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जज़्बात का रिश्ता

जज़्बात का रिश्ता


रात के अँधेरे में तन्हाई में बैठे हुए अयान की आँखों से आंसू जारी थे.आंसू की वजह थी रक्षा बंधन.और इससे जुडी एक याद.एक कहानी जिसने अयान की जिन्दगी बदल कर रख दी थी.अक्सर अयान कविता की याद में डूबकर रोता रहता था.और भुलाये से भी उसको भुला नही पाता था.एक लड़की जो उसकी जिन्दगी में अपनी एक अनमिट छाप छोड़ गई.
ये अयान के साथ गुजरने वाली ये एक ऐसी कहानी है जो हर किसी को जज्बात में लाती है.जहाँ लोग धर्म के नाम पर नफरत फैलाते हैं वहां पर इस तरह की कहानी मोहब्बत को आम करने का काम करती है.और कुछ अनकहे रिश्तों की मोहब्बत का अहसास कराती है.आइये मै आपको अयान की जुबानी ही ये कहानी सुनाता हूँ.
सुबह सुबह तैयार होकर ऑफिस आया.और देखा तो कोई काम वगैरा ज्यादा नही था.जल्दी जल्दी काम निपटाकर मै अपना इमेल चेक करने लगा.इमेल चेक करते करते मेरी नज़र पड़ी एक अजीब से इमेल पर.जो की इंडिया से आया था.मैंने उसे खोलकर पढना शुरू किया.तो उसमे इस तरह लिखा था.
''आदरणीय भैया ,
आज रक्षा बंधन है.मै वो बदनसीब हूँ जिसका दुनिया में कोई भाई नही है.और आज से आप ही मेरे भैया हैं.वो इसलिए की आज मैंने गूगल बाबा से प्रार्थना की थी की मुझे भी मेरे भैया से मिलवा दो.तो गूगल बाबा ने 3 बार सर्चिंग करने के बाद आपका प्रोफाइल खोलकर मुझे दे दिया.और अपनी खामोश जुबान से कहा की अगर तुम 10 बार भी सर्चिंग करोगी तब भी यही प्रोफाइल मै तुम्हे दूंगा.क्यूँ की यही तुम्हारा भाई है.इसलिए मैंने आपकी प्रोफाइल देख और पढ़कर आपको अपना भाई मान लिया है.उम्मीद है की आप भी मुझे अपनी बहन स्वीकार करेंगे.मेरा नाम कविता है ,और मै इंडिया मुंबई से हूँ.इसी इमेल के साथ आपको एक राखी भेज रही हूँ ,इसे मेरी तरफ से स्वीकार करना.
इस इमेल को पढ़कर मै काफी देर तक मुस्कुराता रहा ,की दुनिया में पागल लोगों की कमी नही है.इस लड़की की बातें पढ़कर इसके भोलेपन का काफी अहसास हो रहा था.और हंसी भी आ रही थी की ये इंटरनेट पर अनजान भाई तलाश करने निकल पड़ी.खैर मुझे मेरे जमीर ने कहा की यार इसको जवाबी इमेल तो करना चाहिए.मैंने उसे इस तरह जवाबी इमेल लिखा.
''कविता ,मुझे आपका इमेल मिला.और आपकी बातें पढ़कर अजीब सा भी लगा.और इस बात का ज्यादा अहसास हुआ की दुनिया में खास कर मेरे वतन भारत में आज भी बहुत भोले लोग पाए जाते हैं.खैर ,कविता जी मेरा नाम अयान है.और मै दुबई में हूँ.और मै मुस्लिम समाज से हूँ.इसलिए रक्षा बंधन वगैरा पर यकीं नही रखता.इसलिए मै सिर्फ आपको ये दुआ ही दे सकता हूँ की आपको आपके रक्षा बंधन के दिन कोई अच्छा सा भाई मिल जाये.ये लिखकर मैंने इमेल भेज दिया.दुसरे दिन मुझे दुबारा उसका इमेल मिला.उसमे लिखा था ''आदरणीय भैया ,आपने मेरे इमेल का जवाब भेजा इसके लिए आपका धन्यवाद.और भैया आपने लिखा की आप मुस्लिम हैं.इसलिए मेरे भाई नही हो सकते.इस पर मै सिर्फ इतना ही कहूँगी की भैया जिस इश्वर ने आपको दुनिया में भेजा उसी ने मुझे भी भेजा.हमारा मालिक एक है तो हम अलग अलग कैसे हो सकते हैं.भैया मैंने दिल की गहराई से आपको ही अपना भाई माना है.अगर आप मुझे स्वीकार करेंगे तो मेरे लिए इस रक्षा बंधन का इससे बड़ा तोहफा कोई नही होगा.मुझे आपके जवाबी इमेल का इन्तजार रहेगा.और हाँ अपना मोबाईल नंबर भी भेजना.
उसका इमेल पढ़कर मेरे समझ में ये नही आ रहा था की मै इसको जवाब क्या दूँ.मेरे एक करीबी दोस्त ने कहा की शायद इसको कोई लालच होगा यार.आज के इस स्वार्थी दौर में किसी पर भी भरोसा नही करना चाहिए.उसकी बातें सुनकर मेरा दिमाग फिर से दूसरी तरफ पल्टा.रात सोया तो यही सोचता रहा की इसकी बातों से लगता नही की ये लड़की लालची है.इतनी भोली भाली बच्चों जैसी बातें करने वाली लड़की धोखेबाज तो हो ही नही सकती.इस तरह सोचते सोचते नींद की आगोश में चला गया.सुबह उठकर ऑफिस गया ,तो इमेल चेक किया तो सबसे पहले उसी का इमेल आया हुआ था.खोलकर पढना शुरू किया.उसमे लिखा था ''बड़े भैया ,आपको सुप्रभात ,उम्मीद है की आप बिलकुल ठीक होंगे.आपके इमेल का इन्तजार करते करते थक गई थी. इसलिए मैंने सोचा की चलो मै ही आपको इमेल कर दूँ.खैर अब से आपको रोजाना सुबह सुबह मेरा इमेल मिल जाया करेगा.आज भी आपको एक खुबसूरत सी राखी भेज रही हूँ. उसकी ये बातें पढ़कर मै फिर काफी देर तक सोचता रहा.आखिर ये लड़की चाहती क्या है.ये क्या है क्यूँ ऐसा करती है.ये सब बातें सोचते हुए मैंने भी उसे जवाबी इमेल भेजा.मैंने इस तरह लिखा.''कविता मै नही जानता की आप कौन हैं.और क्या चाहती हैं.आप क्यूँ मुझसे रिश्ता जोड़ रही हो.जबकि मै पहले ही कह चूका हूँ की मुझे इस तरह के रिश्तों पर कोई यकीन नही है.ये महज़ एक इत्तिफाक है की गूगल में बार बार आपके सर्चिंग करने पर मेरी प्रोफाइल सामने आ गई.और आपने बिना देखे बिना सोचे बिना समझे मुझे अपना भाई बना लिया.आखिर आपका मकसद क्या है .क्यूँ आप ये सब कर रही हो.और ये लिखकर मैंने इमेल भेज दिया.और मै अपनी दिनचर्या में खो गया.दुसरे दिन सुबह उसका इमेल मिला.उसमे उसने मेरे इमेल का जवाब लिखा था.जिसे पढ़कर मै भावुक हो गया.उसमे लिखा था की ''मै आपकी एक बहन हूँ.और मै सिर्फ आपका आशीर्वाद चाहती हूँ.और मुझे आपसे कुछ नही चाहिए.बस आप मुझे अपने दिल में थोड़ी सी जगह दे दें.मैंने सोच समझ कर बल्कि घर में सबको बताकर आपको दिल से अपना भाई स्वीकार किया है.भैया मुझे लगता है की आपका दिल बहुत नर्म है बिलकुल मेरी तरह.जिन्दगी भर के लिए मैंने आपसे भाई बहन का रिश्ता जोड़ा है.यही मेरा मकसद है.और मुझे किसी चीज का कोई लालच नही है भैया.दुनिया में आप ही एक सिर्फ मेरे भाई हैं.अगर आप ही मुझे ठुकरा देंगे ,तो मै तो फिर बदनसीब ही रह जाउंगी.आखिर में आपसे यही प्रार्थना है की आप अपना नंबर मुझे भेजना.ताकि मै आपसे बात कर सकूं.और ये सब बातें लिखने के बाद कविता ने इस इमेल के साथ भी रोजाना की तरह एक सुन्दर सी राखी का फोटो अटेच करके भेजा था.रोजाना उसके इमेल पढ़ पढ़ कर मेरे दिल में भी उसके लिए काफी मोहब्बत पैदा हो चुकी थी.लेकिन मै खुल कर उसको अपनी बहन स्वीकार करने से बचता रहा.इस तरह रोजाना उसके इमेल मिलते रहते.और वो कभी तस्वीर की तो कभी मोबाईल नंबर की फरमाइश करती रहती.आखिर कार एक दिन मैंने उसको अपना नंबर भेज ही दिया.और कुछ दिन अचानक मै बीमार हो गया था.इसलिए ऑफिस जा नही सका.और दो दिन तक घर पर ही रेस्ट करता रहा.बार बार वो कविता ही मेरे दिमाग में टेंशन की तरह घुमती रहती.इतने में एक दिन मोबाईल की घंटी बजी.मैंने फोन रिसीव किया.और हेल्लो कहा.तो उधर से आवाज आई की भैया अब तबियत कैसी है? मै हैरान रह गया.की मेरे बीमार होने के बारे में तो किसी को भी पता नही था.आगे उसने कहा ''भैया मै कविता बोल रही हूँ.आपकी तबियत कैसी है.और आप दवाई लेने में इतनी सुस्ती क्यूँ करते हैं.वक्त पर दवाई लेते तो अभी तक ठीक हो जाते.वो 18 साला लड़की मुझे ऐसे समझा रही थी जैसे की मेरी माँ हो.और पहली बार में ही इस तरह बातें कर रही थी की जैसे बरसों से मुझे जानती हो.मैंने कहा की मै अब ठीक हूँ.दवाई भी ले ली है.और उससे कुछ देर बात करने के बाद मैंने उससे पूछा की आपके घर में और कौन कौन हैं? तो वो बोली की माँ हैं और पिताजी हैं ,एक छोटी बहन है निशा.और मै हूँ.और भैया आपकी ही कमी है.उसकी बातें कभी कभी मुझे चौंका जाती.फिर उसने अपने पिताजी को फोन दिया.उसके पिताजी ने मुझसे बात की और कहा की बेटा अयान कैसे हो.तुम दो दिन से बीमार थे ना अब कैसे हो ? मैंने उनसे पूछा की आप सभी को कैसे मालुम?वो बोले की बेटा जब तक तुम्हारा इमेल नही आता ,कविता को चैन नही आता.और रोजाना तुम्हारा इमेल पढ़कर हमे भी सुनाती है. दो दिन से तुम्हारा इमेल नही मिला.तो इसने भी खाना पीना छोड़ दिया था.और जिद करती थी की मुझे अयान भैया से बात करवाओ फिर जो बोलोगे वो करने के लिए तैयार हूँ.ये बातें सुनकर मेरी हैरत की इन्तहां हो गई.की या खुदा ,ये लड़की इतनी मुझसे मोहब्बत करती है ,इतना मुझे अपना जानती है.इतना तो शायद मेरी सगी बहन होती तो वो भी नही कर सकती.ना इसे किसी चीज का लालच है.और कोई स्वार्थ.ये सोचते हुए मेरी आँखों से आंसू आ गये.इतने में उसके पिताजी बोले कहाँ खो गये बेटा,मैंने कहा जी बोलिए मै सुन रहा हूँ.फिर वो बोले की कविता सारा दिन अयान अयान की ही रट लगाये रहती है.और सारा दिन ज्यादातर तुम्हारे बारे में ही बात चीत करती रहती है.और कहती है की भैया भारत आयेंगे तो मै उनको राखी बाँधने जाउंगी.भैया मेरे सर पर हाथ रखकर मुझे आशीर्वाद देंगे.इस तरह सपने सजाती रहती है.
उसके बाद तो कई बार उसका फोन आया.और मैंने उससे उसके घर वालों से बात की.वो काफी अच्छे लोग थे.और मुझसे तो काफी घुल मिल गये थे.मध्यमवर्गीय परिवार था.वो लोग मुझसे अपनी मोहब्बत का इजहार करते रहते.और मुझसे बात करके काफी खुश होते.रोजाना सुबह होते ही कविता का इमेल मुझे मिल जाता ,जिसमे खास कर एक राखी जरुर होती.मै भी कविता से काफी घुल मिल गया था.सबसे बड़ी बात जो मेरे दिल को छू गई वो ये की इंडिया से दुबई फोन करने के काफी पैसे खर्च होते हैं.फिर भी वो मुझे फोन करती.इस बारे में मैंने उसके पिताजी से पूछा था तो उन्होंने कहा था की इसको जो हाथ खर्ची देते हैं ये उसको जमा करके मोबाईल में बेलेंस डलवाकर तुमसे बात कर लेती है.इसका और कोई दूसरा खर्चा है ही नही.
कमाल की पगली थी वो.फोन करती कभी कहती भैया मैंने आज आपके लिए ये खाना बनाया है कभी कहती वो बनाया है.तो कभी मुझे उन पकवानों की तस्वीर खींचकर भेज देती.उससे रिश्ता जुड़े साल हो चूका था लेकिन इस एक साल में मुझे कभी नही लगा की वो मेरी सगी बहन नही है.ना उसको लगा की मै एक अनजान लड़का हूँ.वो तो कहती की कौन कहता है की आप मेरे सगे भैया नही हैं.आप तो मेरे दिल के सबसे करीब हैं.अजीब सी बात है की लोग इंटरनेट पर ना जाने क्या क्या पा लेते हैं और एक मै था जिसे अनजाने में कविता जैसा तोहफा बहन के रूप में मिल गया.जिसकी मीठी मीठी बातें मेरे दिल को छू जाती.जब भी मै अपनी गर्ल फ्रेंड रुखसार से बातें कर रहा होता ना चाहते हुए भी मेरी जुबान से बार बार कविता का ही नाम निकलता.वो रोजाना कहती की यार क्या आप भी एक गैर मुस्लिम लड़की के नाम की माला जपते रहते हो.एक दिन मैंने उससे कहा की रुखसार प्लीज मेरे सामने कविता के बारे में कोई गलत बात मत करो.वो जैसी भी है मेरी बहन है.और उसने मुझे बहन का वो प्यार दिया है ,जो मुझे कभी नही मिला.और दुनिया में उसे ही सबसे ज्यादा मेरी फ़िक्र है.ये बातें सुनकर रुखसार गुस्सा हुई.और कहने लगी की मुझे ये कविता कविता की रट बिलकुल पसंद नही है.दो प्रेमी आपस में मिलते हैं रोमेंस करने के लिए और एक तुम हो जो उस कविता की बकवास लेकर बैठ जाते हो.ये कविता कहीं जाकर मर क्यूँ नही जाती.और भी उसने दो चार गलत अलफ़ाज़ कविता के लिए कह दिए.
रुखसार के ये अलफ़ाज़ सुनकर मै अपने गुस्से पर काबू ना रख सका ,और मैंने उसे एक जोरदार थप्पड़ रशीद कर दिया.और मैंने उससे कहा की ''तुम जैसी हजार लड़कियां मिलकर भी एक कविता जैसी नही बन सकती.ये सुनकर वो नाराज़ होकर चली गई.उसके बाद मैंने कई बार उसे फोन करने की कोशिश की ,लेकिन वो मेरा फोन रिसीव भी नही करती.मैंने उससे मिलने की भी कई बार कोशिश की लेकिन वो मुझसे मिलती भी नही.वो बिलकुल मेरी जिन्दगी से निकल गई.,क्यूँ की मै भी उससे बहुत प्यार करता था.और उससे शादी के सपने देखता था.इसलिए उसके बगैर रहना भी मेरे लिए दुशवार था.लेकिन उसका कविता के लिए कुछ गलत कहना ये भी मुझसे बर्दाश्त नही था.कविता के लिए तो मै ऐसी हजार रुखसार भी कुर्बान करने को तैयार था.कई दिन तक मै अन्दर ही अन्दर घुलता रहा.क्यूँ की कविता को मै सब कुछ रुखसार के बारे में बता चूका था.इसलिए मुझसे रहा नही गया.और मैंने एक दिन कविता को अपने और रुखसार के झगडे के बारे में सब कुछ बता दिया.मेरी बात सुनकर कविता मुझपर नाराज़ हुई.और कहने लगी की आपको कोई हक़ नही की आप मेरी भाभी को इस तरह जलील करें.आपने क्यूँ उनपर हाथ उठाया.इस तरह दो चार सख्त बातें सुनाकर ,उसने रुखसार के नंबर मांगे.और मुझे कहा की अब जाओ और आराम करो.भाभी को मनाना मेरा काम है.मै सोच रहा था की एक तो रुखसार को वैसे ही कविता के नाम से चीड़ है ,उपर से ये उसको फोन करेगी ,कहीं वो इसको उल्टा सीधा ना सुना डाले.लेकिन मेरी कविता तो बर्दाश्त का समंदर थी.और इसकी आदत भी मुझे पता थी की अगर रुखसार ने इसे कुछ बुरा भला कह भी दिया तो ये तो कभी भी मुझे नही बताएगी. कविता ने रुखसार को इंडिया से फोन करके उससे काफी देर बात चीत की.और कविता ने रुखसार से कहा की अगर आप दोनों की रिलेशन शिप के ख़राब होने की वजह मै हूँ तो मै आज से ही आप दोनों के बीच से हट जाती हूँ.लेकिन मै हमेशा से आपको अपनी भाभी के रूप में देखती हूँ.और मै ये चाहती हूँ की भैया सिर्फ आपसे ही शादी करें.और भैया आपसे बहुत ज्यादा मोहब्बत करते हैं ,आपने छोटी सी बात की वजह से रिश्ता ख़तम करने के बारे में कैसे सोच लिया.ये तो मै जानती हूँ की वो आपसे कितना प्यार करते हैं.अगर वो आपके सामने मेरी एक बात करते हैं तो मेरे सामने आपके बारे में काफी बात करते रहते हैं.लेकिन मैंने तो कभी बुरा फील नही किया.उसकी ये जज्बात भरी बातें सुनकर रुखसार रो पड़ी.और उससे फोन पर माफ़ी मांगने लगी.और उससे वादा किया की आज शाम को ही मै अयान से मिलूंगी.कविता ने मुझे नेट पर बताया की आज मै शाम को आपके लिए एक तोहफा भेज रही हूँ.मै इस बात का मतलब समझ नही पाया.मैंने सोचा की पता नही क्या मामला है.अचानक शाम को घर में दरवाजे की घंटी बजी ,मैंने उठकर दरवाजा खोला तो मै हैरान रह गया की रुखसार मेरे सामने खड़ी थी.मै समझ गया की कविता का तोहफा यही है.मैंने बिना कुछ कहे उसे वेलकम किया.उसने मुझसे माफ़ी वगैरा मांगी.इसी तरह दिन गुजरते रहे.कुछ माह बाद मेरा इंडिया जाने का प्रोग्राम हुआ.लेकिन मै सिर्फ 15 दिन के लिए ही जा रहा था.मैंने कविता को बता दिया था की मै इस तारीख को इंडिया आ रहा हूँ.उसने मेरे आने से पहले ही अपने पिताजी और माँ के साथ मिलकर मेरे स्वागत की तैयारी कर ली.मै इंडिया भी आया.और पहली बार कविता से मिलने के लिए मुंबई गया.शायद उसके पूरे घर में मेरे आने की जोशो खरोश से तैयारियां चल रही थी.वैसे तो हम स्काईप पर कई बार वीडियो चैट कर चुके थे.इसलिए उन सभी घर वालों को पहचानना मेरे लिए मुश्किल काम भी नही था.और मुझे तो उम्मीद थी की वो मुझे देखते ही पहचान लेंगे.जैसे ही मै मुंबई पहुंचा और बस से निचे उतरा ,तो देखा की कविता और उसका पूरा परिवार वहां पहले से ही मेरा इन्तजार कर रहे थे.मै जिन्दगी में पहली बार उन सबसे मिल रहा था.लेकिन ऐसा लग रहा था की जैसे मै सफ़र से वापस अपने घर आ गया हूँ.उन सबका प्यार ,और स्वागत ,और उन सबकी ख़ुशी देख कर मुझे काफी अपनापन महसूस हो रहा था.मेरे वहां जाने से सबसे ज्यादा कविता खुश थी.वो मुह बोली बहन जो पिछले २ साल से मेरे साथ बिलकुल सगी बहन की तरह बात चीत कर रही है.रूपए खर्च करके इंडिया से मुझे फोन करती ,तो इंटरनेट पर कई बार चैटिंग करती.उसकी हंसी मजाक ,चंचलता ,कभी रूठना ,कभी बड़ों से भी ज्यादा समझदार बातें करना,तो कभी बच्चों की तरह हरकतें करना.आज वो मेरे सामने थी.उसे देख देख कर मेरी आँखों से आंसू बह निकलते.और दिल सोचता की ,शायद जिन्दगी में इसी की कमी थी.इसको जन्म तो दूसरी माँ ने दिया ,लेकिन दिल ऐसा था की जैसे हम दोनों को एक ही माँ ने जना हो.मेरे आने से कई दिन पहले से ही खुशियाँ मानाने वाली वो नादान लड़की आज पहली बार मिली तो भी ऐसे की उसके आंसू ही नही थम रहे.पिताजी और माँ उसे तसल्ली देते.और कहते की क्या इतनी ही ख़ुशी थी ,की जो अयान के आते ही ख़तम हो गई.और इसको देखते ही तुने रोना मचा दिया.जब पानी बाल्टी में भर जाए तो वो भी छलक जाया करता है.ये तो उसकी ख़ुशी और उसके जज्बात थे भला कैसे ना छलकते.फिर मै इनके साथ घर गया.और जितने दिन रहा खास बनकर रहा.रक्षा बंधन ना होने के बावजूद भी मुझे एक कुर्सी पर बिठाकर उसने राखी बाँधी.यहाँ तक की उसने घर पर ये भी कह रखा था की मेरे लिए लड़का भी भैया ही तलाश करेंगे.फिर भी मैंने उससे उसकी पसंद पूछी.उसने शरमाते हुए मुझे बताया.लेकिन साथ ही ये भी कहा की आप उनसे मिल लें ,अगर आपको वो पसंद आये तो ठीक है.वर्ना जरुरी नही.वो मेरे दिल के इतना करीब थी ,तो मै भी उसके दिल के काफी करीब था.उसकी पसंद ना पसंद को काफी हद तक समझता था.इसलिए मैंने उस लड़के से मुलाकात की.उसके बाद कविता के पिताजी और माँ से मैंने इस बारे में मशवरा किया.और मेरे रहते ही हमने कविता की मंगनी उसी लड़के के साथ कर दी.और शादी के लिए हमने उनको वो समय दिया ,जिसमे मै आसानी से इंडिया दुबारा आ सकूं.कविता मंगनी पर काफी खुश थी.और उसने रुखसार से बात करने की ख्वाहिश का इजहार किया.मैंने रुखसार को ऑनलाइन बुलाया.और कविता से बात करवाई.जितना उन्होंने मुझे सम्मान दिया उसको मै बयान नही कर सकता.मै उनके घर उनके घर का सदस्य बनकर गया था.और उनके घर का एक हिस्सा बनकर लौटा.हँसते मुस्कुराते कई यादगार लम्हात को दिल में सजाये मै वहां से वापस रवाना हुआ.चंद दिन उनके साथ रहकर अब उनसे जुदा होना मेरे और उन सभी के लिए काफी मुश्किल साबित हुआ.कविता का और निशा का तो रो रो कर बुरा हाल था.मै जैसे तैसे करके वहां से रुखसत हुआ.और ये वादा करके आया की जल्द ही दुबारा लौटूंगा.और उसके बाद ही कविता की शादी की तारीख तय करेंगे. उसके बाद मै दुबई आ गया.इसी तरह रोजाना उसके इमेल्स का सिलसिला जारी था.तो ऑनलाइन बात भी होती थी.मै कविता के साथ रिश्ते को लेकर काफी सीरियस था.उसे अपनी जिन्दगी में काफी अहमियत देता था.कभी भी उससे कोई बात मै नही छुपाता.और ना ही वो मुझसे कोई बात छुपाती.लेकिन शायद ये मेरी गलत फहमी थी.कविता मुझसे एक राज छुपा गई थी.जिसका मुझे काफी बाद में ज्ञान हुआ.काश की मै पहले ये जान जाता.हुआ यूँ की एक दिन रोजाना की तरह ऑफिस में काम कर रहा था.इतने में मोबाईल पर घंटी बजी.देखा तो कविता का फोन है.मैंने फोन रिसीव किया तो दूसरी तरफ से उसके पिताजी बात कर रहे थे.और मैंने महसूस किया की वो काफी घबराये हुए थे.और कह रहे थे की बेटा कविता बहुत बीमार है.मैंने उनसे पूछा की आखिर बात क्या है.मुझे बताओ.लेकिन जाने क्यूँ वो कुछ छुपा रहे थे.मैंने गुस्सा होकर उनसे पूछा की बस अब बहुत हो गया.बताओ की बात क्या है.तो फिर वो बोले की बेटा कविता ने मुझे कसम दी है.की मै आपको उसकी बीमारी के बारे में कुछ ना बताऊँ.मैंने उनसे काफी मिन्नतें की.तब जाकर वो बोले की कविता को केंसर है.और अब इसका बचना मुमकिन नही.ये सुनकर मेरे तो होश ही जाते रहे.और मेरी आँखों के आगे अँधेरा छाने लगा.ऐसा लगता था की मै गिर पडूंगा.किसी तरह मैंने अपने आप को संभाला.और फोन पर उनको भी तसल्ली दी.और उनसे कहा की आप घबराइए नही सब ठीक हो जायेगा.उस वक्त कविता हॉस्पिटल में थी.साथ ही मुझे ये भी बताया गया की वो भैया भैया की रट लगाये हुए है.मैंने सोचा की अब आज की आज ही मेरा इंडिया जाना बहुत जरुरी है.मैंने जैसे तैसे करके यहाँ छुट्टी की अप्लाई दी.और जल्दी जल्दी इंडिया का टिकट करवाया.और मै यहाँ से रात को रवाना हुआ.इस दौरान मेरा खाना पीना भी हराम हो चुका था.प्यास लगती,लेकिन पानी गले के निचे नही उतर रहा था.प्लेन में यही सोचता गया की काश कविता पहले ही मुझे बता देती तो मै उसका इलाज करवाता.उसे बेहतर से बेहतर डॉक्टर को दिखाता.लेकिन उसकी जान बचा सकता.खैर अब भी कुछ नही हुआ था.मैंने इंडिया पहुँचते ही अपनी सारी जमा राशि को केश किया.और सीधा कविता के घर पहुंचा.जाकर देखा तो वो लाचार सी बिस्तर पर पड़ी थी.बिलकुल सूख कर काँटा हो चुकी थी.उसके चेहरे से रौनक ख़तम सी हो चुकी थी.मुझे देखते ही बिस्तर से उठने की कोशिश करने लगी.मै दौड़कर उसके पास गया.और उसे तसल्लियाँ देता रहा.मैंने अपने दोस्तों को फोन करके मुंबई आने को कहा.और साथ ही डॉक्टर्स की एक टीम भी वहां बुलाई.काफी जल्दी मचने के बाद भी वक्त काफी कम था.कविता मेरा हाथ पकड़कर बोली की भैया आप मेरे पास आ गये अब और कोई तमन्ना नही.अब तो मै सुकून से मर सकती हूँ.मेरा दिल बहुत रो रहा था.लेकिन मै अपने आंसू रोके हुए था.मुझे पता था की अगर मै रो पड़ा तो इन सबको कौन संभालेगा.मै काफी देर तक उन सभी को तसल्लियाँ देता रहा.लेकिन मेरी तसल्लियाँ कविता की जान नही बचा सकती थी.इतने सारे डॉक्टर्स और सबके बीच वो अकेली तड़प रही थी.12 घंटे हॉस्पिटल में आये हो चुके थे.मै और उसके पिताजी और माँ सिर्फ पानी पर गुजारा करके वहां रुके हुए थे.मैंने सोचा की इन दोनों बुजुर्गों के लिए कुछ खाने पीने को लाऊं.इतने में कविता की चीख की आवाज कानो में पड़ी,हम सभी उसकी तरफ दौड़े.उसके बिलकुल पास पहुँचते ही उसने एक हाथ में मेरा हाथ पकड़ा ,और दुसरे हाथ में अपनी माँ का हाथ पकड़ा,और उसी वक्त दम तोड़ दिया.मैंने इतनी करीब से उसकी मौत देखी थी.गम और सदमे की वजह से मै भी बेहोश होकर गिर पड़ा.जब होश आया.तो कविता अपने आखिरी सफ़र पर रवाना होने वाली थी.आज भी वो मेरा ही इन्तजार कर रही थी.उसका अंतिम संस्कार किया गया.उसके दुनिया से जाने के बाद कई माह तक मै मुस्कुरा भी नही पाया.उसकी मौत का गम ऐसा था की जैसे वो अपने साथ मुझे भी मार गई.कभी मै उसके भेजे हुए इमेल्स पढता.कभी उसकी राखी को देखता.उसकी यादों की दुनिया से बाहर आते आते मुझे काफी अरसा लग गया.कभी कभी जज्बात का रिश्ता सगे रिश्ते से काफी बढ़कर हो जाता है.
(डियर रीडर्स ,इस कहानी को लिखते हुए मुझे एक हफ्ता लगा.ये जज्बात की वो कहानी है जो इंसान को सोचने पर मजबूर कर देती है.खास कर धर्म के नाम पर लड़ने झगड़ने वालों के लिए एक नसीहत है.सबसे बड़ा रिश्ता जज्बात का रिश्ता ही होता है.जज्बात और भावनाएं कभी धर्म ,अमीरी गरीबी ,वगैरा नही देखते.आखिर हम सब इंसान ही हैं ना ,हमारे अहसास एक जैसे हैं ,हमारे जज्बात एक जैसे हैं.हमारे दिल भी एक जैसे हैं.फर्क है सिर्फ हमारी सोच में.जिसे हमे बदलना चाहिए.) ये कहानी अगर इस लायक है की आप इस पर कोई कमेंट्स दें ,तो आप जरुर अपनी राय रखें.सिर्फ रस्मी टिपण्णी करने के बजाय ,आप कहानी के बारे में ,इसे पढ़कर ही अपनी कीमती राय रखें.आप सभी के लिए ये एक तोहफा है इस रक्षा बंधन का.उम्मीद है की आप इसे पसंद करेंगे.आप सभी को आमिर की शुभकामनायें.
इन्कार

इन्कार

रात के अँधेरे में बैठ कर वो अपने आंसू बहा रहा था। उसे लगता था की वो अब और जी नही पायेगा। रह रह कर उसे वो घटना याद आती थी। किसी की याद उसे हर समय जला रही थी। वो एक मामूली सा मास्टर था। जो की कम तनख्वा में सिर्फ अपना खर्च ही चला सकता था। ऐसे में शायद उसे इस बात का अधिकार ना था की वो किसी से मोहब्बत करे। क्यूँ की आज के इस दौर में मोहब्बत की मंजिल पाने के लिए करियर भी काफी जरुरी होता है। लेकिन उसने मोहब्बत तो कर ली थी। वो तो हमेशां यही सोचता था की हिंदी फिल्मो की तरह वो भी अपनी मोहब्बत को पा लेगा। लेकिन शायद फिल्म और हकीकत में यही फर्क है। उसे याद था की जब वो अपनी महबूबा से मिला था तो उसने कहा था की जल्द घर वालों को रिश्ता लेकर भेज दो वर्ना कोई और बीच में आ जायेगा। और घर वाले उसका रिश्ता कहीं और कर देंगे। ये तो इसका दिल जानता था की कैसे इसने घर के एक एक मेंबर को अपने रिश्ते के लिए तैयार किया था। समय गुजरते गुजरते सारे घर वाले इस रिश्ते के लिए राजी हो चुके थे।बस देर थी उनके घर रिश्ता लेकर जाने की।

वहां से उसने भी ये यकीन दिला दिया था की इनकार नही होने देगी। लेकिन होनी को कोई ताल नही सकता। उस लड़की की माँ और बहने ही ये चाहती थी की इस लड़के से इसका रिश्ता कर दिया जाये। और उसके पिता की सोच कुछ अलग थी। रिश्ता पक्का करने के लिए इसने जब उनके घर अपने घर वालों को भेजा। तो उन्होंने बड़ी खातिर तवजोह की। और लड़की की माँ ने फोन करके अपने शौहर को बुलाया ,और बताया की आपकी बेटी का रिश्ता आया है। आखिर लड़की के पिता घर आये। और उन्होंने इन रिश्ता लेकर आने वालों से बड़ी ही मोहब्बत से मुलाकात की। और गुफ्तगू शुरू की। इस बीच लड़की के पिता ने पूछा की आपका लड़का करता क्या है ? तो उन्होंने जवाब दिया ,की अभी तो सिर्फ एक मास्टर ही है। तो वो बोले की माफ़ कीजियेगा ,मै अपनी बेटी का हाथ ऐसे लड़के के हाथ में नही दे सकता जिसका अपना कोई करियर ही नही है। वो मेरी बेटी को कैसे खुश रखेगा। तो इन्होने जवाब दिया की लड़का लड़की आपस में मोहब्बत करते हैं।

तो वो बोले की सिर्फ मोहब्बत से घर नही चला करते। घर चलाने के लिए आमदनी की जरुरत होती है। और आपके लड़की की इतनी आमदनी नही है की वो मेरी बेटी को खुश रख सके। पहले अपने लड़के का करियर बनाओ ,फिर उसकी शादी की फ़िक्र करो। ये सब बातें सुनकर घर वाले खली हाथ लौट आये। जब इसने पूछा की अम्मा क्या हुआ ? रिश्ता पक्का हुआ या नही ? तो घर वालों ने बताया की ये ये बात हुई। और उन्होंने कहा की पहले अपने लड़के का करियर बनाओ। फिर शादी के लिए सोचना। ये सुनकर उसे बड़ा सदमा हुआ। लेकिन दुसरे ही पल उसने कुछ कर गुजरने की ठान ली। और करियर के लिए कोशिशें करना शुरू कर दीं। करियर बनते बनते 2 साल लग गये ,और पता चला की उस लड़की की शादी भी हो चुकी थी। इसके लिए ये ऐसा ही था जैसे कोई बुलंदी पर चढ़कर निचे गिर गया हो। सब कुछ पाकर भी खाली हाथ रह गया।

आज के नवजवानों को चाहिए की मोहब्बत और शादी के सपने देखने के साथ साथ अपने करियर की तरफ भी तवज्जोह दें। अगर आप अच्छी जॉब करते होंगे ,अच्छी आमदनी होगी ,तो ही आप अपनी मोहब्बत को खुश रख सकेंगे। सब कुछ छोड़ कर सिर्फ मोहब्बत के पीछे दौड़ना ,और ये उम्मीद करना की हिंदी फिल्मो की तरह का अंत होगा ,ये समझदारी नही है। सबसे पहले एक काबिल इंसान बनने की कोशिश करनी चाहिए। जो समय की कद्र करता है समय भी उसकी कद्र करता है। जो अपने समय को बर्बाद करता है ,सिवाय पछतावे के उसे कुछ हासिल नही होता। इस लघु कथा के जरिये मै सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूँ। 

                                                           ''आमिर अली दुबई'' ....

अजब प्रेम

अजब प्रेम

 एक बार एक  लड़का  था जो एक लड़की से बहुत प्रेम करता था ,रोजाना उसे आते जाते देखता  और अपना दिल बहलाता।कई दिन ऐसे ही गुजर गये।एक दिन उसने सोचा की अब अपने प्रेम का इजहार कर देना चाहिए ,वो लड़की जब आई तो उसने उस लड़की से कहा की मुझे आपसे बहुत ज्यादा मोहब्बत हो गई है।मै रोजाना आपके इन्तजार में कई घंटों तक यहाँ खड़ा रहता हूँ।आप मेरी मोहब्बत को कबूल कर लें।मै आपसे शादी करना चाहता हूँ।इसपर लड़की बोली की तुम्हारे पास क्या है।मै तो ऐसे लड़के से शादी करुँगी जो योरप में नौकरी करता हो।जिसके पास रहने को अपना फ्लेट हो ,अपनी खुद की कार हो।नौकर चाकर हों।बैंक बैलेंस हो।वो लड़का मायूस हो कर चला गया।उसके बाद कई सालों तक वो नज़र नही आया।इन सालों में लड़की की शादी भी हो गई।और वो योरप में सेट भी हो गई।उसके पति के पास फ़्लैट ,कारें वगैरा सब कुछ था,जिसकी उसको ख्वाहिश थी।एक दिन वो लड़की योरप में किसी शोपिंग होल में घूम रही थी,अचानक उसके सामने वही लड़का आ गया ,जिसने बरसों पहले उससे प्रेम का इजहार किया था।एक बार तो लड़की चौंक पड़ी।फिर उसने पूछा की कैसी हैं आप ? तो लड़की ने जवाब देते हुए कहा की आज हमारे पास नौकरी है ,नौकर हैं ,बैंक बैलेंस भी है,कारें भी हैं,और दौलत भी है।जैसा की मैंने बरसों पहले आपके सामने तमन्ना का इजहार किया था।आज मै इन बड़े बड़े शोपिंग मोल में शोपिंग करती हूँ।और आज मेरी बरसों की तमन्ना पूरी हो चुकी है।और आप सुनाएँ आप आज कल क्या काम काज करते हैं।वो लड़का कुछ जवाब देता इससे पहले लड़की का पति आ गया।उसने चौंकते हुए कहा की ''सर आप और यहाँ ?'' आप इतने छोटे से शोपिंग मोल में कैसे ,ये तो हम जैसे गरीबों के लिए है।फिर उसने अपनी बीवी से इंट्रोडेकशन करवाते हुए कहा की इनसे मिलो ''ये हमारी कम्पनी के मालिक हैं।मै इन्ही की कम्पनी में जॉब करता हूँ।आज मेरे पास जो कुछ भी है ,वो सब इन्ही की देन है।सब इन्ही का दिया हुआ है।मुझे तो बड़ी हैरत हुई की सर इतने छोटे से शोपिंग मोल में कैसे आ गये।जबकि इनके खुद के 50 बड़े शोपिंग सेंटर हैं।फिर उसने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए अपनी बीवी से कहा की सर किसी लड़की से प्रेम करते थे ,और वो नही मिली इसलिए सर ने अभी तक शादी भी नही की। अपने पति की बातें सुनकर वो बुत बनी चुपचाप हैरत से देखती रही।लेकिन कुछ ना बोल सकी।और ना ही उस लड़के को कुछ कहने की नौबत ही आई।


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''आमिर दुबई.,,,
मेरा यकीन  (लव स्टोरी )

मेरा यकीन (लव स्टोरी )

एक लड़की के जज्बात की कहानी.उसी की जुबानी.जिसमे उसका यकीन साफ़ झलकता है.जिसने मोहब्बत पर कामिल यकीन के जरिये अपनी मोहब्बत को अपनी किस्मत से पाया.और अपने माँ बाप को भी रुसवाई से बचाया.आइये जानते हैं कैसे ?


तमन्नाएँ किसकी नही होती की कोई हमे बहुत प्यार करे.हमारे लिए अपनी जिन्दगी कुर्बान कर दे.हमारी पसंद ना पसंद का ख्याल रखे.इसी तरह मेरी भी ये तमन्नाएँ थी.मै दसवीं  में पढ़ती थी.जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी थी. सहेलियों से प्यार के किस्से सुन सुन कर मेरा भी दिल करता की काश मुझे भी कोई चाहता.आखिर मेरी ये तमन्ना भी पूरी हुई.मेरे ही एक क्लास फेलो ने मुझे छुट्टी के वक्त एक कागज़ का टुकड़ा थमा दिया.और बोला की इसे अकेले में पढना.और बुरा मत मानना.मैंने उसके ख़त को पढ़ा.पढ़कर उसकी चाहत का अहसास हुआ.सोचा की शायद इससे ज्यादा चाहने वाला मुझे दुनिया में कभी ना मिले.रात भर उसके ख़त की बातें मेरे दिमाग में घुमती रही.दिल फैसला नही कर पा रहा था की क्या करूं.आखिर सहेलियों से मशवरा किया.तो उन्होंने यही जवाब दिया की हाँ कह दे ,ऐसे चाहने वाले बार बार नही मिला करते.कुछ दिन तो सोचते हुए ही गुजर गये.आखिर कार उसके प्यार के सामने मैंने घुटने टेक ही दिए.और धीरे धीरे वो मेरी जिन्दगी में समाता गया.पहली बार किसी से प्यार हुआ.और वो भी उसकी चाहत देखकर.पर मालूम नही था की इस प्यार का एंड कैसा होगा.आज तक फिल्मो में अच्छे एंड को देख कर यही लगता था की इसका एंड भी फिल्मो की तरह अच्छा ही होगा.और आखिर में हम शादी के बंधन में बंध जायेंगे.आखिर मैंने उसके ख़त का जवाब लिखा,और उससे अपनी मोहब्बत का इजहार कर दिया.इस ख़त को पढ़कर वो बहुत खुश था.और मै उसको देख देख कर फुले नही समाती थी.शायद पहली मोहब्बत का नशा हम दोनों पर हावी हो चुका था.आखिर दिन गुजरते गये.बस हम रोजाना स्कुल के बहाने एक दुसरे के दीदार के लिए आने जाने लगे.हम दोनों में से कोई बात नही कर पाया था.बस खतो किताबत का सिलसिला ही चलता रहा.आखिर एक दिन उसने अकेले में मिलने की फरमाइश कर डाली.उसकी फरमाइश पढ़ कर मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा.और काफी देर तक सोचती रही.सोचा की मिलूंगी तो ना जाने क्या होगा.लोग क्या कहेंगे ,और ना मिली तो वो नाराज़ हो जायेंगे.आखिर दिल के हाथों मजबूर होकर उससे मिलने भी गई.
काफी देर तक हम बातें करते रहे.और आपस में काफी खुल गये.और उसके बाद से हम कई बार मिले और प्यार का इजहार भी हुआ.एक दिन हम पार्क में बेठे हुए बातें कर रहे थे.तो हमारे किसी रिश्तेदार ने देख लिया.और उसने मेरे घर पर आकर सब कुछ बता दिया.उसके बाद तो घर वालों ने मुझ पर काफी सख्ती करना शुरू कर दिया.और साथ में ये भी कह दिया की बस इम्तिहान ख़तम हो जाएँ तो बस आगे हम नही पढ़ाएंगे.इतनी पढाई काफी है.कोन सा तुमने नौकरी करनी है.अब स्कुल भी कोई ना कोई छोड़ने जाता और छुट्टी को लेने आता.कुल मिलाकर घर वालों का मुझ पर से भरोसा ही उठ गया.मै मन ही मन जलती रहती.और उससे ख़त के जरिये ही बात चीत होती रहती.उसके बाद मिलना बहुत ज्यादा मुश्किल हो गया.आखिर कार इम्तिहान भी आ गये.और इम्तिहान के बाद मुझे स्कुल भी छुड़ा दी गई.अब मै घर में घुटती रहती.और उससे मिलने को तरसती रहती.उधर उसका भी हाल बुरा था.वो हमारे घर के आस पास चक्कर लगाता ,मगर दोनों ही मजबूर थे.घर छोड़कर भाग नही सकते थे ,की घर वालों की इज्जत का सवाल था.मेरी सहेलियां मुझसे मिलने आती तो उनके साथ वो ख़त भेज दिया करता ,और मै भी उन्ही के साथ जवाब लिख कर भेज देती.आखिर मेरी सहेलियों को भी मेरे घर वालों ने खतों के साथ पकड़ लिया.उसके बाद मुझ पर और भी ज्यादा मुश्किल होने लगी.मै सब्र करती रही.और दुआ करती रही.एक दिन उसका ख़त मेरे पास किसी तरह पहुंचा उसमे उसने लिखा था की अब जुदाई बर्दाश्त नही होती ,चलो दोनों घर छोड़कर भाग चलें.और कोर्ट मेरेज कर लें.लेकिन मुझे ये रास्ता सही नही लगा.मैंने सोचा की इस काम के करने से मै अपनी मोहब्बत तो पा लुंगी ,लेकिन मेरे माँ बाप की इज्जत का क्या होगा.वो तो सर उठाकर जी भी नही सकेंगे.समाज में लोग उनको बुरा भला कहेंगे.और मै एक बार इस तरह चली भी गई तो बाबा मुझे दुबारा घर में नही आने देंगे.अगर कुछ गलत हो गया तो मै कहीं की भी नही रहूंगी.इन सब बातों को सोचकर मैंने उसके जवाब में इनकार लिख कर भेज दिया.मेरे जवाब को पढ़कर उसको बहुत ज्यादा सदमा तो हुआ.साथ ही मैंने ये भी लिख दिया था की 
''अगर किस्मत में हमारा साथ लिखा है तो कोई हमे जुदा नही कर सकता ,और अगर किस्मत में ही हमारा साथ नही है तो कोई हमे मिला नही सकता.''उसके बाद से उसने मेरे घर के आस पास आना भी छोड़ दिया.मुझे भी इस बात से बहुत दुःख हुआ.लेकिन मैंने अपनी मोहब्बत को अपने माँ बाप की इज्जत पर कुर्बान कर दिया था.मोहब्बत ना मिली तो यादों के सहारे ही जी लुंगी लेकिन मेरे माँ बाप की इज्जत चली गई तो वो लौटकर कभी नही आ सकती.आखिर कार घर वाले भी मुझसे परेशान होने लगे.इसलिए उन्होंने मेरे हाथ पीले करने का इरादा कर लिया.और किसी जगह पर मेरी मंगनी कर दी.मै फिर भी चुप रही.और सब्र करती रही.और दुआ करती रही.हिम्मत मैंने कभी भी नही हारी.मुझे पूरा यकीन था की मै अपनी मोहब्बत को जरुर हासिल कर लुंगी.लेकिन हालात मेरे सामने थे.आखिर कार मेरी शादी की तारीख भी मुक़र्रर कर दी गई.मेरे महबूब को भी इसकी खबर मिल गई.वो बहुत दुखी हुआ.उसकी तसल्ली के लिए मैंने उसे एक ख़त लिख कर भेजा.मैंने लिखा की आप मेरी शादी की खबर से हिम्मत मत हारना.और दुखी नही होना.मुझे देखो मैंने औरत होकर भी हिम्मत नही हारी.और आप मर्द होकर हिम्मत हार जायेंगे तो फिर कैसे होगा.आप चिंता ना करें एक दिन हम जरुर मिलेंगे.चाहे मेरी शादी किसी से भी हो,लेकिन मुझे पूरा यकीन है की हमारी मोहब्बत सच्ची है ,हम जरुर मिलेंगे.मेरे ख़त से उसे होंसला तो मिला.लेकिन उसने जवाब में लिखा की क्या आप शाहरुख़ खान हैं जो एन वक्त पर बाजी बदल देंगी.लेकिन मैंने उसकी बात का बुरा नही माना.उसे क्या पता की सिर्फ शाहरुख़ खान ही नही बल्कि सच्ची मोहब्बत भी कभी कभी अपना असर दिखा देती है.खैर,शादी की तारीख भी नजदीक आ गई.
और बारात भी हमारे घर आ गई.बाराती नाचते कूदते ,नशे में धुत्त ,हमारे घर आये.मेरे महबूब को भी मैंने शादी का कार्ड भेजा था और कसम देकर उसे बुलाया था.इसलिए वो मेरी दी हुई कसम पूरी करने के लिए मेरी शादी में आये थे.बारातियों ने खूब हंगामा किया.मेरे बाबा बहुत ज्यादा गुस्सेल हैं ये बात मुझे पता थी.लेकिन आज इन शराबियों को कैसे बर्दाश्त कर रहे थे ये समझ में नही आ रहा था.खैर ,बारातियों ने तो खूब हंगामा किया.यहाँ तक की खुले आम शराब पी.बाबा सब्र करते रहे.आखिर निकाह का वक्त भी आया.तो दुल्हे ने मेरे बाबा से कहा की मुझे 5 लाख रूपए भी दहेज़ में चाहियें.अगर आप देते हों तो ही मै निकाह करूँगा वरना नही.मजबूर होकर बाबा ने उसकी वो शर्त भी मान ली.इतने में बारातियों में से किसी ने मेरी छोटी बहन को छेड़ दिया.और उसने आकर बाबा को बता दिया.और बाबा का सब्र टूट गया.उन्होंने एक डंडा लेकर उस बाराती की पिटाई करना शुरू कर दी.ये देख कर दुल्हे के घर वाले अड़ गये की हम बिना शादी किये ही चले जायेंगे.आपने इसे मारा तो मारा क्यूँ.इत्तिफाक से जिसे मारा था वो दुल्हे का चचेरा भाई था.काफी बहस बाजी होती रही.आखिर बाबा ने उन्हें घर से निकाल दिया.और कहा की मै तुम जैसे शराबियों को अपनी बेटी कभी भी नही दूंगा.मै तो अपनी इज्जत की वजह से चुप था वरना बारात आते ही मेरा दिमाग तो खिसक गया था.उनको बे इज्जत करके निकलने के बाद लोगों ने बाबा को समझाया की आपकी बेटी का क्या होगा.उसकी जिन्दगी ख़राब हो जाएगी.उससे दुबारा कौन शादी करेगा.बाबा क्यूँ की मेरी मोहब्बत से वाकिफ तो थे ही.और मेरे महबूब को भी शादी में देख चुके थे.उसे बुलाया और बोले की अगर तू मेरी बेटी से वाकई प्यार करता है तो आज इसका हाथ थाम ,और हमारे खानदान की इज्जत को बचा.वरना दुबारा इस महल्ले में भी नज़र आया तो तेरी खैर नही है.वो क्यों की मुझसे सच्चा प्यार करता था ,बाबा के कहते ही उसने सबके सामने मेरा हाथ थाम लिया और बोला की मै अभी इसी वक्त इससे शादी करने के लिए तैयार हूँ.और इस तरह हमारी शादी भी हो गई.शादी के बाद उसको यकीन नही हो रहा था की आज हम पति पत्नी हो चुके हैं.
वो मुझसे बोले की आखिर तुम्हारा यकीन रंग लाया.तो मैंने उनसे कहा की मैंने अपनी मोहब्बत की क़ुरबानी देकर अपने माँ बाप की इज्जत को बचाया ,तो मेरे रब ने मुझे मेरी मोहब्बत दिला दी.इसलिए मै सभी को यही पैगाम देती हूँ की माँ बाप की इज्जत से बढ़कर दुनिया में कुछ भी नही है.अगर मोहब्बत किस्मत में है तो जरुर मिल जाएगी.अगर किस्मत में नही है तो कितनी भी कोशिश करो नही पा सकते.दूसरा ये की अपनी मोहब्बत की जीत का पूरा यकीन भी होना चाहिए.उसके घर वाले भी खुश थे.क्यूँ की वो मुझे पहले ही से पसंद करते थे.मेरी सहेलियां भी खुश थीं,और मेरी किस्मत पर नाज़ कर रही थीं.और शरारत भरी मुस्कान बिखेरते हुए बोली की तू तो सबकी ही गुरु निकली यार.तो मैंने उनसे कहा की शाहरुख़ खान की भी ? तो हँसते हुए बोली की हाँ ,वो तो सिर्फ फिल्मो में ही बाजी बदलता है तुने तो रियल लाइफ में भी बाजी बदल डाली.इस तरह हँसते मुस्कुराते मेरी नई जिन्दगी का आगाज हुआ.उस दिन से मेरे शोहर भी मुझे अपने से ज्यादा इंटेलिजेंट कहते हैं.हालाँकि मेरा तो सिर्फ यकीन ही था ,लेकिन मेरे रब ने मेरे माँ बाप की इज्जत भी बचाई और मेरी मोहब्बत भी दिलाई.

 (नोट : इस कहानी की सभी घटनाएँ काल्पनिक हैं इसका किसी जीवित या मुर्दा व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नही.अगर किसी की रियल लाइफ से मेच होती हो तो ये सिर्फ एक संयोग है.)

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''आमिर दुबई.,,,

दर्द भरी दास्तान

दर्द भरी दास्तान


दो लड़के पैदा होने के बाद बाबूजी की बड़ी ख्वाहिश थी की लड़की पैदा हो.आखिर एक दिन माँ ने बाबूजी को बताया की वो गर्भवती हैं.तो बाबूजी बहुत खुश थे.और दिल ही दिल दुआ कर रहे थे की इस बार बेटी पैदा हो तो मेरी आँखें ठंडी हों.आखिर वो दिन भी आ ही गया जब बाबूजी के कानो से ये खबर टकराई ,की मुबारक हो आपके घर बेटी पैदा हुई है.बाबूजी के तो ख़ुशी के मारे आंसू निकल आये.और रब का शुक्र अदा करने लगे.और अच्छी तरह से नहा धो कर तैयार हो कर नये कपडे पहन कर अपनी बेटी का पहली बार दीदार करने अपनी बैगम के पास पहुंचे.उनकी ख़ुशी छुपाये से भी नही छुपती थी.गोया की आज दिल की तमन्ना पूरी हो गई थी.बेटी के प्यार के मोह में वो अपने बेटों को भी भूल गये.और उनसे ज्यादा वो अपनी बेटी को प्यार करने लगे.बेटी बड़ी होती गई.और बाबूजी हर काम में सबसे ज्यादा बेटी को ही तरजीह देते.कोई चीज भी लाते तो बेटी को दुगुनी देते.लड़कों को तो उन्होंने आम स्कुल में पढने के लिए भेजा था.लेकिन बेटी जान के लिए ख़ास इंग्लिस मीडियम स्कुल चुना गया.बेटी के लिए हर माह कुछ न कुछ नई चीजें लायी जाती.उसकी हर हर तमन्ना और जिद को पूरा किया जाता.कपड़ों और जूतों की तो गिनती भी नही की जा सकती ,इतने उसके लिए आते.उसकी आँखों में आंसू भी आ जाते तो बाबूजी पूरा घर सर पर उठा लेते.उस नन्ही सी बच्ची को कोई कुछ भी नही कहता ,ना डांट ,डपट ,ना मार पीट ,बल्कि कोई उसको घुर कर भी देख लेता तो बाबूजी गुस्से में फट पड़ते.उसे अपने हाथों से छोटे छोटे लुकमे बनाकर खाना खिलाते.उसकी पसंद की हर चीज उसे लाकर देते.सुबह बाबूजी घर से निकलते तो उसका चेहरा देख कर उसे प्यार करके लाड करके फिर घर से निकलते.और घर में आते ही सबसे पहले उसे गोद में लेते.रोजाना उसके लिए कुछ ना कुछ लाते.उसके साथ खूब वक्त बिताते.उसकी छोटी छोटी शरारतों पर मुस्कुराते.और उसके इस बचपने को लम्हा लम्हा जीते.कभी भी बाबूजी ने उसकी मर्जी के खिलाफ कोई काम नही किया.और कोई भी चीज हो उसकी पसंद के मुताबिक ही लाई जाती थी.आखिर बेबी की उम्र भी बढती गई.आखिर वो जवानी की दहलीज़ पर कदम रख चुकी थी.लेकिन बाबूजी के लिए तो आज भी वो बच्ची ही थी.उसने स्कुल की पढाई पूरी करने के बाद कोलेज में एडमिशन की जिद की.तो बाबूजी ने उसे कोलेज में भी एडमिशन दिलवा दिया.इतने लाड प्यार से पली बेबी ये अच्छी तरह जानती थी की बाबूजी की सबसे बड़ी कमजोरी वही है.बाबूजी उससे उसकी माँ से भी ज्यादा प्यार करते थे.बल्कि ये कह लें की दुनिया में बाबूजी के सबसे करीब अगर कोई था तो वो सिर्फ बेबी ही थी.बेटों से तो बाबूजी सिर्फ जितनी जरुरत होती उतनी ही बात चित करते थे.लेकिन बेबी के साथ वो घंटों बेठे रहते थे.खाना भी उसी के साथ खाते थे.अगर वो कहीं चली जाती तो बाबूजी के हलक से खाना भी निचे नही उतरता था.आखिर खाना छोड़कर उसका इन्तजार करते.इसी तरह बेटे भी अपनी बहन बेबी से बहुत प्यार करते थे.चाहे वो कुछ भी करे मगर उसके भाइयों की इतनी हिम्मत नही थी की उस पर कोई रोक टोक कर सके.क्यों की उस पर रोक टोक करना सीधा बाबूजी से पंगा मोल लेने के बराबर था.पुरे घर में बेबी का ही हुक्म चलता था.क्यूँ की वो बाबूजी की चहेती थी.और बाबूजी का रोब सब पर था.कोलेज में कुछ साल तो ऐसे ही गुजरते चले गये.बेबी हर साल अच्छे नम्बर्स लाकर पास भी होती रही.और उसे जहाँ भी ट्यूशन करना होता वहां वो कर सकती थी.बाबूजी ने अपनी कमाई पूरी बेबी पर ही कुर्बान कर रखी थी.बाबूजी चाहते थे की बेबी खूब पढ़े लिखे और डॉक्टर बने ,ताकि जिन्दगी में कभी उसका पति उसका साथ छोड़ भी दे तो वो अपनी जिन्दगी खुद अपनी कमाई से गुजार सके.और बेबी कभी भी किसी की मोहताज ना हो.बाबूजी ने अपनी बेबी के करियर की खातिर अपना सब कुछ हंसी ख़ुशी कुरबार कर दिया.और दूसरी तरफ बेटे भी थे जिनके करियर को बनाने के लिए बाबूजी ने कभी भी दिलचस्पी नही दिखाई.हमेशा यही कहते की बेटी तो अमानत है,एक दिन दुसरे घर चली जाएगी.और तुम तो मर्द हो खुद अपने बाजुओं से कमा सकते हो.लेकिन मेरी बेटी क्या करेगी.इसकी जिन्दगी बनाना मेरा फर्ज़ है.कहीं ऐसा ना हो की मेरी बेटी का पति नाकारा निकल जाये तो मेरी बेटी भूखी रहेगी .मै चाहता हूँ की मेरी बेटी अपने पाऊँ पर खड़ी हो ताकि जिन्दगी में कभी भी दुःख या तकलीफ में ना आये.पूरा परिवार बाबूजी के फेसले का आदर करता था.और बेबी के मामले में बाबूजी किसी की कोई राय नही मानते थे.सिर्फ बेबी की अपनी मर्जी ही चलती थी.बाबूजी अपनी बेटी के प्यार में अंधे हो चुके थे.एक दिन बेटे ने आकर बाबूजी को बताया की बाबूजी बेबी का सेम नाम के लड़के के साथ अफेयर चल रहा है.इस पर बाबूजी ने बगैर किसी जांच पड़ताल किये उस बेटे को बुरी तरह से मारना शुरू कर दिया.और रोते हुए बोले की तुम मेरी बेबी के बारे में इस तरह की बात करते हो.मगर उन्हें क्या मालूम था की बेबी बहुत आगे निकल चुकी थी.बेबी सेम से प्यार करने लगी थी.और सेम उन्ही के मोहल्ले का एक प्ले बॉय टाइप का लड़का था.वो पहले भी कई लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फंसा चुका था.और उनकी इज्जत से खेल कर उनको बर्बाद कर चुका था.उसके बारे में सबको पता था.लेकिन बेबी उसके प्यार में अंधी हो चुकी थी.बाबूजी ने जब पता लगाया तो बेटे की बात सही निकली.पुरे शहर में सेम और बेबी के प्यार के किस्से मशहूर हो चुके थे.आखिर बाबूजी ने एक दिन बेबी से पूछा की बेटी ये क्या मामला है ? तो बेबी ने जवाब दिया की बाबूजी मै सेम से प्यार करती हूँ ,और उससे शादी करना चाहती हूँ.बाबूजी जो की किसी अच्छे लड़के से जो की बेबी को खुश रख सके ,से उसका रिश्ता करना चाहते थे .लेकिन बेटी के इन अलफ़ाज़ ने उनका दिल टुकड़े टुकड़े कर दिया.उन्होंने उसको समझाने की बहुत कोशिश की की बेटी वो प्ले बॉय है पहले भी लड़कियों को लेकर भाग चुका है.उनकी जिंदगियां ख़राब कर चुका है.लेकिन बेबी उसके खिलाफ कुछ भी सुनने को तैयार नही थी.वो कहती की सेम जैसा भी है ,मै सिर्फ उसकी ही हूँ.अगर किसी ने मुझे उससे जुदा करने की बात भी सोची तो मै अपनी जान दे दूंगी.बाबूजी ने पहली बार उस पर हाथ उठाया.और जोर से एक थप्पड़ रसीद कर दिया.इस पर वो काफी देर रोती रही.और बाबूजी भी अपने हाथ को दीवार पर मारते रहे की तू क्यूँ कर मेरी बेबी पर उठा.लेकिन बेबी अब हाथ से निकल चुकी थी.घर वालों ने बेबी को समझाने की बहुत कोशिश की मगर नाकाम रहे.उसकी सिर्फ यही जिद थी की मुझे सेम दिलादो.और मुझे कुछ नही चाहिए.उसके भाई अगर उसे सेम के बारे में कुछ कहते तो वो कहती की तुम सब मेरे दुश्मन हो.तुम नही चाहते की सेम से मेरी शादी हो.मैंने सेम से सच्चा प्यार किया है.वो बाबूजी जिनको देख कर लोग सलाम करते थे ,आज उनकी इज्जत सरे बाजार नीलाम हो चुकी थी.लोग तरह तरह की बातें करते थे.कभी अफवाह फैलती की बेबी ने जहर खा लिया है ,तो कभी अफवाह फैलती की बेबी सेम के साथ घर छोड़कर भाग गई है.इस तरह अफवाहों का बाजार गरम रहता.बेबी और सेम के किस्से और अफवाहें सुन सुनकर बाबूजी सदमे से निढाल हो चुके थे.कभी दीवार से सर टकराते.तो कभी रात रात भर रोते रहते.उधर सेम भी बेबी से प्यार का दावा करता था.और सबके सामने उसके प्यार के किस्से बयां करता.बाबूजी सेम को एक परसेंट भी पसंद नही करते थे.क्यूँ की वो उससे वाकिफ थे.लेकिन वो अपनी बेबी की जिन्दगी से उसे निकलने की ताकत नही रखते थे.हर तरह से समझाने के बावजूद भी बेबी के तेवर और ज्यादा बागी होते गये.और उसकी जिद्द दिनों दिन बढती ही चली गई.यहाँ तक की वो बाबूजी का सामना भी नही करती.ना उनके साथ खाना खाती.और ना उनके सामने आती.जितनी देर वो घर में रहते बेबी उनके सामने नही आती.जब वो घर से चले जाते ,तब ये बाहर निकल कर अपनी माँ के पास जाती.बेबस बाबूजी के दर्द को कोई भी नही समझ पा रहा था.और ना ही कोई उनको होंसला दे सकता था.इन्ही गमो की वजह से बाबूजी कई बिमारियों के शिकार भी हो गये.दिनों दिन उनकी हालत खराब से खराब होती चली गई.बेटे उनके गम को देख कर रोते धोते उनको तसल्लियाँ देते.लेकिन जान से प्यारी बेबी सिर्फ सेम के लिए ही जी रही थी.वो सोचती की बाबूजी दुनिया से चले जाएँ तो मै अपनी मोहब्बत को हासिल कर सकती हूँ.क्यूँ की बाबूजी को जीते जी मनाना आसान नही था.वो अपनी मोहब्बत और अपने प्यार को पाने के लिए अपने बाबूजी की क़ुरबानी देने के लिए तैयार थी.लेकिन बद नसीब बाबूजी बिचारा जिए ही जा रहा था.उसकी हालत तो ऐसी हो गई थी की वो कभी भी दुनिया से जा सकता था.लेकिन अब तक भी वो अपनी बेबी के नाम को ले ले कर जिए जा रहा था.और बेबी दुनिया में सबसे बड़ा काँटा अपने बाबूजी को ही समझ रही थी.जब बाबूजी ने एक दिन समझाते हुए बेबी से कहा की तू जहाँ बोलेगी मै तेरी शादी करवा दूंगा लेकिन इस लड़के से तेरी शादी नही करवा सकता.तो बेबी बोली की बाबूजी आपने आज तक मेरे लिए किया ही क्या है ? आप तो हमेशा अपनी मर्जी और जोर जबरदस्ती से हम सब को चलाते आये हो.आखिर कब तक हम आपकी गुलामी की जिन्दगी गुजारेंगे.आखिर हमारी अपनी भी कोई जिन्दगी है.हम भी कोई हक़ रखते हैं.हमारी जिन्दगी है इस पर हम ही फैसला करेंगे की हमे किसके साथ गुजारनी है और किसके साथ नही.आप हमारी जिन्दगी में कोई दखल अंदाजी ना करें तो बेहतर है.आपको सेम पसंद नही लेकिन मै उससे प्यार करती हूँ.और उसके बिना नही रह सकती.फिर उसने अपने दोनों भाइयों की तरफ इशारा करते हुए कहा की मुझे पता है की ये दोनों आपके कान भरते रहते हैं.और आप इनके बहकावे में आकर मेरी बात को और मेरे प्यार को समझ ही पाते.उसकी इन बातों ने बाबूजी के दिल के टुकड़े कर दिए.बाबूजी रोने लगे.और काफी देर तक रोते रहे.दोनों बेटे बाबूजी को सँभालने की कोशिश करते रहे.एक बेटे ने तो यहाँ तक देखा की रात को बाबूजी बेबी के कमरे में जाते और उसके कदमो में बैठकर रोते.और उसके जागने से पहले वापस आ जाते.जब तक बेबी सोती नही थी तब तक बाबूजी भी नही सोते.और सोते भी तो रात को करवट बदल बदल कर बेबी के कमरे को देखते रहते.वो इतने मजबूर और लाचार हो चुके थे की बेटी को समझा भी नही सकते थे.और उसकी शादी उसकी पसंद से करवा भी नही सकते थे.क्यूँ की वो जीते जी अपनी बेटी को कुएं में नही डालना चाहते थे.लेकिन बेटी इस बात को समझ नही पा रही थी.बेबी के भाइयों ने सेम के कारनामो के सबूत तक उसको दिखा दिए लेकिन उसको उन पर कोई यकीन नही था.आखिर बाबूजी ने ही सेम से मिलने का फैसला किया.बाबूजी ने उसे बहुत समझाया की तुम मेरी बेटी का पीछा छोड़ दो.लेकिन वो टस से मस ना हुआ.वो भी यही दावा करता की मै सच्चा प्यार करता हूँ.लेकिन पूरा महल्ला इस बात का गवाह था की इसका बेबी के अलावा भी दो तीन लड़कियों के साथ चक्कर है.लेकिन ये बेबी के सामने यही जाहिर करता की ये सिर्फ उससे ही प्यार करता है.आज इस मोहब्बत की वजह से एक बाप और एक बेटी में मीलों का फासला हो चुका था.बेबी चोरी छुपे सेम से मिलने जाती.इसकी भनक लगने पर बाबूजी ने उसके घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी.तो सेम ने उसे एक मोबाइल भेज दिया.जिस पर वो उससे बात कर सके.बेबी मोबाइल को छुपा कर रखती थी.एक दो बार वो भी पकड़ा गया.लेकिन फिर भी उसके पास मोबाइल ना जाने कहाँ से आ जाते. दो तीन बार इस तरह के कारनामे पकड़ने के बाद बाबूजी ने बेबी को डांटा.और एक आद बार हाथ भी उठाया.बेबी उन्हें अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझने लग गई.एक दिन बाबूजी रात को लेटे हुए करवटें बदल रहे थे.एक दम से माँ ने आकर बताया की उठो जी बेबी ने अभी नींद की गोलियां खा लीं हैं.ये सुनकर बाबूजी के पाऊं के निचे से जमीन खिसक गई.उसी वक्त वो उसे अस्पताल लेकर गये.और उसके पेट की सफाई करवाई.और वो नींद की गोलियां निकलवाई.लेकिन इसकी भी भनक लोगों को लग गई.और उन्होंने ये अफवाह उड़ा दी की बेबी प्रेग्नेट थी.बाबूजी हर तरह से मायूस हो गये.आखिर कार उन्होंने बेबी की शादी सेम से करने का इरादा कर लिया.और इन दोनों की शादी की तारीख भी तय कर दी.राजी ख़ुशी इनकी शादी करवा दी गई.और कुछ दिनों तक तो सब ठीक ठाक चलता रहा ,मगर बाद में सेम ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया.वो शराब पीकर आता और बेबी को पिटता ,.और उससे डिमांड करता की अपने बाप से ये लाओ ,वो लाओ.बेबी घर आकर   रोती.और माँ उस पर तरस खा कर उसकी डिमांड पूरी कर देती.लेकिन बाबूजी ने बेबी की शादी करने के बाद उससे रिश्ता तोड़ सा लिया था.वो घर में आती तब भी उससे बात ना करते.और रात दिन उसके गम में घुलते रहते.इसी गम और सदमे में बाबूजी इस दुनिया से चल बसे.बाबूजी के दुनिया से जाने के बाद माँ भी कुछ दिनों बाद बीमार रहने लगी.और उसकी आवाज बंद हो गई.इस घर पर मुसीबतों के पहाड़ टूटते रहे.और खुशियाँ ख़तम सी हो गई थीं.इतने में ये भी खबर मिली की बेबी को सेम ने छोड़ दिया है.वो प्रेग्नेट भी हो चुकी थी.और इस बिच सेम ने उसको तलाक दे दिया.आखिर कार उन मजलूम भाइयों ने जिन्दगी भर अपनी बहन को निभाया.आज बेबी को अहसास हुआ की पिता क्या थे.बाबूजी का नाम आते ही उसकी आँखों से आंसू आ जाते.आज उसे अपने पिता की मजलुमियत का अहसास हो चुका था.उसे अपने पिता की बहुत याद आती थी.काश की वो उनसे माफ़ी मांग सकती. इस कहानी को लिखने के बाद मै उन लोगों से सवाल करता हूँ जो की हमेशां माँ बाप को ही गलत ठहराते हैं.बताइए क्या हर बार माँ बाप ही गलत होते हैं.हालाँकि माँ बाप हमेशां अपनी औलाद का भला ही सोचते हैं.लेकिन आज कल ऐसा लगता है की मोहब्बत का सबसे बड़ा दुश्मन इन मजलूम माँ बाप को ही बना दिया गया है.घर के एक मेंबर का किसी से मोहब्बत करना और माँ बाप से बगावत करना ,पुरे घर वालों के चैन और सुकून को तबहो बर्बाद कर देता है.जब भी किसी का प्यार असफल होता है तो बुराई इन मजलूम माँ बाप पर डाल दी जाती है की जी माँ बाप की वजह से काम ख़राब हुआ.माँ बाप को मोहब्बत के लिए कुर्बान नही किया जाता,बल्कि इन दोनों हस्तियों के लिए अपनी मोहब्बत को कुर्बान किया जाता है.नजाने कितनी बेबियाँ अपने बाबूजी को जीते जी मार देती होंगी.क्या हर बार प्रेम ही महान है ? माँ बाप कुछ भी नही.अगर वो आपकी पसंद से आपकी शादी नही होने दे रहे तो कुछ तो वजह रही होगी.आप ना समझ हैं लेकिन वो आपके माँ बाप हैं वो हर चीज़ को समझते हैं.वो आपके लिए हमेशा सही फैसला करने की कोशिश करते हैं,पर कभी कभी आपकी किस्मत में भी तो दुःख हो सकता है ना ,की यहाँ भी माँ बाप को ही कोसते रहोगे की आपने हमारे भाग्य फोड़ डाले.यही कहानी की वजह से मैंने वो पोस्ट भेजी थी जिसका नाम था ''मोहब्बत बड़ी या इज्जत '' इस कहानी ने मुझे प्रेरित किया की मै इस गलत फहमी को ख़तम करने की कोशिश करूं की माँ बाप ही हमेशां गलत होते हैं.मोहब्बत चाहे कितनी ही बड़ी क्यूँ ना हो माँ बाप से बड़ी ही हो सकती.बल्कि दुनिया की कोई चीज़ भी माँ बाप से बड़ी नही हो सकती.

 प्रस्तुत कर्ता :   ''आमिर दुबई ''
राहे मोहब्बत 2 (हिंदी प्रेम कहानी )

राहे मोहब्बत 2 (हिंदी प्रेम कहानी )


पिछली कहानी में आपने पढ़ा था की  मै घर वापस चला आया.और घर आकर मैंने घर वालों से पूछा की जमाल साहब ने रिश्ता पक्का किया था या नही ? तो घर वालों ने यही जवाब दिया की वो सिर्फ इतना कहकर गये हैं की हम आपको एक महीने के बाद अपने घर वालों से मशवरा करके लास्ट जवाब देंगे.खैर मुझे पूरी उम्मीद थी की उनका जवाब हाँ में ही होगा.क्यूँ की सना और मै तो दिल से एक दुसरे के हो चुके थे.पिछली कहानी राहे मोहब्बत में मैंने आपसे आखिर में कुछ सवाल किये थे.और ये वादा किया था की इस कहानी को पूरा करूँगा. 

एक महिना क्या कई माह यूँ ही गुजर गये मगर कोई जवाब नही आया.आखिर कार घर वालों ने जमाल साहब के घर फोन करके जवाब तलब किया.तो जमाल साहब ने और उनके घर वालों ने बड़ा ही दिल फरेब जवाब ये दिया की हमारी भाभी को ये रिश्ता पसंद नही आया.इसलिए हम आपसे माफ़ी चाहते हैं.हमारे घर वाले तो चुप करके बैठ गये.मगर मै यही सोचता रहा की आखिर सना ने कुछ क्यूँ नही किया.क्या वो मुझे पसंद नही करती थी ? सब कुछ सही था तो आखिर इनकार क्यूँ किया गया.जब मैंने इसकी तफसील मालूम की तो पता चला की मै उनके स्टेटस के बराबर नही था.मै एक मामूली सा टीचर था.और वो अपनी बेटी को किसी अपने से भी ज्यादा सक्सेज आदमी से ब्याहना चाहते थे.मैंने सना से बात करने की कई बार कोशिश की मगर बात ना कर पाया.सना ने भी दुबारा मुझसे कभी कांटेक्ट करने की कोशिश भी नही की.इससे मै ये समझ गया की मेरी मोहब्बत शायद एक तरफ़ा ही थी.आखिर मैंने भी हिम्मत हार दी.इस तरह वक्त गुजरता गया .आखिर एक दिन मेरी भी नोकरी लग गई.और मै कमियाबियों के नये इतिहास लिखता चला गया.मैंने अपने दिलो दिमाग से सबसे पहले उस मोहब्बत को निकाला ,और पूरा ध्यान अपने करियर पर ही देने लगा.और उसे अपनी किस्मत में ना होने का समझ कर भुलाने की कोशिश करने लगा.इस तरह कई साल गुजर गये और इस बिच मेरी भी मंगनी हो गई.उधर कभी जमाल साहब ने तो कभी उनके घर वालों ने एक एक करके कई अच्छे अच्छे रिश्ते भी ठुकरा दिए.और नतीजा ये निकला की लड़कियों की उम्र आगे बढती ही चली गई.और उनके रिश्ते भी ना हो सके.अब तो ये हाल हो गया की रिश्ते आने ही बंद हो गये.अब जाकर जमाल साहब और उनके घर वालों को अक्ल आई,मगर अब बहुत देर हो चुकी थी.जमाल साहब ने बहुत कोशिश की मगर उनके रिश्ते ना हो पाए.आखिर कार उन्होंने अखबारात में भी इश्तिहार दिए ,ताकि कोई अच्छा रिश्ता आये.मगर उनको वहां भी नाकामी ही मिली.इतना पढ़ाया लिखाया ,लड़कियों को अच्छी से अच्छी तालीम भी दिलाई,मगर लापरवाही ने बहुत देर करवा दी,अब इनके रिश्ते करने ही भारी पड़ने लगे.अब तो ये अपने से निचे वालों में भी देने के लिए तैयार थे ,मगर वहां भी बात ना बन पाई.इतने साल गुजर जाने के बाद एक दिन सना ने किसी रिश्तेदार से मेरा नंबर लिया और मुझे कॉल किया.जब मैंने फोन रिसीव किया तो उसने सलाम किया.मैंने जवाब दिया.फिर उसने कहा की मै सना बोल रही हूँ.तो मैंने उसे पहचान तो लिया.फिर मैंने उससे हाल चाल वगैरा पूछे.उसने बात आगे बढ़ाते हुए कहा की मुझे माफ़ कर देना,मेरी ताई जान ने उस रिश्ते को रिजेक्ट कर दिया था.मै तो तय्यार थी.मैंने तो आपको पसंद किया था ,आपसे मोहब्बत की थी.और आपके सिवा मैंने आज तक किसी से भी मोहब्बत ना की.तो मैंने उससे कहा की उस वक्त आपको क्या हो गया था जो आपने मुझसे बात तक ना की.तो वो बोली की मैंने शर्म की वजह से आपसे बात ना की थी.क्यों की आपका रिश्ता हमारे घर वालों ने ठुकरा दिया था ,इसलिए मै ये सोच रही थी की मै आपसे नजर भी मिलाऊं तो कैसे.और मै आपको क्या जवाब देती.और मै उस वक्त क्या कर सकती थी जब घर वाले ही इस रिश्ते के खिलाफ हो गये थे.फिर उसने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा की मै अब भी आपसे ही शादी करना चाहती हूँ.और मेरे घर वाले भी इसके लिए तैयार हैं.मैंने अपने घर वालों को भी राजी कर लिया है.अब आप मुझे अपना लें.मै हमेशा आपकी खिदमत करती रहूंगी.लेकिन उसकी बातों का कोई जवाब मेरे पास ना था.फिर भी मैंने हिम्मत करके उससे कहा की सना मेरी मंगनी हो चुकी है.अब मै कुछ नही कर सकता.इस पर वो बहुत रोई.और बोली की प्लीज आप ऐसा ना करें.आप मुझे नही मिले तो मै मर जाउंगी.मेरा दिमाग भी काम नही कर रहा था की आखिर ये सच्ची है या झूठी.वो कहती रही की मेरी कुछ मजबूरियां थीं,जिसकी वजह से मै आपसे कांटेक्ट ना कर पाई.लेकिन आपने मुझसे प्यार किया है ,तो आप मेरी मजबूरियों को समझिये.उसके बाद उसने बहुत सारी बातें की जिससे मुझे यकीन दिला सके की उसने मुझसे सच्चा प्यार किया है.और वो मेरे बगैर नही रह पाएगी.लेकिन मै उसकी बातें सुनकर खामोश रहा.और काफी देर तक सोचता रहा की क्या सही है क्या गलत ? जिस दिन से मेरी मंगनी हुई है ,उस दिन से मेरी मंगेतर भी मुझे चाहने लग गई थी.और वो दिन रात मिलन के सपने सजाने लग गई थी.उससे भी एक आद बार मैंने फोन पर ही बात की थी.उसके जज्बात भी ये थे की बस उसे इंतिजार था तो सिर्फ उस दिन का जिस दिन वो मेरी बनकर मेरे घर आये.हालाँकि मै उससे मोहब्बत तो नही करता था लेकिन उसे पसंद करता था.इसी लिए मैंने उससे मंगनी की थी.दूसरी बात ये भी थी की सभी घर वालों को वही पसंद थी.लेकिन सना ?????????? मै खुद समझ नही पा रहा था की मै करूं तो क्या करूं.फिर मैंने सना के बारे में भी तहकीक की ,और मालूमात की की ये इतने साल तक क्या करती रही.तो पता ये चला की इसके घर वालों ने मुझे ठुकराया था ,और सना ने इसके बदले में उनकी पसंद के कई रिश्ते ठुकरा दिए थे.सिर्फ ये साबित करने के लिए की मै ही उसके लिए सबसे बेहतर था.वक्त गुजरते गुजरते यहाँ तक पहुंचा की मेरी मंगनी हो चुकी थी.और सना अब अपने घर वालों को मना चुकी थी.मै अगर मंगनी तोडूं तो सारा घर मेरे खिलाफ .और समाज में अलग बे इज्जती .और मंगेतर का दिल टूटे वो अलग.क्यूँ की वो तो पहले ही मेरी हो चुकी थी.और सना को छोड़ना भी मेरे लिए आसान ना था.मुझे डर था की कहीं वो कुछ उल्टा सीधा ना कर बैठे.इसी कश्मकश में कई दिन गुजर गये.सोचता रहा की क्या करूं क्या ना करूं.एक दिन मैंने अपनी मंगेतर से इस बारे में बात की.और उसे समझाने की कोशिश की .मगर हुआ बिलकुल उलट.वो काफी नाराज़ हो गई.और उसने मुझे धमकी दी की अगर आपने मंगनी तोड़ी तो मै कुछ भी कर जाउंगी.और इधर सना को भी समझाने की कोशिश की ,मगर वो भी मानने के लिए तैयार नही थी.सना क्यूँ की आशिक थी ,मुझे उसका ज्यादा खतरा था की वो कुछ कर गुजर गई तो मुसीबत हो जाएगी.

(डियर रीडर्स आप ही बताएं की मुझे उस वक्त क्या करना चाहिए था,मै इस कशमकश से किस तरह जान छुड़ाता ? आप इसमें मेरी क्या रहनुमाई करना पसंद करते ?आपके इमेल्स का इंतिजार रहेगा.आप कमेन्ट बॉक्स में भी अपनी राय लिख सकते हैं?और साथ ही ये भी बताएं की ये कहानी आपको कैसी लगी?)
''आमिर दुबई ''

राहे मोहब्बत  (हिंदी लव स्टोरी )

राहे मोहब्बत (हिंदी लव स्टोरी )


मिस्टर जमाल बहुत अमीर आदमी थे .और उनकी 4 बेटियां थीं.जमाल साहब ने अपनी बेटियों को बहुत अच्छी तालीम दिलवाई.वो चारों ही एक से बढ़कर एक बा सलाहियत थीं.क्यूँ की वे सब जवानी की दहलीज़ पर कदम रख चुकी थीं.इसलिए जमाल साहब को उनकी शादी की चिंता भी होने लगी.कई अच्छे रिश्ते आये मगर कभी जमाल साहब के समझ में नही आये ,तो कभी उनके बड़े भाई और भाभी के समझ में नही आये.तो कभी लड़कियों ने ही नापसंद कर दिया.वक्त तेज़ी के साथ गुजरता गया.लेकिन उनका रिश्ता ना हो सका.इत्तिफाक से उनको किसी रिश्ते दार ने जो की हमारे भी रिश्ते दार थे ,उनको हमारे घर का पता दे दिया.और मेरे और मेरे भाइयों के बारे में उनको काफी कुछ बता दिया.और हमारी बहुत सारी तारीफें भी कर दीं.जिससे जमाल  साहब और उनकी बेगम ने हमारे घर आने का इरादा किया.तो लड़कियां भी जिद्द कर बैठीं की हमे भी साथ लेकर चलो,जमाल साहब ने उनको बहुत समझाया की हम तुम लोगों के रिश्तों के लिए ही लड़के देखने जा रहे हैं .पर वो अपनी जिद्द पर डटी रहीं की हम भी साथ चलेंगे.हालाँकि ऐसा बहुत ही कम होता है की लड़की वालों के साथ लड़कियां खुद भी अपना रिश्ता देखने जाएँ.कम अज कम हमारे भारत में तो इसका रिवाज कहीं भी नही होगा.लेकिन जमाल साहब अपनी बेटियों से भी बहुत ज्यादा प्यार करते थे,इसलिए उनकी जिद्द को भी ना टाल सके.और उनको भी अपने साथ ले लिया.और अपने शहर से हमारे शहर में हमारे घर पर तशरीफ़ लाये.हमारे घर वालों ने उनकी खूब खातिर तवजोह की.और खूब हंसी मज़ाक का सिलसिला चलता रहा.
ऐसा क्या गुनाह किया ? (हिंदी लव स्टोरी )

ऐसा क्या गुनाह किया ? (हिंदी लव स्टोरी )


                                      ऐसा क्या गुनाह किया ? 
ऐक गलती जो कईयों की जिन्दगी को बर्बाद कर देती है .........................

ये भी एक लड़की के जज्बात की कहानी है ,जिसने सब कुछ पाया ,मगर फिर भी खाली हाथ ही रही.आइये उसी की जुबानी सुनाता हूँ.ये कहानी भी आज ३० ओक्टुबर को ही लिखी है .आज टाइम मिला था इसलिए हिंदी में ये दो कहानिया लिख कर आप सभी तक पहुंचा रहा हूँ.उम्मीद है कि ये पसंद की जाएँगी.
मेरा नाम सफीना है.हम ३ बहने २ भाई हैं.घर में मै सबसे ज्यादा लाडली थी..सबकी चहेती थी.सारे घर वाले मुझसे बहुत प्यार करते थे..हमारे घर में खुदा का दिया सब कुछ था.किसी चीज की कमी नही थी.घर में एक नोकरानी भी थी. जो दिन भर घर का काम करती थी.उसे सेलेरी दी जाती थी.हम बस दिन भर मस्ती करती थी.इसके आलावा कोई काम नही थी.मेरे पाँव में कांटा भी चुभ जाये ये भी हमारे माँ बाप को गवारा नही था.जिन दिनों मै स्कुल में पढ़ती थी , एक लड़का भी हमारी क्लास में था जिसका नाम था अयान.बेहद खुबसूरत ,अच्छा ,नेक दिल लगता था..उससे जो मिलता वो उससे आकर्षित हुए बगैर नही रहता.

मेरा कसूर क्या था ? (हिंदी प्रेम कहानी )

मेरा कसूर क्या था ? (हिंदी प्रेम कहानी )



मेरा कसूर क्या था

एक बेगुनाह लड़की के जज्बात की कहानी ,जो बिना किसी खता किये सज़ा पा गई ,वो भी उम्र भर की .मै आपको उसी की जुबानी सुनाता हु .कि मोहब्बत उसको जिन्दगी भर का दर्द केसे दे गई .