार।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
                                                    
                                                             ''आमिर अली दुबई।,,,

क्या ब्लोगिंग को सीरियसली लेना चाहिए ?

क्या ब्लोगिंग को सीरियसली लेना चाहिए ?


दोस्तों कई दिनों से मै इस कशमकश में उलझा रहा की क्या ब्लोगिंग को सीरियसली लेना चाहिए? कई लोग ब्लॉग लिखते हैं ज्ञान फ़ैलाने के लिए। तो कुछ लोग ब्लॉग लिखते हैं हिंदी को बढ़ावा देने के लिए। और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो शोहरत हासिल करने के लिए भी ब्लॉग लिखते हैं। और कुछ अपना फन्ने शायरी ,नज्म ,ग़ज़ल ,को लोगों तक पहुँचाने के लिए भी ब्लॉग लिखते हैं। तो कुछ आम लोग ख़ास बनने की चाह में ब्लॉग लिखते हैं। और अपना टाइम पास करने के लिए ब्लॉग लिखते हैं। और कुछ मेरे जैसे भी हैं जो सिर्फ अपना शौक पूरा करने के लिए ब्लॉग लिखते हैं।

 ब्लोगिंग करने से पहले भी मै लिखता था ,कभी अपने लिए तो कभी किसी के लिए। और मेरे दोस्त मेरे लेखन को काफी दिलचस्पी से पढ़ते थे। उनमे से कई लोगों ने मुझसे एक बात कही थी जो आज भी मुझे याद है। मुझसे कहा था की आमिर आपकी लेखनी ऐसी है जो की आपको बहुत जल्द मशहूर करने की ताकत रखती है। ऐसे कई कमेंट्स और ईमेल भी मिले जिन्होंने भी यही बात फिर से दोहराई मेरे ब्लॉग दुनिया में आने के बाद। किसी ने कहा था की आपकी लेखन शैली किसी बड़े ब्लोगर की तरह है। तो किसी ने कहा था की आपकी लेखन शैली जल्द ही अपनी तरफ आकर्षित करने वाली होती है।

 खैर। मै शुरू से ही एक आम आदमी बनकर रहना चाहता था,जैसा की आज भी हूँ। मशहूर होने की तमन्ना और ख्वाहिश को मैंने कभी भी अपने दिल में जगह ना दी। मुझे लोकप्रियता से काफी ज्यादा एलर्जी रही। इसलिए मै कभी भी तस्वीर के साथ इंटरनेट की दुनिया में नही आया। और ना ही मैंने किसी शोशल नेटवर्क पर अपनी कोई तस्वीर शेयर की। क्यूँ की ब्लोगिंग सिर्फ मेरा शौक है ,जो किसी दिन ख़त्म भी हो सकता है। शायद उस दिन से मै ब्लोगिंग ही छोड़ दूँ। फिर मेरे बतौरे ब्लोगर लोकप्रिय होना मेरे क्या काम आएगा। दूसरा ये की आमिर नाम से तो लाखों लोग हैं जो की ब्लोगिंग कर ही रहे होंगे। उन्ही गुमनामो में से मै भी किसी एक की तरह होकर रह जाऊं तो ये भी अच्छा है। शोहरत या लोकप्रियता मुझे काफी बुरी चीज़ मालुम होती है। किसी के लिए ये बहुत अच्छी भी होती है। कोई इसके लिए पता नही क्या क्या कर गुजरता होगा। लेकिन मेरे नज़दीक इसकी कोई अहमियत नही है। और मुझे इससे काफी ज्यादा नफरत भी रही है। 

अब क्यूँ की लेखन शैली ,जिसके बारे में लोगों ने पहले ही काफी कुछ मुझे कहा है, इसको तो मै बदल नही सकता था। इसलिए मैंने इसी लेखन शैली के साथ सिर्फ अपने नाम के साथ ही ब्लोगिंग शुरू की। ताकि पहचान बने भी तो सिर्फ आमिर के नाम की। जब मुझे किसी ने देखा ही नही होगा तो उसे कल के दिन मेरे ब्लॉग दुनिया से चले जाने का ज्यादा दुःख या गम भी नही होगा। इसके अलावा और भी कई वजह रही हैं जिनकी वजह से भी मेरा सामने आकर लिखना काफी मुश्किल है। किसी की रुसवाई का भी डर रहता है। क्यूँ की दुनिया में कई ऐसे भी तो लोग हैं ही जो मुझे शक्लो सूरत से जानते हैं। अगर वो मुझे देख कर मेरी लेखनी को पढेंगे तो शायद जिस शोहरत से मै भागता फिरता हूँ वही मुझे आकर पकड़ लेगी। ब्लोगिंग कोई सीरियसली काम नही है। मेरी नज़र में ये सिर्फ एक शौक ही है। जो समय के साथ एक दिन ख़त्म हो जायेगा। ना ही ये कोई नशा है। जिसे ना करें तो रह ना सकें। ना ही मै इसे कोई आदत समझता हूँ ,जिसे छोड़ा ना जा सके। मेरे लिए इसे छोड़ना आज भी उतना ही आसान है जितना की पहले था। ये और बात है की मेरा शौक अभी बाकी है। इसलिए इस बात का वादा तो मै नही कर सकता की हमेशां लिखता रहूँगा। क्या पता आने वाले कल की शाम कहाँ होगी। शायद कभी इस शौक से मेरा दिल भर जाये। उस दिन मै दुनिया में रहते हुए भी ब्लॉग जगत में ना रहूँ।

 इसलिए मै उन सभी से माफ़ी चाहता हूँ जिन्होंने प्रोफाइल के साथ तस्वीर शेयर करने की फरमाइश की। आप मुझे सिर्फ मेरे नाम से ही जाने ताकि कल आपको मेरे नाम को भुलाना आसान रहे। इसलिए प्लीज कोई भी इस तरह की फरमाइश ना करे जिससे मै असहज हो जाऊं। तस्वीर शेयर करने पर मै काफी असहज हूँ। क्यूँ की मेरी लेखनी आपके सामने है। और मै शोहरत या लोकप्रियता से दूर रहने वाला एक आम आदमी हूँ। जो आम बनकर ही रहना चाहता हूँ। और आम रहकर ही जुदा होना चाहता हूँ। जो तस्वीर शेयर करते हैं गलत वो भी नही हैं। वो अपनी जगह सही हैं और मै अपनी जगह। ये काम इतना जरुरी भी नही है ,की मेरे तस्वीर शेयर करने या ना करने से किसी को कोई फर्क पड़े। मेरे कलम को लोग बगैर मुझे देखे भी काफी दिलचस्पी से पढ़ते ही हैं।और बगैर देखे भी मुझसे मोहब्बत भी करते ही हैं। मेरी जगह अगर झरना बहता देख रहे हैं,और इससे ही वो मेरी शख्सियत का अंदाज़ा लगा सकते हैं,तो ये भी मेरे लिए सम्मान ही है। इसलिए इस झरने को मेरे नाम के साथ बहने दें। 

अब उन वो जिन्होंने मिलने की ख्वाहिश का भी इज़हार किया था। ,उनसे मै सिर्फ इतना ही कहूँगा की अगर कभी इंडिया आना हुआ और ये शौक बाकी रह गया तो मै आपकी इस ख्वाहिश को पूरा करने की कोशिश करूँगा। आप लोगों ने मुझे इतना प्यार दिया यही मेरे लिए काफी है। मै इन्ही लम्हात को संजो रहा हूँ। ताकि कभी ब्लॉग जगत की याद आएगी तो इन लम्हात में चला जाऊंगा। फिलहाल मै ब्लॉग जगत में हूँ। लेकिन एक दिन नही रहूँगा ये बात तय है। इसलिए ब्लोगिंग को कभी भी सीरियसली नही लेना चाहिए। इसे शौक की हद तक ही रखा जाये। ताकि शौक ख़त्म हो तो तकलीफ ना हो। हँसते हँसते ही अपने शौक को पूरा करके बिछड़ जाएँ। इससे बड़ी क्या बात होगी। मै अपने शौक को पूरा करने के साथ साथ इतना सारा ज्ञान इंटरनेट के हिंदी ब्लॉग जगत में छोड़ कर जाना चाहता हूँ जिससे नए लोगों की खूब खूब रहनुमाई होती रहे। उन्हें अपनी भाषा में ही काफी सारा ज्ञान मिलता रहे। इसी बहाने ही सही वो एक अनजान आमिर को दुआ तो देकर जायेंगे।
माँ की दुआ

माँ की दुआ


१० साल का बच्चा जब अपने महल्ले से गुजरता तो मोहल्ले में रहने वाली एक औरत उसे बड़े ही प्यार भरे अंदाज़ में देखती.कई महीने इस तरह गुजरते रहे.लेकिन बच्चा ये बात समझ नही पाया.वो औरत अकेली थी.और विधवा भी थी.उस बच्चे को देखते ही उसका दिल धड़कने लगता.लेकिन बेचारी डर के मारे ज्यादा देर तक उसे ना देख पाती.इधर बच्चे के माँ बाप थे.जो कभी कभी उसके साथ बुरा सुलूक करते.उसे डांट डपट भी कर देते.वो बच्चा घर से निकल कर अकेला जाकर कहीं बैठ जाता.उसे देख कर वो औरत समझ जाती.और उसे अपने हाथों से खाना खिलाती.लेकिन जुबान से कुछ ना कहती.और ना ही वो बच्चा कभी उससे बात करता.वो औरत उस बच्चे से काफी ज्यादा प्यार करती थी.एक दिन उस बच्चे की माँ ने उसे उस औरत के साथ बैठा देख लिया.और गुस्से से अपने बच्चे को झिड़का ,और बोली की आइन्दा कभी भी उस औरत के पास नज़र आया तो तेरी टांगें तोड़ दूंगी.लेकिन वो बच्चा प्यार का भूखा था.

धीरे धीरे उस बच्चे के दिल में भी उस औरत के लिए काफी मोहब्बत हो गयी.उसने उस औरत से पूछा की आप मुझसे इतना प्यार क्यूँ करती हैं.लेकिन औरत ने यही जवाब दिया की तुम मेरे बच्चे के जैसे दिखते हो.जो की मर चुका था.लड़का चोरी चोरी उस औरत से मिलने जाता.और उसकी सेवा भी करता.लेकिन उसकी माँ को ये बात बिलकुल पसंद ना थी.उसकी माँ ने उसके पिता से उसकी शिकायत की.इस पर पिता ने भी उसे काफी डांटा.लेकिन वो लड़का फिर भी छुप छुप कर उस औरत से मिलता.इस तरह समय गुजरता रहा.और वो औरत भी बूढी होती गयी.और लड़का अब जवान हो चुका था.उसे किसी लड़की से मोहब्बत हो चुकी थी.उसने बहुत कोशिश की लेकिन अपने माँ बाप को समझा नही पाया.उसने अपना दुःख दर्द अपनी उसी बूढी अम्मा को सुनाया.तो वो बोली की इसमें कोई बुरे नही है.लेकिन तेरे माँ बाप क्यूँ नही मान रहे.ये तो मुझे भी नही मालुम.उस लड़के को वैसे भी अपने माँ बाप से ज्यादा प्यार नही मिला था.इसलिए वो भी उनसे कोई ख़ास मोहब्बत नही करता था.बात बात पर वो इसे झाड देते.लेकिन ये कोई जवाब नही देता.इसके माँ बाप ने जबरदस्ती इसकी शादी कहीं और तय कर दी.जिससे इसे काफी झटका लगा.और इसने ये फैसला कर लिया की मै अपनी मोहब्बत को पाकर ही रहूँगा.फिर उसने उस लड़की से जिससे वो मोहब्बत करता था ,शादी कर ली.और उसे घर ले आया.वो माँ बाप जो पहले ही इस पर भड़के हुए थे ,इसकी इस हरकत से और भी ज्यादा नाराज़ हुए.और उन्होंने कहा की ये सब उस औरत का किया धरा है.ये लड़का उस औरत से हाथों बिगड़ गया है.उसने ही इसे खराब कर दिया है.

अगर हमारा खून होता तो ऐसी हरकत कभी नही करता.ये सुनकर लड़के के पाऊं के निचे से जमीन सरक गयी.उसने अपने माँ बाप से पूछा की क्या ये बात सही है की मै आपकी औलाद नही हूँ.इस पर उसके पिता ने कहा की हाँ ,तू हमारी औलाद नही है.आज से कई साल पहले एक गाडी का स्टेशन के पास एक्सीडेंट हुआ था.जिसमे तेरे माँ बाप मर गये थे.और तू अकेला जिन्दा बच गया था.उस समय हम तुझे रहम करके उठा लाये थे.और हमने तुझे पाला.ये सुनकर लड़का काफी ग़मगीन हो गया.और वो घर छोड़ कर चला गया.उसकी माँ ने उसे रोकने की कोशिश जरुर की ,लेकिन वो नही रुका.कई दिन तो इसी तरह गुज़र गये.लेकिन उसका दिल चैन नही पा रहा था.उसने इस सदमे की वजह से उस औरत के पास जाना भी छोड़ दिया.एक दिन वो स्टेशन के पास गया.और जाकर देखा की वहां एक बूढ़ा कूली है.उसने उससे उस हादसे के बारे में पूछना शुरू किया.तो उस कूली ने बताया ,की हाँ आज से कई साल पहले यहाँ एक हादसा हुआ तो था.जिसमे सिर्फ एक आदमी मरा था ,जो गाडी चला रहा था.औरत और उसका बच्चा बच गये थे.तो उस लड़के ने पूछा की उनका क्या हुआ.तो कूली बोला की उस गाडी में जो औरत थी ,वो मरी नही थी बेहोश हुई थी.और उसका बच्चा जिन्दा बच गया था ,लेकिन लोगों ने उस औरत को मरी समझ कर उसका बच्चा किसी और के हाथो दे दिया.उन्होंने ही उस बच्चे की पवारिश की.उसने पूछा की उस औरत का क्या हुआ.तो कूली बोला ,की वो अभी भी जिन्दा है.और उसने जगह बताते हुए कहा की वो वहां पर रहती है.

ये सुनकर लड़का चौंका ,क्यूँ की कूली ने उसी औरत का पता बताया था जो उसे अपना बेटा समझती थी.फिर लड़का सीधा उसी औरत के पास गया,और उसे ये कहानी बताने लगा.तो वो औरत रोते हुए बोली की मुझे तो ये सब पता था.लेकिन मै तुझे बताने से डरती थी.मै एक गरीब औरत अगर तेरे लिए दावा कर भी देती ,तो कौन मानता.लोग मुझे झूठी करार देकर इस महल्ले से ही निकाल देते.और मै तेरी जुदाई सह नही सकती थी.और दूसरी वजह ये थी की अगर मै तेरे लिए दावा करती तो तेरी वो माँ जिसने तुझे पाला ,वो तेरी जुदाई सहन नही कर पाती.मै तो तेरी जुदाई सहन कर ही रही थी.लेकिन उस माँ का क्या होता.यही सब बातें सोच कर मै चुप रही.और सहन करती रही.वो चाहे तेरे साथ कैसा भी सुलूक करे ,लेकिन मैंने तो तुझे जन्म दिया है.इसलिए मै तेरे लिए हर समय जागती रहती.और तेरा इतना ख़याल रखती थी.बेटा ,एक माँ की ममता क्या होती है उसे मै ही समझ सकती हूँ.इसलिए मैंने उस माँ के लिए तुझसे दूर रहना भी गवारा कर लिया.लड़का बोला की माँ मुझे तो बचपन से ही यही लगता था की आपका मुझसे कोई बहुत बड़ा रिश्ता है.जब भी जिन्दगी में कभी दुखी होता था ,तो आपको मै अपने पास ही पाता था.और जब भी मुझे घर से निकाला गया ,तो तुमने ही मुझे सहारा दिया.आज भी जब मेरे माँ बाप ने जिन्होंने मेरी परवरिश की ,उन्होंने मुझे ठुकरा दिया ,और मुझे आज भी तेरे आँचल में ही जगह मिली.माँ आप बहुत महान हैं.अपना सब कुछ कुर्बान करके पूरी जिन्दगी गुजार दी.और उसके लिए ये सब कुर्बान कर दिया जो हमेशा आप से नफरत ही करती रही.इस तरह बातें करते हुए ये माँ बेटे आपस में मिले.इतने में किसी से जोर जोर से रोने की आवाजें सुनाई दीं.

लड़के ने देखा तो उसकी वो माँ जिसने उसकी परवरिश की थी ,बाहर दरवाजे के पास खड़ी रो रही थी.वो अन्दर आई.और उस औरत के कदमो में गिर पड़ी.और बोली की मुझे माफ़ कर दो बहन.मुझसे बहुत बड़ी गलती हुई.लेकिन प्लीज मेरे बच्चे को मुझसे जुदा मत करो.मै इसी लिए इस पर ज्यादती करती थी ताकि ये आपसे दूर रहे ,कोई मेरे बच्चे को मुझसे छीन ना ले.मै इसके बगैर नही जी सकती.वो बूढी औरत बोली की ये कल भी तुम्हारा बेटा था ,और आज भी तुम्हारा ही बेटा है.मुझ बुढिया का क्या है ,सारी जिन्दगी तो गुजर गयी.जिन्दगी की कितनी साँसे बची हैं ये नही जानती. जो जिन्दगी बची है इसे देख देख कर ही गुजार दूंगी.लड़का अपनी दोनों माओं के जज्बात को देख देख कर रो रहा था.इतने में उसके पिता भी आ गये.और उन्होंने बताया की मैंने जब से तुम्हारा दिल दुख कर तुम्हे घर से निकाला है तब से तुम्हारी माँ ने कुछ भी नही खाया.और तुम्हे ही तलाश करती फिर रही है.आज उस लड़के तो पता चला की उसकी माँ उससे कितना प्यार करती थी.इतने में उस बूढी औरत ने दुआ के लिए हाथ उठा दिए.और बोली की ऐ मेरे मालिक ,आज तूने मेरी हर दुआ को कबूल कर लिया है.बस अब कोई तमन्ना बाकी नही है.मुझे इस दुनिया से और कुछ नही चाहिए.मुझे वापस बुला ले.इन शब्दों के साथ ही वो औरत दुनिया से चल बसी.माँ की दुआ भी कितनी मकबूल होती है.मांगी ,और कबूल हो गयी.सब कुछ छोड़ कर वो बूढी औरत चली गयी.इसी लिए तो कहते हैं ना की माँ से ज्यादा महान कौन हो सकता है.


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                                                                 ''आमिर दुबई.,,,

ऐ मोहब्बत  तेरे अहसासों को सलाम.

ऐ मोहब्बत तेरे अहसासों को सलाम.


ऐ मोहब्बत ,जब तू नज़रों से होकर दिल में उतरती थी.सारी सारी रात जगाया करती थी.दिल में एक अजीब सी कैफियत पैदा कर देती थी.खाली कापियों में ढेर सारे ख़त लिखवाती थी.कभी कभी अपने महबूब का सामना करवाकर शर्माना सिखाती थी.किसी की याद को दिल में बसाकर तनहाइयों में रुलाती थी.जुदाई के लम्बे सफ़र को यादों के रास्ते से जल्द तय करवाती थी.तब तू कितनी हसीन थी.जब तू दिल में एक अजीब सी जलन पैदा करके मुझे तडपाती थी.तो कुछ ना आने के बाद भी मुझे बहुत कुछ लिखवाती थी.ढेरों ख़त लिखवाकर भी उन्हें फाड़ने पर मजबूर करती थी.तो कभी हर घडी यादों में मुझको जिलाती थी.ऐ मोहब्बत तब तू कितनी हसीन थी.

जब तू मुझे दोस्तों के बीच से उठाकर तनहाइयों में ले जाया करती थी.एक मीठा मीठा सा दर्द मेरे दिल में हर वक्त जगाती थी.कभी कभी मेरे लाख शर्माने के बाद भी तू मुझे एस टी डी ले जाकर महबूब से फोन पर बात करवाती थी.तो कभी मुझे अपने महबूब का चोरी चोरी दीदार करवाती थी.तो कभी जान बुझकर मुझे उन्ही रास्तों पर ले जाती थी , जहाँ उनका गुजर था.ऐ मोहब्बत तब तू कितनी हसीन थी.कभी उलटे सीधे शेयर लिखवाकर मुझे जबरदस्ती का शायर बनाती थी.तो कभी मुझे तरह तरह के डिजाइन वाले कपडे पहनाकर खामा खां हीरो बनाती थी.तो कभी दोस्तों में अपने महबूब के तज़किरे करवाकर मेरे दिल को सुकून पहुंचाती थी.ऐ मोहब्बत तब तू कितनी हसीन थी.मुझे याद है एक बार जब तूने मेरे महबूब का दीदार कराया था.जब उसने मुझे देखा था ,उसके इस देखने की अदा ने मुझे रात भर जगाया था.ये सोचकर की ''उसने मुझे देखा ''मै सो ही ना सका था.ऐ मोहब्बत जब तूने मुझे उसकी एक तस्वीर लाकर दी थी ,जिसे मै सुबहो शाम देखा करता था ,ऐ मोहब्बत तब तू कितनी हसीन थी.

मै तो सादी सी शक्ल वाला एक नौजवान था.जिसे किसी ने एक नज़र देख कर ही खुबसूरत बना दिया था.ऐ मोहब्बत जब तू हर वक्त मुझे सताती थी.मुझे बेचैन करके ,तनहाइयों में ले जाती थी.ऐ मोहब्बत जब तू मुझे मीठे मीठे सपने दिखाती थी.जो भले ही सच ना हुए.लेकिन उनका अहसास आज भी मेरे दिल में है.ऐ मोहब्बत जब तू मुझे अकेले में लता रफी के प्यार भरे गीत सुनाती थी.ऐ मोहब्बत तब तू कितनी हसीन थी.ऐ मोहब्बत जब तू मुझे हसीन वादियों में तनहा ले जाती थी.तो कभी समंदर के साहिल पर घंटों बिठाये रखती थी.तो कभी तू मुझे एक लम्बे इन्तजार में संभाले रखती थी.तो कभी मुझे यश चोपड़ा के रोमेंस की फिल्मे दिखाकर तसल्ली देती थी.तो कभी उसे सेलेरिटा बनाकर मुझे राज बना देती थी.तो कभी मुझे राधे बनाकर उसे निर्ज़ला बना देती थी.ऐ मोहब्बत तब तू कितनी हसीन थी.ऐ मोहब्बत ,जब तू मुझे कभी रात रात भर जगाती थी ,तो कभी मुझे मीठी नींद सुलाती थी.तेरा अहसास आज भी दिल में लिए मै जिन्दा हूँ.

लेकिन आज तेरा अंदाज़ क्यूँ बदल गया.आज तू फोन पर बात कराती है.तो कभी इंटरनेट पर वीडियो चैट करवाती है.तो कभी आसानी से मिलवा भी देती है.तो कभी ब्रेकअप के नाम पर जुदा भी कर देती है.पहले तू जिन्दगी भर का अहसास बनकर रहती थी.लेकिन आज तू चंद घंटे की टेंशन बनकर रहती है.जिसे भुला दिया जाता है.आज तेरे अहसास में जीने वाले बहुत कम रह गये हैं.और जो रोजाना एक नई मोहब्बत करते हैं.उन्होंने तेरा मतलब ही शायद नही समझा.ऐ मोहब्बत तेरा नाम कभी मोहब्बत था ,आज के आशिकों ने तेरा नाम सिर्फ दिल्लगी कर दिया.पहले तू जिन्दगी में एक बार होती थी.लेकिन अफ़सोस आज तेरे नाम पर दिल्लगी हर हफ्ते होने लगी है.ऐ मोहब्बत कभी लोग तेरी सच्ची कसमे खाया करते थे,और आज सबसे ज्यादा झूठी कसमे भी तेरे ही नाम पर खाया करते हैं.समाज की इस नयी पीढ़ी ने तेरा नक्षा ही बदल डाला.

कभी तेरी शुरुआत नज़रें मिलने से होकर ,खतों तक जाती थी,और अंत शादी पर होता था.और आज तेरी शुरुआत मिलने से होती है,जो साथ रहने तक चलती है,और अंत ब्रेकअप पर हो जाता है.आज भी तेरे मानने वाले हैं इसी लिए तेरा नाम बाकी है.जिस दिन तेरे चाहने वाले ख़त्म हो जायेंगे ,तो लोग तेरा नाम भी बदल डालेंगे.ऐ मोहब्बत तब तू बहुत हसीन थी ,लेकिन आज तेरे हुस्न को नज़र लग गयी है.आज तू खरीदो फरोख्त की चीज़ बना दी गयी है.और सरे आम लोग तुझे खरीद और बेच रहे हैं.फर्क बस इतना है ,की पहले तू बिकाऊ नही थी.और आज तेरे नाम पर तुझे बेचा जा रहा है.तेरे नाम का नक्षा ही लोगों ने बदल डाला.आज तुझे तलाश करने वाले बड़ी ही मुश्किल से तलाश कर पाते हैं.आज भी तेरा वजूद तो है ,लेकिन सिर्फ सच्चे आशिकों के दिलों में.बाकी जगह पर तू नही है ,बल्कि तेरे नाम पर कोई और ही है ,जिसने तुझे बदनाम कर दिया.ऐ मोहब्बत कल भी तू हसीन थी और आज भी बहुत हसीन है,कल तुझे समझने वाले ज्यादा थे ,आज बहुत कम हैं.आने वाला दौर तेरे लिए कैसा होगा ये तो रब ही जाने.लेकिन हालात कुछ अच्छे नही दिखते.
ऐ मोहब्बत तेरे उन अहसासों को आमिर का सलाम.

                                                                 आमिर दुबई.
एक रात का सफ़र

एक रात का सफ़र


गमे मोहब्बत बड़ी जालिम होती है.13 जुलाई को आज से कई साल पहले ये खबर फोन पर मिली की आज उसकी निकाह है ,जो कभी आमिर की थी.बे साख्ता आँखों से अश्क रवां हो गये.और अल्फाज़ फिल नज्म कुछ यूँ तरतीब पाए.अरब के सहरा में अपनी तन्हाईयाँ अपने साथ हालात पर अश्क बहा रही थी.और दिल जज़्बात को तसल्ली दे रहा था.रात के अँधेरे में जब कोई इन हालात को देखने वाला नही था.लोग चैन की नींद सोये हुए थे.और उसकी आँखों के सामने गुज़रे हुए लम्हात एक एक कर दुबारा नज़र आ रहे थे.उस रात का दर्द इस कदर था ,की लगता था की कभी सुबहो होगी ही नही.जिसकी एक सिसकी से सब घर वालों की नींद उड़ जाया करती थी.इस  बेकसी और बेबसी की रात परदेस में वो तनहा बैठा अपनी किस्मत पर अश्क बहा रहा था.कोई उसे तसल्ली देने वाला भी नही था.परिंदे उसके आस पास आ आकर उसकी बेबसी को देख रहे थे.और उसके हालात पर रो रहे थे.लेकिन वो बे जुबान कर भी क्या सकते थे.

बस वो अपनी खामोश जुबान से यही कह रहे थे की परदेसी सिर्फ तू ही नही.हम भी तेरे वतन से आये हैं.दुनिया में सिर्फ तू ही गम का मारा नही ,गम और भी हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा.और वो उन परिंदों को देख देख कर कह रहा था की काश ,मै भी तुम्हारी तरह उड़ सकता.तो अपने महबूब की गलियों में जाकर गिर पड़ता.और वहीँ दम तोड़ जाता.लेकिन न वो बेजुबान उसका दर्द समझ सकते थे.और ना ही वो उन बे जुबानो की जुबान को समझ पाता.वो काफी देर तनहा बैठा समंदर की लहरों को देख रहा था ,की शायद ये मुझे भी डुबो दे तो अच्छा है.लेकिन लहरें उससे कह रहीं थीं की मुसाफिर ,अभी तेरा वक्त नही आया.आज तू डूबने की तमन्ना करता है.लेकिन तेरे नसीब में कई डूबतों को निकालना लिखा है.एक दिन तेरा ये गम और ये दर्द नाक रात तेरे लिए एक सपना होगा.जिस दर्द में तू आज आंसू बहा रहा है एक दिन इसी को याद करके मुस्कुराएगा.एक दिन तुझे इस मर्जे मोहब्बत से जरूर शिफा मिलेगी.और तू मोहब्बत में चोट खाए लोगों के लिए मरहम का सामान करेगा.

कहने को तो वो अकेला और तनहा था.लेकिन ऐसा लग रहा था की जैसे सारी मखलूक उसे गम से निकालने की कोशिश में थी.कैसी दर्द नाक रात थी किसी के लिए.और किसी के लिए वो जिन्दगी की सबसे हसीं रात थी.कोई अपनी मोहब्बत के गम में अश्क बहा रहा था.तो कोई अपने महबूब से मिलने की ख़ुशी में शर्म से लाल थी.उस गरिबुल वतनी का कोई पुरसाने हाल ना था.और उसका हौंसला इस कदर पस्त हो चुका था की उससे सब्र भी नही हो पा रहा था.२१ साल की कमसिन उम्र में हाय ये कैसा गम इसको लग गया था.जिसने एक नवजवान का जीना दूभर कर दिया था.जिसने अभी जिन्दगी की बहारें भी ना देखी थीं.और इस कम उम्री में मोहब्बत का दर्द सीने में लिए एक दर्द नाक रात अश्क बहाते हुए गुजार रहा था.इस बे सुकूनी के आलम में जिसने कभी सिगरेट को हाथ तक नही लगाया था,कई कई सिगरेट्स वो पी चुका था.लेकिन सुकून सिगरेट में कहाँ था ,जो उस बेबस को मिलता.एक तो वो घर बार और वतन से दूर रहने की सजा पहले ही काट रहा था.उपर से गमे मोहब्बत ने उसके दिल को टुकड़े टुकड़े करके रख दिया था.

ऐसा लगता था की जैसे ये रात उसकी जिन्दगी की आखिरी रात हो.लेकिन उसका सफ़र अभी काफी बाकि था. क्या रात थी जो ढलने का नाम ही नही ले रही थी.रोते रोते आँखें ही लाल हो चुकी थीं.कौन उसके जज़्बात का अंदाज़ा कर सकता था.उसके अपने भी उस वक्त गहरी नींद में सोये हुए थे.उसके गम का और उसकी तन्हाई का अंदाज़ा कौन लगा सकता था.कभी पुराने खतों को देखता तो कभी अपने महबूब की निशानियों को देख देख कर अपने गम को हल्का करने की कोशिश करता.शायद ये रात कुछ ज्यादा ही तवील हो चुकी थी.ऐसा लग रहा था की जैसे किसी ने बड़ी मेहनत से कोई आशियाना बनाया था ,और बनने के साथ ही वो टूट गया हो.और उसका मालिक उसके पास बैठकर अश्क बहा रहा हो.उसकी कैफियत भी कुछ ऐसी ही थी.बचपन से जिस मोहब्बत को दिल में लिए लिए घूमता रहा.आज वो सरे बाज़ार नीलाम हो चुकी थी.उसे कोई और खरीद कर ले जा चुका था.तसव्वुर में अपनी मोहब्बत को दुल्हन बनी देख रहा था.और सोच रहा था की ये दुल्हन के रूप में कितनी हसीन लगती है.काश की ये मेरे लिए दुल्हन बनी होती.लेकिन उसके नन्हे से दिल को क्या पता था की होनी कुछ और ही थी.लेकिन वो तो बस इन्ही खयालात में खोया हुआ था.तो कभी अपनी बेबसी पर आंसू बहाने बैठ जाता.शायद मोहब्बत का गम इसे ही ज्यादा था.दिल तो इस बात का यकीन करने के लिए भी तैयार नही था ,की आज सब कुछ पराया हो चुका था.ऐसा लगता था की शायद वो कोई बुरा सपना ही देख रहा था.जिसे ख़तम होने की उम्मीद भी बाकी थी.और ये भी यकीन था की ये सपना ही है ,और सपने कहाँ सच्चे होते हैं.लेकिन उसे मालूम था की ये हकीकत थी.तभी तो उसे खून के आंसू रुला रही थी.अजीब रात थी की एक ही रात जिन्दगी के कई साल के मोहब्बत के लम्हात को दिखा गयी.और फिर भी बाकी ही थी.गोया की इस रात में जिन्दगी सिमट कर सामने आ गयी थी.और उनके साथ गुजरे एक एक लम्हे दुबारा दिखा रही थी.ठंडी हवाएं चल रही थीं.और गहरी रात ,दूर दूर तक अँधेरा ,और चाँद की रौशनी में समंदर की शौर मचाती लहरें.और अरब के समंदर के साहिल पर तनहा बैठा एक गरिबुल वतनी नवजवान.ऐसा माहौल जिसमे अक्सर लोग अकेले आते हुए भी डरते हैं.और एक ये था की अपने आप में खोया हुआ घंटों तक बैठा था.

दूर दूर तक कोई इन्सान का नमो निशान तक नही.चरिन्दो परिंदे आस पास मंडरा रहे थे.और इस अजीब ओ गरीब को देख रहे थे.और आपस में बात कर रहे थे.की ये कौन है ,इस पर कौन सी मुसीबत आन पड़ी जो ये इस रात का तनहा मुसाफिर बैठा है.इसका भी घर बार होगा,माँ बाप होंगे.घर वाले होंगे.उनमे से एक परिंदे ने कहा की ये कोई परदेसी है.अरब का तो नही लगता.दुसरे ने कहा की तुम्हे क्या मालुम.तो वो परिंदा बोला की देख नही रहे हो ये कितनी देर से समंदर के साहिल की रेत पर अपनी भाषा में अपने महबूब का नाम लिख रहा है.तो कभी समंदर की लहरों के थपेड़े किनारे तक आते,तो उसके चहरे पर थोडा सा पानी डालकर उसके आंसू भी पोंछ जाते.लेकिन उसके अश्क थे की रुकने का नाम ही नही ले रहे थे.क्यूँ की ये जानता था की जो इसका था वो हमेशा के लिए अब पराया हो चुका था.जो अब कभी इसको नही मिल सकता.कभी भी नही.शायद आमना सामना ही ना हो.इस तरह अश्क बहाते बहाते जाने कब नींद की आगोश में चला गया.सुबह को जब आँख खुली तो देखा की रात अब गुजर चुकी है.और एक नई सुबहो उसकी जिन्दगी में हो चुकी है.अपने आप को समंदर के किनारे पर अकेला पाकर ,हैरान हो गया.लेकिन रात वाला माजरा याद आया तो समझ गया की रात यहीं पर गुजरी है.सुबह को वही परिंदे उसे घूर घूर कर देख रहे थे और कह रहे थे की मुसाफिर ,उठ और चल अपनी मंजिल की तरफ.अभी तेरा सफ़र बहुत बाकी है.जहाँ में और भी गम हैं मोहब्बत के सिवा.


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                                                        ''आमिर दुबई.,,,

आप भी अपना ब्लॉग बना सकते हैं

आप भी अपना ब्लॉग बना सकते हैं


दोस्तों  मै पहले कई बार आर्टिकल्स ,नगमे ,वगैरा लिखता था.जो की मेरे दोस्तों को बहुत पसंद आते थे.मैंने कई विषयों पर बहुत कुछ लिखा.एक बार एक दोस्त ने मुझे राय दी की यार आप इतना अच्छा लिखते हैं तो शेयर क्यूँ नही करते.तो मैंने उनसे पूछा की कैसे ? वो बोले की गूगल ने ब्लोगर नाम से एक मंच बनाया है.जहाँ पर फ्री ब्लॉग बनाये जा सकते हैं.वहां अपना फ्री ब्लॉग बनाइये.उसमे कोई खर्चा नही है.मैंने उनसे पूछा की कैसे बनाएं.उन्होंने मुझे कुछ ब्लोग्स वगैरा बताये.जिनमे से कंप्यूटर दुनिया नामक ब्लॉग से प्रेरित होकर मैंने भी अपना ब्लॉग बनाने की ठानी.लेकिन नया नया था.क्या कैसे करना है,इसका कुछ भी पता नही था.लेकिन इंटरनेट की दुनिया से ऐसे दोस्त मिले जिन्होंने इस काम में मेरी काफी मदद की.मैने ब्लॉग तो जैसे तैसे बना लिया.बाकि मै इसमें पोस्ट्स करता रहा.शुरू में ये सिलसिला चलता रहा.लेकिन इतनी नाकामी मिली की मै मायूस हो गया.और मैंने ब्लॉग को बंद कर दिया.कुछ समय बाद ''टिप्स हिंदी में''ब्लॉग पर जाना हुआ.वहां से बहुत कुछ सिखने के बाद दुबारा ब्लॉग पर काम शुरू किया.मोहब्बत नामा जिसे मै बंद कर चुका था.इसे दुबारा शुरू किया.
इसकी सजावट हमारे एक ब्लोगर गुरु विनीत नागपाल ने कर दी.जो की ''टिप्स हिंदी में''ब्लॉग के ब्लोगर हैं.ब्लॉग की सजावट होने के बाद मैंने दुबारा इस पर पोस्ट्स करनी शुरू की.फिर धीरे धीरे सीखते सीखते आज मोहब्बत नामा आपके सामने है.मोहब्बत नामा के लिए मयंक भारद्वाज ,और विनीत नागपाल ने मेरा जो साथ दिया उसे मै कभी नही भूल सकता.आज मोहब्बत नामा इन दोनों की वजह से ही है.वरना मै तो कबका मायूस हो चुका था.ब्लोगिंग के इस सफ़र में कई लोग मिलते रहे.और ब्लोगिंग सीखते सीखते आज मै काफी हद तक जानकारी हासिल कर चुका.तकनिकी ब्लोग्स पढ़ पढ़ कर मेरी दिलचस्पी ज्यादा तकनिकी ब्लोग्स में ही रही.फिर मैंने मास्टर्स टेक के नाम से एक तकनिकी ब्लॉग शुरू किया.ताकि मै भी जो कुछ मुझे जानकारियां हैं उन्हें लोगों तक पहुंचा सकूं.आज भी मेरी ज्यादा दिलचस्पी मास्टर्स टेक में ही है.उसमे मैंने अपनी जानकारियों के मुताबिक कई पोस्ट्स भेजीं.जिनसे कई लोगों ने फायदे भी उठाये.उसके तो प्रसंशा इमेल मुझे आज भी मिलते रहते हैं.इन दोनों ब्लोग्स पर मैंने कई विषयों पर लिखा ,और बहुत कुछ लिखा.और ब्लोगर्स के लिए भी बहुत कुछ अपने तजुर्बात की रौशनी में लिखता रहा.आज भी मै ब्लोगर्स के लिए टिप्स बड़ी दिलचस्पी से लिखता हूँ.क्यूँ की इससे कई नए ब्लोगर्स की दुआएं मिलती हैं.नयी प्रतिभाओं को रास्ता मिलता है.इसलिए मास्टर्स टेक मेरा सबसे ज्यादा पसंदीदा ब्लॉग बना.इसे मैंने अपनी मेहनत से अपने तजर्बात से बनाया है.और नयी प्रतिभाओं के लिए इसमें बहुत कुछ है.
लेकिन अब मै ये खवाहिश रखता था की ब्लोगिंग जिसमे मैंने इतने पापड़ बेले,इसमें कुछ आसानी होनी चाहिए.ताकि नए ब्लोगर्स के लिए कुछ सहूलत हो.जो लोग अच्छा लिखते हैं.या बहुत सारी जानकारियां रखते हैं.और उन्हें शेयर करना चाहते हैं.दुनिया तक अपनी भावनाएं ,अपने जज्बात पहुँचाना चाहते हैं.अपना ज्ञान पहुँचाने की खवाहिश रखते हैं.उनके लिए ब्लोगिंग सिखने का कोई आसान तरीका होना चाहिए.मेने अपनी इस ख्वाहिश का इजहार ''ऑनलाइन एज्युकेशन ब्लॉग ''के ब्लोगर इमरान अली से किया.उन्होंने इस पर काम शुरू किया.और एक विडियो पोस्ट तैयार की.''Learn Bloging in Urdu-Hindi ''इस पोस्ट के जरिये उन्होंने ब्लोगिंग का विडियो टोटोरियल तलाश करके पोस्ट कर दिया.और मुझे बताया की आमिर भाई मैंने ब्लोगिंग सिखाने वाले वीडियोज पोस्ट्स कर दिए हैं.तो मुझे बेहद ख़ुशी हुई.मैंने इस पोस्ट पर जाकर उन वीडियोज को देखा.और जैसा मै चाहता था ,वैसा ही विडियो टोटोरियल उन्होंने पोस्ट कर दिया.आपमें से जो भी अच्छा लिखते हैं.और अपना खुद का ब्लॉग बनाने की ख्वाहिश रखते हैं.वो इस पोस्ट को पढ़ लें.और इन वीडियोज को देख कर ब्लोगिंग सीख लें.और फिर अपना ब्लॉग बना सकते हैं.और उसमे पोस्ट्स के जरिये अपने दिल की बात सभी के साथ शेयर कर सकते हैं.इसके अलावा मैंने भी नए ब्लोगर्स के लिए कुछ हिंदी पोस्ट्स के लिंक जमा किये.ताकि उन्हें पढ़कर एक नया ब्लोगर अपनी ब्लॉग को बेहतर से बेहतर बना सके.आज मै अपनी इस पोस्ट के जरिये उन नए लोगों के लिए जो अपना खुद का ब्लॉग बनाना चाहते हैं ,बहुत सारा लिटरेचर लेकर आया हूँ.जिसकी मदद से आप अपना ब्लॉग खुद बना भी सकेंगे और उसे तैयार भी कर सकेंगे.साथ ही उसे बेहतर भी बना सकेंगे.अगर आप ब्लोगिंग की दुनिया में आना चाहते हैं तो सबसे पहले आमिर आपका स्वागत करता है.किसी भी प्रकार की ब्लॉग मदद के लिए आप मुझे इमेल कर सकते हैं.मै आपकी हर संभव मदद के लिए हर वक्त तैयार हूँ.क्यूँ की जो ख़ुशी दूसरों की मदद करके मिलती है उसकी बात ही कुछ और है.ऐसी ही ख़ुशी उन ब्लोगर्स को भी मिली होगी जिन्होंने शुरू में मेरी मदद की थी.
आज मै ये महसूस कर रहा हूँ की नयी प्रतिभाओं को भी एक मौका मिलना चाहिए.ताकि वो भी कुछ कर सकें.उनकी भी हर संभव मदद की जानी चाहिए.मैंने एक दो नए ब्लोगर्स को ब्लोगिंग के लिए एक मौका दिया.तो उन्होंने तो कमाल ही कर दिया.ऐसी ऐसी जानकारियां शेयर कीं कि मै भी देखता ही रह गया.जिनकी खुद मुझे भी बहुत जरुरत थी.तो किसी ने वीडियो एज्युकेशन के जरिये लोगों का दिल जीत लिया.
इसलिए मुझे लगता है कि ऐसे नए लोगों को भी ब्लोगिंग में आना चाहिए.आपकी हमारी हिंदी दुनिया को बहुत जरुरत है.आप हिंदी में अपने ब्लोग्स बनाएं.और अपनी प्रतिभा को दुनिया तक पहुंचाएं.आपके जरिये कई लोगों का भला होगा.लोग आपको बहुत दुआएं देंगे.सबसे हसीन जिन्दगी उसी कि है जो दूसरों के लिए जीते हैं.आप इतना कुछ लिख कर इंटरनेट पर छोड़ जाएँ कि आने वाली नस्लें भी आपको याद करें.और आपके बाद भी आपकी पोस्ट्स से लोग फायदे उठाते रहें.आइये आप भी ब्लोगिंग के मैदान में.और अपना हुनर और टेलेंट से खूब खूब लोगों को पहुंचाइए.
अब मै आपको उन हिंदी पोस्ट्स के लिंक दे रहा हूँ जहाँ से आप ब्लोगिंग के बारे में काफी कुछ सीख सकेंगे.और पूरी तैयारी के साथ ब्लोगिंग के मैदान में उतर सकेंगे.पहला लिंक ब्लोगिंग की वीडियो एज्युकेशन का है.जहाँ आप वीडियोज देख कर ब्लोगिंग सीख सकेंगे.उसके बाद वाले लिंक सभी आर्टिकल्स हैं.जहाँ से आपको ब्लोगिंग के लिए काफी मदद मिलेगी.जिन्हें पढ़कर आप एक बेहतरीन ब्लोगर बन सकते हैं.

1.''Learn Bloging in Urdu-Hindi ''

2.ब्लॉग को प्रचारित करने के तरीके 

3.अपना ब्लॉग कैसे शुरू करें ?

 



6.अपने ब्लॉग का ट्राफिक कई गुना बढ़ाएं 




13.वेबसाइट या ब्लॉग का ट्रैफिक बढ़ाएं

14.मास्टर्स टेक ब्लॉग ट्रिक्स 

15.ब्लॉग ट्राफिक बढ़ाने के लिए कुछ टिप्स 



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बॉलीवुड के हमशक्ल चेहरे

बॉलीवुड के हमशक्ल चेहरे


आज हम बात करेंगे बॉलीवुड के कुछ हमशक्ल चेहरों की.जिनमे से कुछ तो सफल हुए और कुछ असफल.आइये इन हमशक्ल चेहरों के बारे में कुछ बात करते हैं.मिडिया ने कई बार इसका खुलासा किया.लेकिन अब तक ये बॉलीवुड स्टार्स इसका इनकार ही करते रहे.

                                                      केटरीना कैफ - जरीन खान 

बॉलीवुड की टॉप और सुपरस्टार हिरोइन केटरीना कैफ ,जिनकी सफलता और खूबसूरती के चर्चे भी आज काफी हैं.केटरीना फिल्मो में आने से पहले सिर्फ सलमान खान की दोस्त के रूप में पहचानी जाती थी.आज बॉलीवुड की सफलतम हिरोइन्स में इनका नाम आता है.और जरीन खान को भी सलमान खान ही अपनी फिल्म वीर के जरिये लाये.जरीन खान के फिल्मो में आते ही ये बहस भी चल पड़ी थी की जरीन केटरीना कैफ की हमशक्ल है.लेकिन जरीन यही मानती है की केटरीना उनसे ज्यादा खुबसूरत है.और वो कहीं से भी केटरीना की तरह नही दिखती.ये भी आप फोटो देख कर खुद ही फैसला कर सकते हैं.केटरीना के वीर फिल्म में काम करने से इनकार की वजह से ही जरीन को लाया गया.जब सलमान खान युवराज की शूटिंग कर रहे थे,उन दिनों जरीन उनसे ओटोग्राफ लेने गई थी.तब सलमान ने कहा था की ऑटो ग्राफ तो अब आपके लिए जायेंगे.उस वक्त जरीन इस बात को समझ नही पाई थी.जब उन्हें वीर में लिया गया ,तब जाकर उनके ये बात समझ में आई.

मधुबाला - माधुरी 

गुजरे ज़माने की सबसे खुबसूरत हिरोइन मधुबाला काफी सफल रही.उनके खूबसूरती के लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है.जब माधुरी दीक्षित फिल्मो में आई तो उन्हें मधुबाला का हमशक्ल कहा गया.आप इन दोनों के चेहरे फोटो में देख सकते हैं.और माधुरी इससे आज तक इनकार ही करती रही.बल्कि माधुरी को इस ज़माने की मधुबाला भी कहा गया.


सोनाक्षी - रीना रॉय 
रीना रॉय भी अपने ज़माने की सफल हिरोइन रही है.जिसने कई फिल्मो में काम किया.और सोनाक्षी सिन्हा जो की फिल्म स्टार शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी है ,को रीना रॉय का हमशक्ल कहा गया.हालाँकि एक ज़माने में शत्रुघ्न सिन्हा का नाम भी रीना रॉय से जोड़ा गया था.लेकिन रीना रॉय नही मानती की सोनाक्षी उनकी हमशक्ल है.फोटो देख कर आप खुद अंदाज़ा कर सकते हैं की ये बात कहाँ तक दुरुस्त है.


ऐश्वर्या रॉय -स्नेहा उल्लाल 
ऐश्वर्या रॉय जहाँ बॉलीवुड की फेमस हिरोइन रही हैं.वहीँ स्नेहा उल्लाल ने सिर्फ एक आद फिल्म में ही काम किया.स्नेहा उल्लाल को लेन का काम भी सलमान खान ने ही किया था.और ये उन दिनों की बात है जिन दिनों सलमान खान ऐश्वर्या के साथ डेट कर रहे थे.ऐश्वर्या रॉय ने समय के अभाव के कारण फिल्म लकी में सलमान के साथ काम करने से इनकार कर दिया था.इससे नाराज सलमान ने स्नेहा को ब्रेक दिया.हालाँकि स्नेहा को भी तलाश किया गया था.उन दिनों भी ये बहस जारी थी की स्नेहा उल्लाल ऐश्वर्या की हमशक्ल है.लेकिन सलमान खान इस बात से इनकार ही करते रहे.इसी तरह वीर के समय भी इनकार करते रहे की जरीन केटरीना की हमशक्ल है.

हर्मन बवेजा -ऋतिक रोशन 
ऋतिक रोशन फिल्मो में एक सफल अभिनेता रहे हैं.जबकि हर्मन बवेजा की पहचान सिर्फ प्रियंका चोपड़ा के बॉय फ्रेंड के रूप में ही ज्यादा रही.हर्मन को ऋतिक के हमशक्ल होने का भी कोई फायदा ना मिल सका.उन्होंने भी एक्का दुक्का फिल्मो में काम किया जो की सफल भी ना हो सकी.प्रियंका के कहने से फिल्मो में आये हर्मन ऋतिक की तरह सफल नही हो पाए.जब हर्मन की फिल्म लव स्टोरी 2050 रिलीज हुई थी ,उन दिनों में भी ये चर्चा चल पड़ी थी की हर्मन ऋतिक के हमशक्ल हैं.हालाँकि हर्मन भी इससे इनकार ही करते रहे.और प्रियंका भी इनकार करती रही.

हमशक्ल की बात पर हमेशा ही बॉलीवुड स्टार्स इनकार करते रहे ,और मिडिया को ही कोसते रहे.लेकिन मै सिर्फ इतना ही कहूँगा की ''ये पब्लिक है ये सब जानती है.''भारत की अवाम इतनी बेवकूफ नही है ,जो आखों देख कर भी आँखे बंद कर लें.