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इन्कार

इन्कार

रात के अँधेरे में बैठ कर वो अपने आंसू बहा रहा था। उसे लगता था की वो अब और जी नही पायेगा। रह रह कर उसे वो घटना याद आती थी। किसी की याद उसे हर समय जला रही थी। वो एक मामूली सा मास्टर था। जो की कम तनख्वा में सिर्फ अपना खर्च ही चला सकता था। ऐसे में शायद उसे इस बात का अधिकार ना था की वो किसी से मोहब्बत करे। क्यूँ की आज के इस दौर में मोहब्बत की मंजिल पाने के लिए करियर भी काफी जरुरी होता है। लेकिन उसने मोहब्बत तो कर ली थी। वो तो हमेशां यही सोचता था की हिंदी फिल्मो की तरह वो भी अपनी मोहब्बत को पा लेगा। लेकिन शायद फिल्म और हकीकत में यही फर्क है। उसे याद था की जब वो अपनी महबूबा से मिला था तो उसने कहा था की जल्द घर वालों को रिश्ता लेकर भेज दो वर्ना कोई और बीच में आ जायेगा। और घर वाले उसका रिश्ता कहीं और कर देंगे। ये तो इसका दिल जानता था की कैसे इसने घर के एक एक मेंबर को अपने रिश्ते के लिए तैयार किया था। समय गुजरते गुजरते सारे घर वाले इस रिश्ते के लिए राजी हो चुके थे।बस देर थी उनके घर रिश्ता लेकर जाने की।

वहां से उसने भी ये यकीन दिला दिया था की इनकार नही होने देगी। लेकिन होनी को कोई ताल नही सकता। उस लड़की की माँ और बहने ही ये चाहती थी की इस लड़के से इसका रिश्ता कर दिया जाये। और उसके पिता की सोच कुछ अलग थी। रिश्ता पक्का करने के लिए इसने जब उनके घर अपने घर वालों को भेजा। तो उन्होंने बड़ी खातिर तवजोह की। और लड़की की माँ ने फोन करके अपने शौहर को बुलाया ,और बताया की आपकी बेटी का रिश्ता आया है। आखिर लड़की के पिता घर आये। और उन्होंने इन रिश्ता लेकर आने वालों से बड़ी ही मोहब्बत से मुलाकात की। और गुफ्तगू शुरू की। इस बीच लड़की के पिता ने पूछा की आपका लड़का करता क्या है ? तो उन्होंने जवाब दिया ,की अभी तो सिर्फ एक मास्टर ही है। तो वो बोले की माफ़ कीजियेगा ,मै अपनी बेटी का हाथ ऐसे लड़के के हाथ में नही दे सकता जिसका अपना कोई करियर ही नही है। वो मेरी बेटी को कैसे खुश रखेगा। तो इन्होने जवाब दिया की लड़का लड़की आपस में मोहब्बत करते हैं।

तो वो बोले की सिर्फ मोहब्बत से घर नही चला करते। घर चलाने के लिए आमदनी की जरुरत होती है। और आपके लड़की की इतनी आमदनी नही है की वो मेरी बेटी को खुश रख सके। पहले अपने लड़के का करियर बनाओ ,फिर उसकी शादी की फ़िक्र करो। ये सब बातें सुनकर घर वाले खली हाथ लौट आये। जब इसने पूछा की अम्मा क्या हुआ ? रिश्ता पक्का हुआ या नही ? तो घर वालों ने बताया की ये ये बात हुई। और उन्होंने कहा की पहले अपने लड़के का करियर बनाओ। फिर शादी के लिए सोचना। ये सुनकर उसे बड़ा सदमा हुआ। लेकिन दुसरे ही पल उसने कुछ कर गुजरने की ठान ली। और करियर के लिए कोशिशें करना शुरू कर दीं। करियर बनते बनते 2 साल लग गये ,और पता चला की उस लड़की की शादी भी हो चुकी थी। इसके लिए ये ऐसा ही था जैसे कोई बुलंदी पर चढ़कर निचे गिर गया हो। सब कुछ पाकर भी खाली हाथ रह गया।

आज के नवजवानों को चाहिए की मोहब्बत और शादी के सपने देखने के साथ साथ अपने करियर की तरफ भी तवज्जोह दें। अगर आप अच्छी जॉब करते होंगे ,अच्छी आमदनी होगी ,तो ही आप अपनी मोहब्बत को खुश रख सकेंगे। सब कुछ छोड़ कर सिर्फ मोहब्बत के पीछे दौड़ना ,और ये उम्मीद करना की हिंदी फिल्मो की तरह का अंत होगा ,ये समझदारी नही है। सबसे पहले एक काबिल इंसान बनने की कोशिश करनी चाहिए। जो समय की कद्र करता है समय भी उसकी कद्र करता है। जो अपने समय को बर्बाद करता है ,सिवाय पछतावे के उसे कुछ हासिल नही होता। इस लघु कथा के जरिये मै सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूँ। 

                                                           ''आमिर अली दुबई'' ....

माँ की दुआ

माँ की दुआ


१० साल का बच्चा जब अपने महल्ले से गुजरता तो मोहल्ले में रहने वाली एक औरत उसे बड़े ही प्यार भरे अंदाज़ में देखती.कई महीने इस तरह गुजरते रहे.लेकिन बच्चा ये बात समझ नही पाया.वो औरत अकेली थी.और विधवा भी थी.उस बच्चे को देखते ही उसका दिल धड़कने लगता.लेकिन बेचारी डर के मारे ज्यादा देर तक उसे ना देख पाती.इधर बच्चे के माँ बाप थे.जो कभी कभी उसके साथ बुरा सुलूक करते.उसे डांट डपट भी कर देते.वो बच्चा घर से निकल कर अकेला जाकर कहीं बैठ जाता.उसे देख कर वो औरत समझ जाती.और उसे अपने हाथों से खाना खिलाती.लेकिन जुबान से कुछ ना कहती.और ना ही वो बच्चा कभी उससे बात करता.वो औरत उस बच्चे से काफी ज्यादा प्यार करती थी.एक दिन उस बच्चे की माँ ने उसे उस औरत के साथ बैठा देख लिया.और गुस्से से अपने बच्चे को झिड़का ,और बोली की आइन्दा कभी भी उस औरत के पास नज़र आया तो तेरी टांगें तोड़ दूंगी.लेकिन वो बच्चा प्यार का भूखा था.

धीरे धीरे उस बच्चे के दिल में भी उस औरत के लिए काफी मोहब्बत हो गयी.उसने उस औरत से पूछा की आप मुझसे इतना प्यार क्यूँ करती हैं.लेकिन औरत ने यही जवाब दिया की तुम मेरे बच्चे के जैसे दिखते हो.जो की मर चुका था.लड़का चोरी चोरी उस औरत से मिलने जाता.और उसकी सेवा भी करता.लेकिन उसकी माँ को ये बात बिलकुल पसंद ना थी.उसकी माँ ने उसके पिता से उसकी शिकायत की.इस पर पिता ने भी उसे काफी डांटा.लेकिन वो लड़का फिर भी छुप छुप कर उस औरत से मिलता.इस तरह समय गुजरता रहा.और वो औरत भी बूढी होती गयी.और लड़का अब जवान हो चुका था.उसे किसी लड़की से मोहब्बत हो चुकी थी.उसने बहुत कोशिश की लेकिन अपने माँ बाप को समझा नही पाया.उसने अपना दुःख दर्द अपनी उसी बूढी अम्मा को सुनाया.तो वो बोली की इसमें कोई बुरे नही है.लेकिन तेरे माँ बाप क्यूँ नही मान रहे.ये तो मुझे भी नही मालुम.उस लड़के को वैसे भी अपने माँ बाप से ज्यादा प्यार नही मिला था.इसलिए वो भी उनसे कोई ख़ास मोहब्बत नही करता था.बात बात पर वो इसे झाड देते.लेकिन ये कोई जवाब नही देता.इसके माँ बाप ने जबरदस्ती इसकी शादी कहीं और तय कर दी.जिससे इसे काफी झटका लगा.और इसने ये फैसला कर लिया की मै अपनी मोहब्बत को पाकर ही रहूँगा.फिर उसने उस लड़की से जिससे वो मोहब्बत करता था ,शादी कर ली.और उसे घर ले आया.वो माँ बाप जो पहले ही इस पर भड़के हुए थे ,इसकी इस हरकत से और भी ज्यादा नाराज़ हुए.और उन्होंने कहा की ये सब उस औरत का किया धरा है.ये लड़का उस औरत से हाथों बिगड़ गया है.उसने ही इसे खराब कर दिया है.

अगर हमारा खून होता तो ऐसी हरकत कभी नही करता.ये सुनकर लड़के के पाऊं के निचे से जमीन सरक गयी.उसने अपने माँ बाप से पूछा की क्या ये बात सही है की मै आपकी औलाद नही हूँ.इस पर उसके पिता ने कहा की हाँ ,तू हमारी औलाद नही है.आज से कई साल पहले एक गाडी का स्टेशन के पास एक्सीडेंट हुआ था.जिसमे तेरे माँ बाप मर गये थे.और तू अकेला जिन्दा बच गया था.उस समय हम तुझे रहम करके उठा लाये थे.और हमने तुझे पाला.ये सुनकर लड़का काफी ग़मगीन हो गया.और वो घर छोड़ कर चला गया.उसकी माँ ने उसे रोकने की कोशिश जरुर की ,लेकिन वो नही रुका.कई दिन तो इसी तरह गुज़र गये.लेकिन उसका दिल चैन नही पा रहा था.उसने इस सदमे की वजह से उस औरत के पास जाना भी छोड़ दिया.एक दिन वो स्टेशन के पास गया.और जाकर देखा की वहां एक बूढ़ा कूली है.उसने उससे उस हादसे के बारे में पूछना शुरू किया.तो उस कूली ने बताया ,की हाँ आज से कई साल पहले यहाँ एक हादसा हुआ तो था.जिसमे सिर्फ एक आदमी मरा था ,जो गाडी चला रहा था.औरत और उसका बच्चा बच गये थे.तो उस लड़के ने पूछा की उनका क्या हुआ.तो कूली बोला की उस गाडी में जो औरत थी ,वो मरी नही थी बेहोश हुई थी.और उसका बच्चा जिन्दा बच गया था ,लेकिन लोगों ने उस औरत को मरी समझ कर उसका बच्चा किसी और के हाथो दे दिया.उन्होंने ही उस बच्चे की पवारिश की.उसने पूछा की उस औरत का क्या हुआ.तो कूली बोला ,की वो अभी भी जिन्दा है.और उसने जगह बताते हुए कहा की वो वहां पर रहती है.

ये सुनकर लड़का चौंका ,क्यूँ की कूली ने उसी औरत का पता बताया था जो उसे अपना बेटा समझती थी.फिर लड़का सीधा उसी औरत के पास गया,और उसे ये कहानी बताने लगा.तो वो औरत रोते हुए बोली की मुझे तो ये सब पता था.लेकिन मै तुझे बताने से डरती थी.मै एक गरीब औरत अगर तेरे लिए दावा कर भी देती ,तो कौन मानता.लोग मुझे झूठी करार देकर इस महल्ले से ही निकाल देते.और मै तेरी जुदाई सह नही सकती थी.और दूसरी वजह ये थी की अगर मै तेरे लिए दावा करती तो तेरी वो माँ जिसने तुझे पाला ,वो तेरी जुदाई सहन नही कर पाती.मै तो तेरी जुदाई सहन कर ही रही थी.लेकिन उस माँ का क्या होता.यही सब बातें सोच कर मै चुप रही.और सहन करती रही.वो चाहे तेरे साथ कैसा भी सुलूक करे ,लेकिन मैंने तो तुझे जन्म दिया है.इसलिए मै तेरे लिए हर समय जागती रहती.और तेरा इतना ख़याल रखती थी.बेटा ,एक माँ की ममता क्या होती है उसे मै ही समझ सकती हूँ.इसलिए मैंने उस माँ के लिए तुझसे दूर रहना भी गवारा कर लिया.लड़का बोला की माँ मुझे तो बचपन से ही यही लगता था की आपका मुझसे कोई बहुत बड़ा रिश्ता है.जब भी जिन्दगी में कभी दुखी होता था ,तो आपको मै अपने पास ही पाता था.और जब भी मुझे घर से निकाला गया ,तो तुमने ही मुझे सहारा दिया.आज भी जब मेरे माँ बाप ने जिन्होंने मेरी परवरिश की ,उन्होंने मुझे ठुकरा दिया ,और मुझे आज भी तेरे आँचल में ही जगह मिली.माँ आप बहुत महान हैं.अपना सब कुछ कुर्बान करके पूरी जिन्दगी गुजार दी.और उसके लिए ये सब कुर्बान कर दिया जो हमेशा आप से नफरत ही करती रही.इस तरह बातें करते हुए ये माँ बेटे आपस में मिले.इतने में किसी से जोर जोर से रोने की आवाजें सुनाई दीं.

लड़के ने देखा तो उसकी वो माँ जिसने उसकी परवरिश की थी ,बाहर दरवाजे के पास खड़ी रो रही थी.वो अन्दर आई.और उस औरत के कदमो में गिर पड़ी.और बोली की मुझे माफ़ कर दो बहन.मुझसे बहुत बड़ी गलती हुई.लेकिन प्लीज मेरे बच्चे को मुझसे जुदा मत करो.मै इसी लिए इस पर ज्यादती करती थी ताकि ये आपसे दूर रहे ,कोई मेरे बच्चे को मुझसे छीन ना ले.मै इसके बगैर नही जी सकती.वो बूढी औरत बोली की ये कल भी तुम्हारा बेटा था ,और आज भी तुम्हारा ही बेटा है.मुझ बुढिया का क्या है ,सारी जिन्दगी तो गुजर गयी.जिन्दगी की कितनी साँसे बची हैं ये नही जानती. जो जिन्दगी बची है इसे देख देख कर ही गुजार दूंगी.लड़का अपनी दोनों माओं के जज्बात को देख देख कर रो रहा था.इतने में उसके पिता भी आ गये.और उन्होंने बताया की मैंने जब से तुम्हारा दिल दुख कर तुम्हे घर से निकाला है तब से तुम्हारी माँ ने कुछ भी नही खाया.और तुम्हे ही तलाश करती फिर रही है.आज उस लड़के तो पता चला की उसकी माँ उससे कितना प्यार करती थी.इतने में उस बूढी औरत ने दुआ के लिए हाथ उठा दिए.और बोली की ऐ मेरे मालिक ,आज तूने मेरी हर दुआ को कबूल कर लिया है.बस अब कोई तमन्ना बाकी नही है.मुझे इस दुनिया से और कुछ नही चाहिए.मुझे वापस बुला ले.इन शब्दों के साथ ही वो औरत दुनिया से चल बसी.माँ की दुआ भी कितनी मकबूल होती है.मांगी ,और कबूल हो गयी.सब कुछ छोड़ कर वो बूढी औरत चली गयी.इसी लिए तो कहते हैं ना की माँ से ज्यादा महान कौन हो सकता है.


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                                                                 ''आमिर दुबई.,,,